कई स्कूलों में एक कमरे में एक से लेकर पांच तक की होती है पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। निजी स्कूलों से बराबरी का दावा करने वाले परिषदीय स्कूलों की बुनियादी हालात खस्ता है। नगर क्षेत्र में ही कई स्कूल ऐसे हैं, जहां एक कमरे में एक से लेकर पांच तक की कक्षाएं चल रही हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत नगर क्षेत्र में 27 विद्यालय संचालित होते हैं। यहां 2097 बच्चे पंजीकृत हैं। 42 प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक के साथ 17 शिक्षामित्र तैनात हैं। मगर, कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का टोटा है तो कहीं एक शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल चल रहा है। कहीं पर शिक्षक के अवकाश पर चले जाने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की देख रही है।
जीआईसी के पास राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला 1921 से संचालित हो रहा है। मगर, भवन खंडहर बन गया है। यहां 47 बच्चे पंजीकृत हैं। एक शिक्षक को दूसरे स्कूल से अलाट किया गया है। एक ही साथ पांचों कक्षाएं संचालित होती है। यहां न शौचालय है न बिजली की व्यवस्था। उमस भरी गर्मी में बच्चे एक साथ पढ़ने के लिए मजबूर है। प्रभारी प्रधानाध्यापक एसानुन्न रहमान ने बताया कि विवाद के कारण विद्यालय को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है।
प्राथमिक विद्यालय मुरलीजोत किराये के मकान में है। यहां 54 बच्चे पंजीकृत हैं। एक कमरे सभी कक्षाएं चलती हैं। बगल में एमडीएम भी बनता है। प्रधानाध्यापिका शालिनी रानी ने बताया कि स्कूल का निजी भवन न होने के कारण एक कमरे पर बच्चों को बैठाना पड़ता है। शिक्षक भी नहीं हैं। एक शिक्षामित्र हैं, वह अवकाश पर चली गई हैं।
प्राथमिक विद्यालय मंगलबाजार भी किराये के भवन में चलता है। यहां 46 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां पर बच्चों की पढ़ाई शिक्षामित्र माधुरी शर्मा के भरोसे चल रहा है। न यहां शौचालय है न बिजली न पीने के लिए पानी की व्यवस्था है। शिक्षामित्र छुट्टी लेकर धरने में शामिल होने चली गई थीं। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के जिम्मे बच्चों की देखभाल थी।
प्राथमिक विद्यालय महरीखवां भी एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है। एक कमरे में छह बच्चे बैठे मिले। बाहर गंदगी की भरमार है। स्कूल में चहारदीवारी भी नहीं है। प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइंस का भवन तो है, लेकिन मात्र 28 बच्चे पंजीकृत हैं। यह भी स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है। यहां पर कोई शिक्षामित्र भी नहीं है। स्कूल का कायाकल्प कराया गया है। प्रधानाध्यापिका संध्या वर्मा ने बताया कि शिक्षक न होने के कारण नए बच्चे नामाकंन भी नहीं कराते हैं। कभी सफाई कर्मी नहीं आता है। बाहर से मजदूर बुलाकर सफाई करानी पड़ती है।
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कोट
किराये पर चल रहे स्कूलों की सूची शासन को भेजी जा चुकी है। टीम गठित कर स्कूलों की जांच कराई जाएगी, जो कमी होगी उसे दुरुस्त कराया जाएगा।
अनूप कुमार, बीएसए