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काश! समय से मिली होती एंबुलेस सहायता तो बच सकती थी दो जान

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समय से मिली होती एंबुलेंस तो बच सकती थी दोनों की जान
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सूचना के 50 मिनट बाद तक तड़पते रहे घायल मजदूर, ठेकेदार
गांव के लोगों ने ठेले पर लादकर दोनों को पहुंचाया सीएचसी हर्रैया
सीएचसी से महज तीन किलोमीटर दूर गांव, रास्ते में मिली एंबुलेंस
राजेश सिंह विसेन
हर्रैया। आमजन को दुर्घटनाओं में समय से अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने के लिए संचालित एंबुलेंस सेवा का बुरा हाल है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से महज तीन किमी व थाने से सटे खम्हरिया गंगाराम में दीवार के मलबे में दबने की सूचना के बाद भी अस्पताल पहुंचने में काफी वक्त लग गया। अत्यधिक रक्तस्राव के चलते दोनों को बचाया नहीं जा सका। गांववालों की मानें तो करीब 50 मिनट तक वे मौके पर तड़पते रहे और बाद में ठेले पर लादकर दोनों को सीएचसी लाते समय रास्ते में एंबुलेंस मिली।
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गांव के रामधनी यादव ने बताया कि दीवार के मलबे में मजदूर और ठेकेदार के दबे होने की सूचना के तुरंत बाद ही 102 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस सहायता मांगी गई। 50 मिनट इंतजार किया गया लेकिन एंबुलेस नहीं पहुंची। गांव में मौजूद लोगों ने मलबे में फंसे रमेश और अशोक को बाहर निकाला तो दोनों चेतन अवस्था में थे। रमेश का एक पैर लगभग कटकर अलग हो गया था जबकि अशोक के सिर से खून बह रहा था। मौके पर कोई साधन अस्पताल ले जाने के लिए नहीं था। सूचना देने के बाद भी करीब 50 मिनट एंबुलेंस नहीं पहुंची तो एक ठेले पर रखकर दोनों को सीएचसी ला रहे थे। नजदीक पहुंचने पर एंबुलेस मिली तब तक देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने में लगे वक्त के कारण बड़ी मात्रा में खून बहने से दोनों की हालत गंभीर हो गई और कुछ अंतराल पर दोनों की मौत हो गई। खम्हरिया गांव के रहने वाले लोग इस घटना को लेकर स्तब्ध और अवाक हैं। सभी का मानना है कि समय से दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया होता जान बच सकती थी।
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