बस्ती। जिला उपभोक्ता फोरम विवाद प्रतितोष आयोग ने ओपेक चिकित्सालय कैली में एक महिला के पथरी के ऑपरेशन के मामले में तत्कालीन चिकित्सक डॉ. शिव प्रसाद चौधरी को अंतिम रूप से दोषी ठहराया है। ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद महिला की मौत हो गई थी। इस मामले में संबंधित चिकित्सक को 6.50 लाख क्षतिपूर्ति तथा 50 हजार रुपये अधिवक्ता शुल्क व वाद व्यय के रूप में अदा करना होगा।
आदेश की तिथि से भुगतान की तिथि तक 8 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी चुकता करने का आदेश हुआ है। देयक धनराशि मृतका के पति को मिलेगा। गौर थाना क्षेत्र के आमा बाजार टिनिच के रहने वाले ढुनमुन ने आयोग में क्षतिपूर्ति का वाद दाखिल किया कि उनकी पत्नी चरण कुमारी के पेट में तकलीफ होने पर ओपेक चिकित्सालय कैली में तैनात तत्कालीन सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चौधरी को दिखाया गया।
चिकित्सक ने पित्त की थैली में पथरी होना बताया और आपरेशन की सलाह दी। ढुनमुन अपनी पत्नी को भर्ती करवा दिया। आरोप लगाया कि 2 जनवरी 2013 को संबंधित चिकित्सक ने उनकी पत्नी के पथरी का ऑपरेशन बिना जांच कराए ही कर दिया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी उनकी पत्नी की समस्या खत्म नहीं हुई। दोबारा फिर चिकित्सक से मिले तो वह वहम बताकर वापस कर दिए। पीड़ित पत्नी की तकलीफ न सही होने पर लखनऊ एवं अन्य शहरों में दिखाया। जहां कैंसर की बीमारी बताई गई। बाद में उनकी पत्नी की मौत हो गई। इस मामले की सुनवाई करते हुए 5 अगस्त 2015 को आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष राम दरश एवं तत्कालीन सदस्य महादेव प्रसाद दुबे ने संबंधित चिकित्सक को दोषी ठहराया। प्रतिवादी की ओर से इस आदेश को एकपक्षीय बताते हुए राज्य आयोग में अर्जी दी गई।
जहां से आदेश हुआ कि मामले में दोनों पक्षों को फिर से सुनकर निर्णय दिया जाए। दोबारा सुनवाई में आयोग के अध्यक्ष/न्यायाधीश अमरजीत वर्मा, सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने सोमवार को फोरम के पूर्व आदेश को वैध ठहराया। आदेश पारित किया कि संबंधित चिकित्सक को क्षतिपूर्ति एवं अन्य व्यय पीड़ित पक्ष को तत्काल प्रभाव से अदा करना होगा। यदि भुगतान नहीं हुआ तो ब्याज भी चुकता करना होगा। मामले में दोबारा सुनवाई के लिए जिला आयोग को निर्देशित किया है।