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Basti News: सीएमओ ने मेडिकल जांच से किया मना, अभ्यर्थी फिर पहुंचे कलक्ट्रेट

Tue, 19 Dec 2023 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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अनफिट कर दिए गए थे वन रक्षक भर्ती में चयनित अधिकतर अभ्यर्थी
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डीएम ने सीएमओ को फिर से मेडिकल कराने के दिए थे निर्देश, हुआ नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। वन रक्षक एवं वन्य जीव भर्ती परीक्षा 2019 के अभ्यर्थियों का डीएम के आदेश के बावजूद दोबारा मेडिकल नहीं हुआ। तीन दिनों तक दौड़भाग करने के बाद सीएमओ ने जब मेडिकल कराने से इन्कार कर दिया तो मायूस अभ्यर्थी फिर सोमवार को डीएम कार्यालय पहुंचे। मगर, डीएम से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। बाद में उनके प्रशासनिक अफसर को ज्ञापन देकर अभ्यर्थियों को लौटना पड़ा।
वन विभाग की भर्ती परीक्षा में 101 वन रक्षकों का बस्ती जिले के लिए चयन हुआ था। इन अभ्यर्थियों का 11, 12 एवं 14 दिसंबर को टीबी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराने की तिथि निर्धारित की गई थी। पहले दिन 11 दिसंबर को 33 में से 17 और 12 दिसंबर को 33 में से 27 अभ्यर्थियों को अनफिट कर दिया गया। दूसरे दिन के मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई। डीएफओ के हस्तक्षेप के बाद मेडिकल टीम ने इस दिन तत्काल 18 अभ्यर्थियों को फिट करार दिया। वहीं 14 दिसंबर को 35 में से तीन अभ्यर्थियों को अनफिट करार दिया गया। इस तरह कुल 34 अभ्यर्थी अनफिट घोषित कर दिए गए।
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इसके बाद एक अभ्यर्थी नेहा ने संतकबीरनगर जिले में अपना मेडिकल परीक्षण कराया तो शारीरिक एवं मानसिक रूप से फिट बताया गया। इसके बाद यह अभ्यर्थी 15 दिसंबर को डीएम कार्यालय पहुंची। प्रकरण से अवगत होने के बाद डीएम ने सीएमओ को दोबारा मेडिकल कराने के निर्देश दिए। अभ्यर्थी सीएमओ कार्यालय पहुंचे। यहां तीन दिन तक दौड़भाग करने के बाद सीएमओ ने सोमवार को दोबारा मेडिकल कराने से इन्कार कर दिया। इससे मायूस अभ्यर्थी फिर डीएम कार्यालय पहुंचे। यहां ज्ञापन सौंपा गया। मगर, कोई स्थायी निदान नहीं निकल पाया है।
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अभ्यर्थी बोले- मेडिकल परीक्षण में हुआ धोखा
कलक्ट्रेट पहुंचे अभ्यर्थी नेहा, रानी पटेल, शशि चौधरी, संदीप कुमार, विजय प्रकाश यादव, आदर्श पाठक, जितेंद्र कुमार, रत्नेश, आकाश, पवन त्रिपाठी, राकेश आदि ने कहा कि उनके साथ मेडिकल परीक्षण के नाम पर धोखा किया गया है। मनमाने ढंग से मेडिकल टीम ने उन्हें अनफिट किया है। इस पर मेडिकल बोर्ड में शामिल लोगों पर कार्रवाई के बजाय उलटा उन लोगों को ही संघर्ष करना पड़ रहा है। यह नहीं मालूम था कि अंतिम समय में उनका अवसर उनसे छीन लिया जाएगा। अब डीएम पर ही भरोसा है कि उन्हें न्याय दिलाया जाएगा।
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कोट
प्रकरण संज्ञान में हैं। चूंकि मामला नौकरी का है। चयनित अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण आयोग के निर्देश पर ही होता है। हमें दोबारा मेडिकल परीक्षण कराने के लिए किसी भी स्तर से लिखित आदेश नहीं मिला है। इसीलिए हम असमर्थ हैं।
-डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ
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