विद्युत निगम में बार-बार सामने आ रही रिश्वतखोरी
बस्ती। विद्युत वितरण निगम अपने कारनामों को लेकर लगातार सुर्खियों में है। कभी रिश्वत लेकर अवैधानिक तरीके से लाइन बनाने को लेकर यह महकमा चर्चा में आ जाता है तो कभी ट्रांसफॉर्मर लगवाने, बिजली के बिल में गोलमाल करने का मामला प्रकाश में आता है। तीन महीने के भीतर दो अपर अभियंताओं की रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने से साबित होता है कि विभाग में भ्रष्टाचार गहरे तक जड़ जमा चुका है। जहां कनेक्शन देने से लेकर बिल और लाइन ठीक करने तक के लिए खुलेआम रुपये लिए जाते हैं।
23 अगस्त को विद्युत वितरण खंड तृतीय के ओडवारा उपकेंद्र पर तैनात अवर अभियंता राघवेंद्र प्रताप को गोरखपुर की एंटी करेप्शन टीम ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। मामला मुंडेरवा थानाक्षेत्र के दिकतौली का था। जहां के दिवाकर विक्रम ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की थी। उनका कहना था कि वह गांव में पानी शुद्घ करने वाला आरओ प्लांट लगा रहे थे। जिसे चलाने के लिए 45 केवीए व्यावसायिक कनेक्शन के लिए आवेदन किए थे।
कनेक्शन के शुल्क की रसीद कटवाने के अलावा बाकी औपचारिकताएं पूरी कर चुके थे। किंतु मीटर से कनेक्शन जोड़ने के लिए अवर अभियंता 50 हजार रुपये मांग रहे थे। आजिज आकर 20 अगस्त को एंटी करेप्शन टीम से शिकायत कर दी। टीम ने 23 अगस्त को जेई राघवेंद्र प्रताप को गिरफ्तार कर लिया था।
23 नवंबर को उसी ओडवारा उपकेंद्र पर तैनात अवर अभियंता राजेश कुमार प्रजापति को भी एंटी करप्शन टीम ने अधिशासी अभियंता कार्यालय से गिरफ्तार किया। उन पर ट्रांसफॉर्मर लगाने के नाम पर 10 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा। इस संबंध में एंटी करप्शन टीम के प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार दीक्षित ने कोतवाली में तहरीर दी। जिसमें बताया कि मुंडेरवा थानाक्षेत्र के हरिहरपुर निवासी गोपाल ने तीन केवीए का कनेक्शन लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जिसका इस्टीमेट बनाने, रिपोर्ट लगाने और पासवर्ड जारी करने के लिए 10 हजार रुपये की मांग की गई थी। 21 नवंबर को गोपाल ने इसकी एंटी करप्शन से शिकायत की थी।
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प्राइवेट लाइनमैन बन रहे माध्यम
बताया जा रहा है कि लाइनमैन की कमी और काम का बोझ ज्यादा होने की वजह से विद्युत निगम में तमाम प्राइवेट लाइनमैन लगाए गए हैं। जो लाइन की मरम्मत करने से लेकर नई लाइन बनाने आदि में सहयोग करते हैं। इसके बदले वे उपभोक्ताओं से रुपये लेते हैं। इन्हीं प्राइवेट लाइनमैनों के जरिए अधिकतर अभियंता रिश्वत की मांग और वसूली करते हैं। बुधवार को ऐसा ही एक जेई का सहयोगी गिरफ्तार किया गया था। जेई ने उसी के माध्यम से रुपये लिए थे।