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पुलिस बेबस: सोशल मीडिया पर फैल रहा नफरत का वायरस

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बस्ती। सोशल मीडिया पर आए दिन कोई न कोई विवादित पोस्ट वायरल हो जाती है। कई पोस्ट धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली तो कई उकसाने वाली होती है। पिछले हफ्ते भी धार्मिक भावना भड़काने संबंधी पुरानी बस्ती क्षेत्र में एक ऐसा ही प्रकरण सामने आया था। एक आरोपी शांति भंग की आशंका में गिरफ्तार हुआ था। वाल्टरगंज में भी पिछले महीने ऐसा ही एक मामला आया। एपीएन काॅलेज में सोशल मीडिया पर टिप्पड़ी को लेकर तमंचा लहराने की घटना हुई थी।
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ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई तभी करती है जब कोई व्यक्ति या संगठन इसकी शिकायत करता है। पुलिस विभाग की बैठकों में सोशल मीडिया पर निगरानी की बात कही जाती है, लेकिन ऐसा होता नहीं। इसी का नतीजा है कि सोशल मीडिया पर नफरत का वायरस लगातार पांव पसार रहा है।
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केस एक
15 अगस्त को सोशल मीडिया फेसबुक पर धर्म विशेष के प्रति अभद्र टिप्पणी करने का पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र में एक मामला सामने आया था। शिकायत मिलते ही पुलिस ने प्लास्टिक कांप्लेक्स निवासी शाहिद अली को शांतिभंग की आशंका के तहत गिरफ्तार कर लिया।
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केस दो
16 अगस्त को फेसबुक पर कमेंट करने काे लेकर एपीएन पीजी काॅलेज के छात्रों के दो गुटों में जमकर मारपीट हुई। आरोप है कि एक छात्र ने तमंचा लहराते हुए धमकी दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत कराया। बताया जा रहा है कि फेसबुक पर किये गए कमेंट को लेकर गौरव पांडेय व अंबुज पटेल के गुट में विवाद शुरू हुआ था।


केस तीन
सोशल मीडिया पर विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान मतगणना स्थल पर लाठी व कैमरा लेकर पहुंचने की अपील करने का मामला सामने आया था। जानकारी होने पर इन सभी पर वाल्टरगंज, पैकोलिया व लालगंज थाने में मतगणना में बाधा पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने का केस दर्ज किया गया था।
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केस चार
तीन जुलाई को सोशल मीडिया पर देश विरोधी नारे लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद वाल्टरगंज पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया था। शमशेर अली उर्फ राजा नाम के आरोपी पर राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नारा लगाने, विभिन्न समुदाय के बीच वैमन्स्यता व घृणा पैदा करने, साजिश में शामिल होने की धारा में केस दर्ज किया गया था।
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ऐसे पोस्ट से रहें सावधान

कम्यूनल मैसेज फॉर्वर्ड करना जिससे धर्म या जाति की भावनाओं को ठेस पहुंचे या कोई दंगा भड़क जाए।

- किसी के चरित्र पर सवाल उठाना आईटी एक्ट के तहत अपराध है।

- ऐसी बात या मैसेज जिससे किसी इंसान की मानहानि होती है, कोई झूठी अफवाह फैलाना भी साइबर क्राइम के अंतर्गत आता है।

- बेइज्जती करने वाले शब्द या सिंबल, सार्वजनिक तौर पर किसी की छवि खराब करने वाले शब्द भी लिखना गैरकानूनी है।

- सोशल मीडिया या वॉट्सएप पर अगर कोई गालियां दे रहा है तो उसे भी साइबर क्राइम की श्रेणी में रखा जा सकता है।

- आपत्तिजनक फोटो सोशल प्लेटफॉर्म के जरिये वायरल करना, बिना समझे कोई पोस्ट फारवर्ड करना मुसीबत को दवात देने जैसा है।


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सोशल मीडिया पर पुलिस लगातार निगरानी बनाए हुए है। ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है जो गलत टिप्पणी कर रहे हैं। ऐसा करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। अपील की कि किसी भी धर्म, मजहब के प्रति गलत, अमर्यादित, आपत्तिजनक टिप्पणी न करें। ऐसा करना कानूनी अपराध है। सोशल मीडिया पर कोई भी मैसेज बिना जांचे फॉरवर्ड न करें, वह मैसेज एक अफवाह और गलत खबर हो सकती है, जिसके लिए ऐसा करने वाले के ऊपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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-आरके भारद्वाज, आईजी
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