बस्ती। शहरी क्षेत्र के नियोजित विकास का समुचित खाका अभी तक तैयार नहीं हो सका है। तीन साल की लंबी जद्दोजहद के बाद जिस महायोजना-2031 की फाइल पर जनपद स्तर से मुहर लगाई गई, शासन ने उसे एक झटके में अस्वीकार कर दिया। तीन अहम बिंदुओं पर टिप्पणी के साथ यह फाइल लौट आई है। अगले दस वर्ष के लिए शहरी विकास की योजना मूर्तरूप नहीं ले पा रही है। अब महायोजना को लेकर बीडीए फिर से मंथन शुरू कर दिया है।
बस्ती विकास प्राधिकरण वर्ष 2018 में यहां प्रभावी किया गया। इसके बाद दो साल कोरोना की वजह से कामकाज लगभग ठप रहा। वर्ष 2021 में महायोजना 2031 लागू कराने की कवायद शुरू हुई। मास्टर प्लान तैयार होने के बाद आपत्तियों का ढेर लग गया। लगभग ढाई हजार नागरिकों ने आपत्ति जताई। इसके निस्तारण में लंबा वक्त लगा। इधर वर्ष 2023 में मई में मास्टर प्लान-2031 प्राधिकरण ने अंतिम रूप दिया।
महायोजना की यह फाइल स्वीकृति के लिए शासन में भेज दी गई। दो माह बाद यह फाइल टिप्पणी के साथ वापस आ गई है।
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तीन अहम बिंदु, जिन पर नहीं हुआ कार्य
बिंदु-1
महायोजना में नहीं दी गई भूमि प्रकार की जानकारी
मास्टर प्लान-2031 में भूमि प्रकार की जानकारी नहीं दर्शाई गई है। शासन ने इस पर टिप्पणी की है। बीडीए में शहर से सटे कुल 217 गांव शामिल हैं। शासन से कहा गया है कि शहरी विस्तार से संबंधित गांवों में सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि का स्पष्ट उल्लेख हो। मास्टर प्लान में तालाब, कब्रिस्तान, चारागाह, बंजर एवं अन्य किस्म की सरकारी भूमि इंगित होनी चाहिए।
बिंदु- 2
मास्टर प्लान से गायब हैं तीन गांव
मास्टर प्लान-2031 से तीन गांव छूट गए। देवापार, सोनूपार और बेलवादर को प्राधिकरण ने नहीं शामिल किया। शासन की टिप्पणी में यह तीन गांव भी शामिल हैं। कहा गया कि इन गांवों में महायोजना में शामिल करने के साथ वहां की भौगोलिक स्थिति का विवरण भी दिया जाए। धरातलीय स्थिति के उल्लेख से ही विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
बिंदु- 3
नदी के तटवर्ती गांवों का उल्लेख नहीं
मास्टर प्लान-2031 में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का भी उल्लेख नहीं है। शासन ने इस पर भी आपत्ति जताई है। बीडीए को स्पष्ट करना होगा कि नदी के तटवर्ती गांव कौन से है, जहां बाढ़ की संभावना रहती है। इन्हें महायोजना में अलग केटेगरी में रखना है। इसके अलावा बड़े जलाशय, पोखरे भी मास्टर प्लान में अलग से चिह्नित किए जाएंगे। राजस्व अभिलेखों से इसका उल्लेख होना जरूरी है।
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सिर्फ भ्रमण तक ही सिमटा बीडीए
पांच साल बाद भी बीडीए रफ्तार नहीं पकड़ सका है। सिर्फ निरीक्षण और मानचित्र निर्गत करने तक ही सिमटा हुआ है। वर्ष 2022-23 से सड़क, नाली जैसे कुछ निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं हैं। महायोजना लागू न होने से बीडीए खुद असमंजस की स्थिति में है। शहरी क्षेत्र में प्राधिकरण की ओर से अभी कहीं भी डैम, पार्क, ग्रीन बेल्ट, सुसज्जित कालोनी बसाने जैसी कवायद नहीं शुरू हो सकी है। उम्मीद थी कि महायोजना-2031 लागू होने के बाद स्थिति में सुधार आएगा। शासन से फाइल लौटने पर अब एक बार फिर से खामियों को दूर करने में पूरा अमला जुटा हुआ है।
मास्टर प्लान-2031 में जिन बिंदुओं पर शासन ने टिप्पणी की है, उसको दुरुस्त कराने के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है। बहुत जल्द ही शासन के निर्देशों के अनुरूप महायोजना 2031 को दुरुस्त कर फिर से भेज दिया जाएगा।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए।
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शासन से मिले दिशा निर्देश के बाद महायोजना 2031 में जो भी खामियां है उसे हरहाल में दूर कराया जाएगा। यह कोई लापरवाही नहीं बल्कि एक प्रक्रिया है। मास्टर प्लान प्रत्येक स्टेप पर चेक होता है। इससे त्रुटियां दूर होती है।
-कमलेश चंद्र, एडीएम/ सचिव, बीडीए।