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Basti News: नए वाहनों के पंजीयन में चढ़ाना पड़ रहा चढ़ावा... शोरूम से लेकर विभाग तक एजेंटों की सेटिंग

Tue, 17 Oct 2023 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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रजिस्ट्रेशन के बहाने दो पहिया पर हजार और चार पहिया वाहनों पर वसूल रहे दो हजार रुपये अतिरिक्त
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- चढ़ावा चढ़ाने के लिए एजेंसीवार परिवहन विभाग में पहुंच रहे एजेंट, फाइलों की संख्या पर हो रहा हिसाब
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। परिवहन विभाग में नए वाहनाें के पंजीयन में भी बड़ा खेल है। बिना चढ़ावा चढ़ाए नए वाहनों का पंजीयन आसानी से नहीं हो सकता है। इसकी मार ग्राहकों को झेलनी पड़ रही है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के चलते परिवहन कार्यालय में नए वाहन स्वामियों की भीड़ भले नहीं हो रही है, लेकिन उनकी जेब की रकम यहां तक पहुंच रही है। ग्राहकों को इसका पता भी नहीं चल रहा है। क्योंकि इस खेल का पूरा दारोमदार वाहन एजेंसियों पर है। वाहन पंजीयन के नाम पर वसूले जा रहे अतिरिक्त रकम से एजेंसी और विभाग दोनों खुशहाल हैं।
यदि आप नए वाहन की खरीदारी कर रहे हैं तो यह गफलत न पालिए कि आपका पंजीयन बगैर सुविधा शुल्क के हो रहा है। एजेंसियों को वाहन पंजीयन के लिए अधिकृत भले ही किया गया है। मगर, स्वीकृति विभाग से ही मिलती है। इसके लिए प्रति फाइल चढ़ावा चढ़ाने की परंपरा पुरानी है। पहले अलग-अलग वाहनों के पंजीयन के लिए दलालों के साथ वाहन स्वामियों की भीड़ रहती थी, लेकिन अब फाइलों के बंडल के साथ एजेंसी वार दलाल पहुंच रहे हैं।
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यही वजह है कि परिवहन विभाग में नए दो और चार पहिया, भारी वाहनों के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर भीड़ नहीं दिखती है। बावजूद इसके पंजीयन के काम का बोझ यहां के लिपिकों और कंप्यूटर ऑपरेटर पर बना हुआ है। एजेंसी वार नए वाहनों के पंजीयन को स्वीकृति देने में सुबह से शाम हो जा रही है। जिले में प्रतिदिन दो और चार पहिया वाहन मिलाकर औसतन 80 से 100 वाहनों का पंजीयन हो रहा है। इसके बदले अच्छा खासा चढ़ावा चढ़ाया जा रहा है। इसके लिए विभागीय एजेंटों की सेटिंग वाहन एजेंसियों तक है।
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दो पहिया वाहन पर रजिस्ट्रेशन शुल्क ले रहे एक हजार
अमूमन दो पहिया वाहनों की ब्रिकी दर ज्यादा है। जिले में संचालित विभिन्न कंपनियों की आधा दर्जन टू-व्हीलर एजेंसियों से प्रतिदिन औसतन 50 से 60 गाड़ी बिक रही हैं। दो पहिया वाहनों के पंजीयन के लिए सेल लेटर पर लिखे मूल्य का 10 प्रतिशत शुल्क जमा करना होता है। मगर, एजेंसियों पर ग्राहकों से पंजीयन के लिए प्रति गाड़ी निर्धारित शुल्क से डेढ़ से दो हजार रुपये तक अतिरिक्त वसूल किए जा रहे हैं। यह अतिरिक्त रकम परिवहन विभाग, एजेंट और एजेंसी तीनों में बंट रहा है। इसी तरह प्रतिदिन बिकने वाले औसतन 4 से 5 ई-रिक्शा और 5 से 6 लग्जरी कारों के रजिस्ट्रेशन में भी खेल चल रहा है।
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गुड्स कैरियर एवं बसों के पंजीकरण में लिए जा रहे पांच हजार अतिरिक्त
गुड्स कैरियर श्रेणी के वाहन जैसे पिकअप, ट्रक आदि वाहनों के पंजीकरण के लिए नान एसी 10 लाख रुपये से कम मूल्य वाले वाहनों का वास्तविक मूल्य का सात प्रतिशत और इससे अधिक मूल्य होने पर कुल मूल्य का 10 प्रतिशत शुल्क अदा करना होता है। मगर, वाहन एजेंसियों पर ग्राहकों से प्रति गाड़ी रजिस्ट्रेशन शुल्क पांच से सात हजार रुपये अतिरिक्त लिए जा रहे हैं।
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एजेंसियों से ऑनलाइन आवेदन के बाद विभाग पहुंच रहे एजेंट
वाहन एजेंसियों पर ग्राहकों से अधिक रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा कराने के बाद अस्थाई रजिस्ट्रेशन पर वाहन छोड़ दिए जा रहे हैं। इसके बाद प्रतिदिन बिके हुए वाहनों का स्थाई पंजीकरण के लिए एजेंसी के जरिये आवेदन हो रहा है। अगले दिन आवेदन की फाइलों के साथ एजेंट विभाग पहुंच रहे हैं। जहां चढ़ावा चढ़ाने के बाद आरसी निर्गत कर दी जा रही है। जानकारों की मानें तो बाइक के पंजीयन पर दो सौ रुपये, कार पर पांच सौ रुपये और गुड्स कैरियर एवं बस के पंजीयन पर दो हजार रुपये विभाग में चढ़ावा चढ़ाना पड़ रहा है। बाकी रुपये एजेंट और एजेंसी के बीच बंट रहा है। विभाग के जिम्मेदार इस खेल पर चुप्पी साधे रहते हैं।
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केस- एक
हर्रैया के सुधाकर पाठक का कहना है कि उन्होंने दो पहिया गाड़ी खरीदी। उसका वास्तविक मूल्य 80,248 बताया गया। नियम के अनुसार इसका आठ प्रतिशत पंजीयन शुल्क जमा होना चाहिए, लेकिन एजेंसी पर पंजीयन के नाम पर 9000 रुपये जमा कराए गए। रसीद भी नहीं दी गई। पूछने पर बताया गया इसमें फाइल चार्ज और विभाग का खर्चा भी शामिल है। सप्ताह भर बाद एजेंसी से ही हमें नंबर प्लेट मिल गया।

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केस दो
रुधौली के अंबिकेश कुमार का कहना है कि पंजीयन के नाम पर वसूले जा रहे अतिरिक्त शुल्क प्रतिदिन लाखों में जा रहे हैं। एजेंसी वाले परिवहन विभाग की सांठगांठ से ही ग्राहकों से अतिरिक्त रकम वसूल रहे हैं। इससे जिम्मेदारों पर सीधे आरोप नहीं लग पा रहा है और इसकी मार ग्राहक झेल रहे हैं। हमने भी अभी जल्दी एक कार खरीदी है। रजिस्ट्रेशन शुल्क 49500 रुपये की जगह 52 हजार रुपये एजेंसी में जमा किए हैं।

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केस ती
कटरा के अमरेश सिंह का कहन है पंजीयन शुल्क निर्धारित है। बावजूद इसके अतिरिक्त शुल्क वसूल किया जा रहा है। एजेंसियों की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि अतिरिक्त शुल्क न देने पर आरसी जारी होने में महीनों लग जाएंगे। हमने गुड्स कैरियर श्रेणी का वाहन खरीदा। पंजीयन शुल्क के अलावा पांच हजार रुपये अतिरिक्त देने पड़े। तब एक सप्ताह बाद बिना दौड़ भाग के एजेंसी से ही आरसी और नंबर प्लेट मिल गया।
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सितंबर में पंजीकृत हुए 1988 वाहन
परिवहन विभाग में जिले भर की एजेंसियों से छोटे-बड़े 1988 वाहनों का पंजीकरण कराया गया है। इसमें 135 ई-रिक्शा, 156 कार, 61 गुड्स कैरियर, 22 ऑटो रिक्शा, चार बस और 1610 दो पहिया वाहन शामिल है।
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जानिए क्या हैं पंजीयन शुल्क
40 हजार से अधिक कीमत वाले दो पहिया वाहन वास्तविक मूल्य का 10 प्रतिशत और इससे कम कीमत वाले वाहनों सात प्रतिशत पंजीयन शुल्क देय है। इसके अलावा कार 10 लाख से अधिक कीमत पर वास्तविक मूल्य का 10 प्रतिशत और इससे कम कीमत वाले एसी गाड़ी पर आठ प्रति और नान एसी पर सात प्रतिशत देना होता है। वहीं सवारी बस का पंजीयन शुल्क 127 रुपये प्रति सीट के हिसाब से तथा स्कूल वाहनों का वास्तविक मूल्य का सात प्रतिशत एक बार अदा करना होता है।
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कोट
वाहन एजेंसियों को पंजीयन शुल्क का स्लैब हर माह उपलब्ध कराया जाता है। इसके अनुसार ही ग्राहकों से रुपये जमा कराने होते हैं। अब पंजीयन शुल्क ऑनलाइन जमा होता है। किसी को भी अतिरिक्त शुल्क नहीं देना चाहिए। यदि पंजीयन शुल्क अधिक लिए जा रहे है तो एजेंसियों को नोटिस जारी करेंगे। विभाग के पंजीकरण पटल की भी जांच कराई जाएगी।
फरीदुद्दीन, आरटीओ प्रशासन
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