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बहू-बेटे से तिरस्कृत को मदद की दरकार

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बहू-बेटे की सताई मां रह रही सड़क पर
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बस्ती।
बहू-बेटे से तिरस्कृत लालगंज थाने के खरवनिया की रहने वाली 70 साल की सुखना के जान के लाले पड़े हैं। उम्र भर बटोर कर इकट्ठा की गई रकम हड़पने के बाद उसके बेटे और बहू ने घर से निकाल दिया। 14 महीने से रोड के किनारे गुजर-बसर कर रही अबला दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर है। उसका कहना है कि पुलिस यदि मदद करती तो कम से कम उसे अपने घर में छिपने की ठौर मिल जाती।
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मानवाधिकार आयोग, सीएम, डीजीपी सहित उच्चस्तरीय तमाम अधिकारियों से प्रार्थनापत्र के जरिए गुहार लगा चुकी महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सीजेएम न्यायालय में सुनवाई करते हुए अदालत ने विपक्षी गण यानी इसके बेटे-बहू को घरेलू हिंसा के आरोप में जांच का आदेश दिया। अदालत से 20 जनवरी 2017 को आदेश जारी हुआ। इसमें पीड़िता को वाजिब हक दिलाने की बात कही गई है। महिला का कहना है कि इसका अनुपालन नहीं हो सका। 27 जुलाई को मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए एसपी को निर्देशित किया है कि पुलिस सम्यक जांच कर आयोग को रिपोर्ट करे। एसपी संकल्प शर्मा का कहना है कि प्रकरण में पुलिस वैधानिक कार्रवाई करेगी।
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