अभिभावकों ने की चूक, शैंपू लाने के लिए बिटिया को भेज दिया दुकान, उसने मुंह में रख लिया सिक्का
जिला अस्पताल में कड़ी मशक्कत के बाद गले से निकाला गया सिक्का
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। रविवार को अभिभावकों की हल्की सी चूक एक मासूम बिटिया के जान पर बन आई। शुक्र मानिए, जिला अस्पताल के डॉक्टर की। पूरी सजगता से मासूम के गले में फंसे सिक्के को कुछ देरी की मशक्कत के बाद बाहर निकाल दिया। तब जाकर उसकी जान बची।
नगर थाना क्षेत्र के दीनानाथ की आठ साल की बेटी प्रियांशी को घरवालों ने सुबह दो रुपये का सिक्का देकर शैंपू लाने के लिए दुकान भेज दिया। अनजाने में उसने सिक्का मुंह में रख लिया। वह उसके गले में जाकर अटक गया। इससे परेशान प्रियांशी रोते हुए घर पहुंची। परिजन उसे आनन-फानन एक निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे। मगर, वहां कोई राहत नहीं मिल पाई। उस रेफर कर दिया गया। इसके बाद प्रियांशी को जिला अस्पताल लाया गया।
ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी मेडिकल अफसर (ईएमओ) की ड्यूटी पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने निजी अस्पताल में पहले से कराए गए एक्स-रे को देखते ही मामला समझ लिया। डॉ. अजय के अनुसार, उन्होंने पतली फोलिस नली बच्ची के मुंह के जरिये गले में डाला। नली को सिक्के के नीचे ले जाकर उसमें हवा भरकर फुलाया। इस उपाय के बाद सिक्का नली के ऊपर आ गया और उसे सफलता पूर्वक बाहर निकाल लिया गया। तब जाकर उसकी जान बची।
फार्मासिस्ट सीपी पांडेय, वार्ड ब्वाॅय शोभित चौधरी, चंद्रिका, कपींद्र सिंह आदि ने सहयोग किया। डॉ. अजय ने बताया कि ऐसी स्थिति में मरीज को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है। समय से बच्ची आ गई तो इलाज संभव हो पाया, अन्यथा जान भी जा सकती थी। गले में सिक्का फंसने में सांस लेने में दिक्कत होने लगती थी। उसे निगलने में कठिनाई होती है। सिक्का निकलने के बाद परिजनों के चेहरों पर खुशी आई।