बीच से दरक गया है झिरझिरवा पुल। संवाद
पुराने पुल का अस्तित्व खत्म होने पर 2017 में चालू हुआ था नवनिर्मित पुल लुंबिनी से दुद्धी तक का आवागमन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महज छह साल पहले निर्मित लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर नगर बाजार का झिरझिरवा पुल पर दो से तीन सेंटीमीटर चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। राह चलते समय यह दृश्य देखते ही बनारस से नेपाल तक सफर करने के राहगीर सहम जा रहे हैं। हड़बड़ाहट में लोग कार, बाइक, बस आदि वाहनों की गति पर अचानक ब्रेक लगा रहे हैं। इससे गाड़ियां अनियंत्रित हो रही हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने जैसा कोई साइन बोर्ड भी नहीं लगाया है।
पड़ोसी जनपद आंबेडकरनगर समेत बनारस से बस्ती मुख्यालय होकर नेपाल तक को जोड़ने वाली एनएचएआई 233 लुंबिनी-दुद्धी मार्ग का निर्माण आठ साल पहले हुआ था। नगर थाना क्षेत्र के पोखरनी चौराहे के पास इस मार्ग पर अंग्रेजों के जमाने का बना झिरझिरवा पुल मार्च 2017 में गिर गया था। तब एनएचएआई की ओर से बनवाए गए नए पुल को चालू करवाया गया। करीब 100 मीटर लंबे और 14 मीटर चौड़े इस पुल के चालू हो जाने से लुंबिनी-दुद्धी मार्ग का आवागमन बहाल हुआ। मगर, छह वर्ष बाद ही यह पुल भी क्षतिग्रस्त होने के कगार पर पहुंच गया है। पुल पर दरारें पड़ने लगी हैं। इससे इस पुल से वाराणसी से नेपाल तक का आवागमन सुरक्षित नहीं है। यात्रा के दौरान अचानक दरार देखकर लोग सहम जा रहे हैं। लोगों के इस पुल के ढहने की आशंका सता रही है।
नगर बाजार जा रहे पूर्व प्रवक्ता जगन्नाथ पांडेय ने पुल में पड़ी दरारों को देख भौचक रह गए। उन्होंने आम राहगीरों को किसी अनहोनी से बचाने के लिए इसकी सूचना तत्काल एनएचएआई के अधिकारियों को दी। इसके बाद इंजीनियर अभय सिंह की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि जंक्शन प्लेट में खिंचाव के कारण दरारें आई हैं। इसे ठीक करने के लिए टीम बुलाई जा रही है। खतरे की कोई बात नहीं है। लेन बदल कर आवागमन चालू रखा जाएगा।
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कैंप कार्यालय से काम चला रही एनएचएआई
जिले में दो महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं एनएचएआई के अधीन है। पहला अयोध्या-गोरखपुर फोरलेन। इसकी कुल लंबाई जिले में करीब 80 किमी है। दो टोल प्लाजा भी हैं। यह 2009 में बनकर पूरी हुई थी। दूसरी सड़क लुंबिनी-दुद्धी टू-लेन है। इसकी कुल लंबाई जिले में 55 किमी है। इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान यहां किराये के भवन में एनएचएआई के एक्सईएन स्तर के कार्यालय संचालित हो रहे थे। निर्माण खत्म होने के बाद यह कार्यालय बंद कर दिया गया। वर्तमान परियोजना प्रबंधक गोरखपुर में बैठते हैं। यहां मड़वानगर टोल प्लाजा के पास कैंप कार्यालय रह गया है। जहां यदाकदा एनएचएआई के अवर अभियंता स्तर के अधिकारी आते हैं। यही वजह है कि सड़कों की देखरेख नियमित नहीं हो पा रही है। दोनों राजमार्ग पर सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद काफी दिन तक एनएचएआई को पता ही नहीं चल पाता है। जिले के आला अधिकारियों की सख्ती के बाद ही एनएचएआई के जिम्मेदार मरम्मत कार्य के लिए सक्रिय होते हैं।