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कच्ची शराब का सुरक्षित अड्डा बन गया माझा

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कच्ची शराब का सुरक्षित अड्डा बन गया माझा
तीन जिलों की सीमा और सरयू की धारा से सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। छावनी थाना क्षेत्र में घाघरा नदी का दोआबा और तटबंधों का इलाका कच्ची शराब के धंधेबाजों के लिए अनुकूल स्थान बन गया है। यहां बेखौफ इसका धंधा होता है। इन्हें न तो पुलिस का डर है न ही आबकारी का। माझा की विपरीत परिस्थितियां पुलिस से बचाती हैं तो अनुकंपा से आसान हो जाती है।
तीन जिलों अयोध्या, गोंडा और अंबेडकर नगर की सीमा लगती है। प्रशासन और पुलिस ने जब से कच्ची शराब के प्रति सख्त रुख अपनाया तब से धंधेबाज घाघरा के उस पार अपना अड्डा जमा लिए हैं। रास्ता न होने तथा बीच में सरयू नदी की धारा के चलते पुलिस वहां तक पहुंच ही नहीं पाती है। यदि पुलिस पैदल और नाव से पहुंचती भी है तो धंधेबाजों को भागने का मौका मिल जाता है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अभियान चलाकर पुलिस और आबकारी विभाग भट्ठी तोड़ कर चली आती है। यही वजह है कि इस धंधे पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। सरयू का यह माझा-दियारा सैकड़ों हेक्टेयर में फैला है। पुलिस प्रति वर्ष बड़े पैमाने पर अवैध शराब के धंधेबाजों पर कार्रवाई करती है। हजारों की संख्या में भट्ठियां तोड़ी जाती हैं। भारी मात्र में कच्ची शराब और लहन नष्ट की जाती है। पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों के लौटते ही धंधा शुरू हो जाता है। नदी के किनारे बसें दो दर्जन गांव छतौना, संदलपुर, सीतारामपुर, बाघानाला, माझिलगांव, सहजौरा, ऐसे गांव हैं जहां यह धंधा चलता रहता है।
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सुरंग में छिपा कर रखी थी शराब
पिछले साल पुलिस ने लगभग 10 फीट गहरी सुरंग देखी। इस सुरंग का उपयोग शराब बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामग्री को छिपाने के लिए किया जाता था। यहां धंधेबाजों के नए-नए अंदाज देखने को मिले। जानकारों का कहना है कि दियारा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का निर्माण होता है। जहां पुलिस चार पहिया वाहन से अचानक नहीं पहुंच सकती है। पुलिस कर्मियों को पैदल अथवा बाइक से ही जाना पड़ता है। मूवमेंट होते ही धंधेबाजों तक सूचना पहुंच जाती है। दियारा में सीतारामपुर, सहजौरापाठक, विक्रमजोत कस्बा, फूलडीह, मलौलुगोसाई, खेमराजपुर, चद्रपलिया, माझिलगांव, पड़ारिया, रैदासपुर, संदलपुर, छतौना, सासंद ग्राम अमोढ़ा, तालागांव, नगरा, बाघानाला, रिक्खीपुर, भट्ठे के पास कच्ची शराब बनाने अथवा बेचने का काम व्यवसाय का रूप ले चुका है। कार्य में महिलाएं बड़ी हिस्सेदारी निभा रहीं हैं।
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