बस्ती। यदि पीडब्ल्यूडी की सड़क पांच साल के अंदर खराब होगी तो उसे सुधारने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। इसके पूर्व अलग-अलग श्रेणी के मार्गों के रखरखाव के लिए अलग-अलग समय सीमा का निर्धारण किया गया था। इस नई व्यवस्था से पांच साल बाद ही सड़कों के नवीनीकरण का समय आएगा और राहगीरों का सफर आसान होगा। ठेकेदार भी सड़क निर्माण में मनमानी नहीं कर पाएंगे।
सड़कों की गुणवत्ता को लेकर आए-दिन शिकायतें मिलती रहती हैं। कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि निर्माण के कुछ ही महीनों व वर्षों बाद नई सड़क टूटने लगती है। कार्यदायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगते हैं। इसी तरह की शिकायतें जब शासन तक पहुंचीं तो प्रमुख सचिव अजय चौहान ने 16 जनवरी को पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से सभी श्रेणियों की सड़कों के रखरखाव के लिए ठेकेदार से पांच साल तक के लिए अनुबंध करने के निर्देश जारी कर दिए।
पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं के अनुसार, राज्य मार्गों के रखरखाव के लिए पूर्व में चार साल तक ठेकेदार से अनुबंध कराया जाता था। प्रमुख जिला मार्ग व अन्य जिला मार्गों को दुरुस्त रखने के लिए ठेकेदारों को पांच साल तक का जिम्मा सौंपा जाता था। जबकि ग्रामीण मार्गों के निर्माण के बाद उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आठ साल तक मानी गई थी। अब सभी तरह के मार्गों के लिए पांच साल तक ठेकेदार को जिम्मेदार बनाया गया है।
अब चमकती नजर आएंगी गांव की सड़कें
पांच साल तक सड़कों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ठेकेदार को मिलने के कारण अब गांव की सड़कें चमकती नजर आएंगी। जबकि इसके पूर्व इसके अनुरक्षण के लिए आठ साल तक का समय दिया गया था। नतीजतन ठेकेदार पूरी तरह से ध्वस्त सड़कों पर लीपापोती कर काम चलाते थे। यही नहीं इन सड़कों का नवीनीकरण करने में विभाग भी कोताही बरतता था। पांच साल बाद अब इन सड़कों का नियमित नवीनीकरण हो सकेगा।
पांच वर्ष बाद ही वापस होगी धनराशि
शासन से राज्य मार्ग, प्रमुख जिला मार्ग, अन्य जिला मार्ग, बाईपास व शहरी मार्ग के नवनिर्माण के लिए निर्माण लागत का 2.5 प्रतिशत, पुनर्निर्माण के लिए 5 प्रतिशत व नवीनीकरण के लिए निर्माण लागत की 25 फीसदी धनराशि कोषागार में जमा रखी जाएगी, जो समयावधि पूरी होने के बाद ही वापस की जाएगी।
शासन के निर्देश का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। कार्यदायी फर्मों से अनुबंध उसी अनुसार कराए जाएंगे।
- राजेश कुमार, अधीक्षण अभियंता बस्ती वृत्त, पीडब्ल्यूडी