बस्ती। मेडिकल काॅलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। एक दशक पहले यहां सड़क के किनारे नाला निर्माण के लिए ढाई करोड़ की परियोजना को स्वीकृति मिली थी। लगभग अस्सी प्रतिशत निर्माण कार्य भी कराया गया, लेकिन इसके बाद यह विवाद में उलझ गया। तत्कालीन सपा सरकार के जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य को श्रमदान घोषित करा दिया। इससे ठेकेदार भाग खड़े हुए। उधर, ग्रामीणों ने कहीं नाला पाट लिया तो कहीं क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे जलनिकासी की समस्या जस की तस रह गई।
दस वर्ष पूर्व ओपेक चिकित्सालय कैली को मेडिकल कालेज का दर्जा नहीं मिला था। तब कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम की ओर से नाला निर्माण कार्य शुरू कराया गया। प्रस्तावित कार्य ओपेक चिकित्सालय कैली से सोनूपार तक होना था। इससे ओपेक कैली समेत दर्जन गांवों की जलनिकासी की समस्या दूर होती। 800 मीटर तक नाला निर्माण होने के बाद अड़ंगा लग गया। निर्माण कार्य रोक दिया गया। जांच के बाद निर्माण कार्य श्रमदान घोषित कर दिया गया। इससे निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका। प्रस्तावित नाला सोनूपार स्थित बड़े नाले से जुड़ नहीं पाया। अस्पताल गेट से 200 मीटर आगे सोनूपार की तरफ नाला को कुछ जगहों पर पाट दिया गया है। कहीं-कहीं नाले को क्षतिग्रस्त भी कर दिया गया है। कहीं झाड़-झंखाड़ के बीच नाला गुम हो गया है। बारिश के दौरान अर्धनिर्मित नाला ओवरफ्लो हो रहा है। इधर, बारिश से अस्पताल परिसर में पानी लग रहा है। आवासीय कालोनियों के सामने भी बारिश का पानी एकत्र हैं।
बारिश के समय इमरजेंसी और वार्ड में भी नहीं पहुंच सकते
बारिश के समय कुछ ही देर बाद अस्पताल परिसर पानी में डूब जाता है। ऐसे में लोग मुख्य गेट से इमरजेंसी और वार्डों तक नहीं पहुंच पाते हैं। पानी में घुसकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मरीज और उनके तीमारदारों की सांसत हो जाती है। अभी दो दिन पहले तक यहां जलभराव की समस्या जटिल बनी रही। इधर धूप होने के चलते पानी हट गया है लेकिन परिसर में कीचड़ अभी बना हुआ है।
जलनिकासी की समस्या से शासन प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। गेट के बाहर बनाया गया मुख्य नाला यदि साफ हो जाए तो कुछ हद तक समस्या खत्म हो सकती है। प्रशासन के बगैर हस्तक्षेप के यह संभव नहीं है। -डॉ. एएन प्रसाद, सीएमएस, ओपेक चिकित्सालय कैली।