मृतक परिवार को मिलेंगे पांच-पांच लाख
रोडवेज की तरफ से 50-50 हजार के चेक दिए गए
साढ़े चार-चार लाख के लिए मुख्यालय से लिखापढ़ी शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। भीषण बस हादसे में मृतक के परिवार वालों को परिवहन निगम की तरफ से पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। 50-50 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता राशि सोमवार देर रात ही चार परिवारों को उपलब्ध करा दी गई थी, बाकी को मंगलवार को यह राशि दी गई।
डीएम डॉ. राजशेखर के अनुसार राज्य सड़क परिवहन निगम की तरफ से मृतकों के परिवार वालों को इस तात्कालिक सहायता के अलावा साढ़े चार-चार लाख रुपये मुआवजा राशि अभी और दी जाएगी। उनके आवेदन लेकर निर्धारित प्रारूप में भरवा कर रोडवेज मुख्यालय स्वीकृति के लिए भेजा गया है। निदेशक स्तर से स्वीकृति मिलने में करीब 15 से 20 दिन लग सकते हैं। डीएम के अनुसार कुछ मृतकों के परिवार वालों को उक्त सहायता राशि के अलावा किसान बीमा, विभागीय सहायता राशि भी अतिरिक्त दी जाएगी। जैसे बस कंडक्टर के परिवार को इसके अतिरिक्त बीमे की पांच लाख राशि दी जाएगी। जिसकी औपचारिकताएं पूरी करके दिलाई जाएगी। एक मृतक के नाम जमीन थी, उन्हें मुख्यमंत्री किसान बीमा योजना के तहत मुआवजा मिलेगा।
फोटो
शैलेंद्र को पाकर खुशी में नम हुईं आंखें
ट्रॉले की चपेट में गंभीर घायल हुए थे
भूल नहीं पा रहे हैं दुर्घटना का मंजर
अमर उजाला ब्यूरो
बनकटी। छावनी थाना क्षेत्र के विक्रमजोत के पास ढाबे के सामने रविवार रात हुई भीषण दुर्घटना घायल शैलेंद्र नहीं भूल पा रहे हैं। अस्पताल में घर पहुंचने पर लोगों की आंखें खुशी से नम हो गईं।
घायल शैलेंद्र के घर पहुंचने पर हालचाल जानने गांव के लोग भी जुट गए। शैलेंद्र मंजर देख कर सदमे में हैं। देईसाड़ निवासी शैलेंद्र (28) चित्रकूट में एंबुलेंस चलाते हैं। रविवार को घर आने के लिए उसी बस में सवार थे, जिसके यात्रियों को ट्रॉले ने रौंद दिया था। घटना में छह की मौके पर ही जबकि एक ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया था। बकौल शैलेंद्र घटना बताते हुए रो पड़े। कहा की बस अचानक खराब हो गई और लाइट भी नहीं जल रही थी। चालक ने धक्का देने को कहा। हम सात-आठ लोग धक्का दे ही रहे थे कि तेज रफ्तार ट्रॉले को देखकर भागने की कोशिश की लेकिन दाहिनी तरफ़ भागने से कुचल गए। झटके से पेट के बल जा गिरा। विक्रमजोत अस्पताल में होश आया।
परिवार की चीख से हर कोई रोया
दुबौलिया। इलाहाबाद से वापस घर आ रहे बरसांव के विवेकानंद तिवारी (33) की सोमवार रात में में ही अंत्येष्टि कर दी गई। विवेकानंद हादसे का शिकार हो गए थे। सोमवार देरशाम जैसे ही शव घर पहुंचा भीड़ लग गई। पत्नी रेखा, मां तारा देवी, आठ वर्षीय बेटी सुभी, छोटी बहन बंटी व भाई अच्युतानंदन, मनोज, बृहस्पतिनाथ की चीख से हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। पत्नी रेखा व मां तारा शव को देखकर अचेत हो गईं। बेटी सुभी यह कहते हुए कि मेरे पापा क्यों नहीं बोल रहे हैं। उनसे अब कैसे बात करूंगी। यह कहते हुए रोने लगी यह सब देख लोगों की आंखें डबडबा गईं। कटरिया गांव के पास सरयू नदी के तट पर मुखाग्नि उनके छोटे भाई बृहस्पतिनाथ ने कांपते हाथों से दी। मंगलवार को भी मातम पसरा रहा है।
होनहार को किया मिट्टी में दफन
रुधौली। हाईवे पर हुए भीषण हादसे में 21 वर्षीय इंद्रसेन वर्मा भी मारे गए। पढ़ाई का खर्च लेने के लिए इंद्रसेन इलाहाबाद से बस्ती आ रहे थे। सोमवार को बेटे की जगह पोस्टमार्टम से लाश घर पहुंची तो हर ओर चीख मच गई। अविवाहित होने से रीति रिवाज के मुताबिक चिता के बजाय दफन किया गया। बुजुर्ग व कमजोर हाथों से जवान बेटे के शव पर मिट्टी डाली तो हर किसी की आंखों से आंसू बरबस ही छलक उठे। घर पर मा व बहन का रो-रोकर बुरा हाल है और वे यह कत्तई मानने को तैयार नहीं कि उनका 21 वर्षीय इन्द्रसेन अब इस दुनिया को छोड़ कर जा चुका है। मंगलवार को जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम हर्रैया ने फोन कर परिवारजनों को मुख्यालय बुलाया और सरकार द्वारा घोषित की गई पांच लाख के मुआवजे में से 50 हजार की तत्काल सहायता राशि प्रदान की गई। जिलाधिकारी ने मुआवजे की शेष 4.5 लाख रुपये की धनराशि 20 दिनों के अंदर उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया है।
रोडवेज से सुरक्षित सफर का भरोसा टूटा
प्राइवेट वाहनों की सुविधा पर भरोसा
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। लंबी दूरी की यात्रा के लिए आम जन मानस प्राइवेट के बजाय रोडवेज बसों से यात्रा को तरजीह देता है। क्योंकि भरोसा है कि सफर आरामदेह व सुरक्षित रहेगा। लेकिन आधे रास्ते में खराब होती बसें और बढ़ रहे हादसों से लोग डरने भी लगे हैं।
रविवार रात भदोई गांव के पास हादसे में सात लोग मारे गए थे। भदोई गांव के ही अवनीश सिंह कहते हैं कि दुर्घटना के वक्त ढाबे पर ड्यूटी पर थे। उनके सामने ही यात्रियों के परिवहन विभाग की लापरवाही की सजा मिली। मंगलवार को तमाम क्षेत्रीय लोग घटना की जानकारी के लिए सुबह अखबार पढ़ते दिखे। दुर्घटना के दौरान हुई मौतों से पूरे क्षेत्र में लोग रोडवेज बस को कोसते दिखे। लोगों को गुस्सा बसों के मेंटीनेंस पर भी था। रखरखाव को लेकर विभाग की आलोचना करते दिखे। ग्राम प्रधान जगदम्बा यादव का कहना है की फोरलेन पर रोडवेज वाले अब गाड़ी सही नहीं चलाते हैं। इनकी चपेट में कब कौन आ जाए, पता नहीं। जगह-जगह ढाबों के सामने गाड़ी खड़ी कर देते हैं। इसमें बैठे यात्री इधर-उधर टहलने लगते हैं। इससे अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
मुकदमा दर्ज कराने पहुंचे शैलेंद्र
दुर्घटना में दोबारा जीवन दान पाने वाले शैलेन्द्र मंगलवार को मुकदमा दर्ज कराने छावनी थाने पहुंचे। पैर और सीने में मेडिकल बेल्ट व पट्टी बंधी थी। शैलेन्द्र ने बताया कि ईश्वर की कृपा से ही जिंदा हूं। वरना मिनट भर में सात सात लोगों के चिथड़े उड़ गए। बस के आग चले जाने के कारण कम चोट लगी। देइसाड़ निवासी शैलेन्द्र कौशाम्बी में एंबुलेंस चालक हैं। बताया कि पुलिस का बड़ा सहयोग मिला जो देवदूत बनकर आए। यहां पहुंचने पर एसओ ने बताया है कि रात में ही ट्रक चालक और खलासी पर मुकदमा दर्ज हो चुका है। अब कार्रवाई आगे बढ़ गई है।