बस्ती। कथक गुरु पंडित अर्जुन मिश्रा को उनकी आठवीं जयंती पर नृत्य कार्यक्रमों के साथ याद किया गया। कोतवाली के निकट नृत्य धाम में नृत्य गुरु मास्टर शिव के संयोजन में बाल कलाकारों ने अनेक प्रस्तुतियां देकर मन मोह लिया।
मास्टर शिव ने बताया कि बिरजू महाराज के अनन्य शिष्य पं. अर्जुन मिश्रा ने लखनऊ को अपनी कर्मस्थली बनाया और कथक में बैले शुरू किया। उन्होंने सोच को कथक के माध्यम से मंच पर साकार किया। पं. मिश्र ने देश भक्ति पर आधारित बैले भी बनाए। अद्भुत नृत्य नाटिकाएं बनाईं। कथक को प्रकृति से भी जोड़ा, नृत्य के जरिए उसका चित्रण किया। तानसेन के तरानों के साथ ही कवियों की संरचनाओं पर नृत्य किया। सूफी कथक की शुरुआत का श्रेय भी आपको ही जाता है। वर्ष 2015 में उनका निधन हो गया। कथक के क्षेत्र में नव प्रयोग के लिए वह सदैव याद किये जाएंगे।
इससे पहले मुख्य अतिथि डाॅ. विनायक जायसवाल ने पं. अर्जुन मिश्रा के चित्र पर माल्यार्पण किया। कहा कि जीवन में नृत्य का महत्वपूर्ण योगदान है। यह भारतीय संस्कृति में रचा बसा तो है ही, इसके आध्यात्मिक आयाम भी हैं।
कार्यक्रम में तृषा, अहम, सोमाया, काव्या, गौरी, बीरा, आशी, प्रबल, अनन्या, मिष्ठी, काव्या और माही ने शिव तांडव की प्रस्तुति दिया। गुरु वंदना आंशी और कृष्ण वंदना शालिनी ने किया। दिमिक, डिमिक, धुन मृदंग बाजे’ को आदित्य ने प्रस्तुत किया। इस मौके पर महेन्द्र, प्रियंका, प्रीती, नीलू, अन्नू, माधुरी, प्रिया आदि मौजूद रहे।