बस्ती। यदि आप काश्तकार हैं तो सजग हो जाइए। अपनी खतौनी तुरंत जांच लीजिए। कहीं आपका रकबा घट या बढ़ तो नहीं गया है। राजस्व विभाग की ओर से तैयार फसली वर्ष 1431 की नई रीयल टाइम खतौनी में इस तरह की गड़बड़ी की भरमार है। इसमें प्रत्येक गाटे में खातेदारों के अंश निर्धारण में बड़ा गड़बड़झाला देखने को मिल रहा है। गाटे के कुल रकबे में किसी का अंश बढ़ा दिया गया है तो किसी का अंश घट गया है। लोग नई खतौनी निकाल रहे हैं तो यह हेरफेर देख भौचका रह जा रहे हैं।
काश्तकारों के लिए रीयल टाइम खतौनी ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। शासन की मंशा खतौनी में पारदर्शिता लाने की थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया है। खतौनी रूपांतरण में इस बार प्रत्येक गाटे की पृथक खतौनी तैयार होनी थी। इसमें संबंधित खातेदारों का स्पष्ट अंश निर्धारण भी दर्शाया जाना था। मगर प्रक्रिया राजस्व कार्यालयों में कंप्यूटर ऑपरेटरों के भरोसे निपटा दी गई। अंश निर्धारण में हल्का लेखपाल की भूमिका नगण्य रखी गई। पूर्व के अभिलेख के आधार पर कार्यालयों में बैठे- बैठे डाटा फीड करा दिया गया। इसके बाद रीयल टाइम खतौनी की प्रक्रिया पूर्ण दर्शाकर वाहवाही लूटी गई। शासन ने इस आधार पर परिषद की वेबसाइट पर तहसीलवार रीयल टाइम खतौनी अपलोड करा दी है। अब नई खतौनी को काश्तकार निकाल रहे हैं तो उसमें अपने अंश में गड़बड़ी देख परेशान हो रहे हैं।
जमीन संबंधी विवाद कम करने के उद्देश्य से अपनाई गई प्रक्रिया
शासन स्तर से रीयल टाइम खतौनी की प्रक्रिया जमीन संबंधी विवाद कम करने के उद्देश्य से अपनाई गई थी। पहले एक ही खाता संख्या की खतौनी में कई गाटा नंबर होते थे और काश्तकार भी अधिक होते थे। जिससे खतौनी से काश्तकार का अंश पता नहीं चल पाता था। इसीलिए तय हुआ कि अब प्रत्येक गाटे की अलग खतौनी होगी और उससे संबंधित खातेदार का उसमें अंश निर्धारण अंकित होगा।
धरातल पर नहीं हुए कार्य
रीयल टाइम खतौनी तैयार करने के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया। शासन का दबाव बढ़ा तो धरातल पर कार्य किए बगैर ही इसे तैयार कर दिया गया। होना यह था कि हल्का लेखपाल से अद्यतन स्थिति के अनुसार गाटा संख्यावार खातेदारों का अंश निर्धारण कर रिपोर्ट मंगवानी थी। इसी के आधार पर डाटा फीडिंग कराई जानी थी। इसमें अंश निर्धारण में गड़बड़ी की संभावना कम रहती। मगर फसली वर्ष 1425 के पूर्व हुए अंश निर्धारण की रिपोर्ट को आधार मानकर कहीं डाटा फीडिंग की गई है तो कहीं पुरानी खतौनी से अंश निर्धारण कर दिया है।
प्रत्येक पांच वर्ष पर तैयार होती है नई खतौनी
फसली वर्ष के प्रत्येक पांचवें साल खतौनी को नया स्वरूप दिया जाता है। इसके तहत फसली वर्ष 1431 की खतौनी को रीयल टाइम खतौनी में रूपांतरित किया गया है। इसमें खाता संख्या के बजाए प्रत्येक गाटे की खतौनी तैयार की गई। पहले एक खाता संख्या की खतौनी में कई गाटों का विवरण होता था। अब एक खतौनी में एक गाटे का ही विवरण दर्ज किया गया है। इससे सत्यापित खतौनी निकालने पर राजस्व की बढ़ोत्तरी होगी। दूसरे काश्तकार को भी अपने अंश की जानकारी खतौनी से ही हो सकेगी।
रकबा सही कराने के लिए न्यायिक प्रक्रिया में उलझना मजबूरी
एक तरफ शासन राजस्व मुकदमों में कमी लाने पर जोर दे रहा है तो दूसरी ओर राजस्व विभाग ने इसमें वृदि्ध की नई राह तैयार कर दी है। रीयल टाइम खतौनी में जिन काश्तकारों का अंश निर्धारण गलत हो गया है उन्हें अपना रकबा दुरुस्त कराने के लिए धारा 38 के तहत न्यायिक प्रक्रिया में उलझना पड़ेगा। राजस्व न्यायालयों में इसका फैसला कब होगा कोई नहीं जानता। रीयल टाइम खतौनी में दुरुस्तीकरण के लिए तहसीलों में कोई विशेष शिविर का आयोजन भी नहीं हो रहा है, जिससे काश्तकार परेशान हैं।
खतौनी में गड़बड़ी का बैनामे पर असर
बैनामे के लिए नई खतौनी अनिवार्य हो गई है। शादी-ब्याह का मुहूर्त चल रहा है। इस सीजन में बैनामा कराने वालों की संख्या बढ़ जाती है। रीयल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण गलत होने से बैनामों की संख्या में गिरावट आई है। जहां प्रतिदिन एक तहसील में 30 से 40 बैनामे होते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 10 से 15 हो गई है। जमीन की खरीद फरोख्त के उद्देश्य से मुआयने के समय काश्तकारों को खतौनी में अंश निर्धारण में गड़बड़ी का पता चल रहा है। फिर बैनामा छोड़कर वह खतौनी दुरुस्त कराने में जुट रहे हैं।
केस- एक
सदर तहसील के बनकटी क्षेत्र के परमेश्वर ने बताया कि नई खतौनी में उनका रकबा एक बीघा पक्के की जगह 15 बिस्वा हो गया है। इसका पता तब चला जब नई खतौनी निकाली। लेखपाल से मिले तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। कहा कि धारा 38 के तहत वाद दाखिल करिए तब संशोधन होगा।
केस- दो
सदर तहसील क्षेत्र के साॅऊघाट क्षेत्र के मोहम्मद रूकनुद्दीन ने बताया कि पहले एक ही खाता संख्या में उनके सभी गाटों का विवरण था। अब अलग-अलग गाटे की पृथक खतौनी निकालनी पड़ रही है। उनके एक गाटे की खतौनी में चार भाइयों के बीच अंश निर्धारण गलत हो गया है। एक पट्टीदार का रकबा बढ़ा दिया गया है।
केस- तीन
तहसील में दौड़भाग कर रहे कलवारी क्षेत्र के दिवाकर प्रसाद ने बताया कि रीयल टाइम खतौनी में उनका अंश निर्धारण गलत हो गया है। उसे दुरुस्त कराने के लिए वह एक हफ्ते से तहसील का चक्कर कांट रहे हैं। अधिवक्ता के जरिये प्रार्थना पत्र तैयार कराया है। बेवजह हजारों रुपये खर्च हो गए। फिर भी खतौनी में संशोधन नहीं हो सका है।
केस- चार
नगर बाजार क्षेत्र की बेवा सिरसती देवी भी नई खतौनी को लेकर परेशान दिखीं। उन्होंने बताया कि उन्हें उगांव के एक व्यक्ति ने खतौनी में हिस्सा कम होने की जानकारी दी। उनके कुनबे के एक व्यक्ति का हिस्सा बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा उन्हें पता नहीं खतौनी कैसे दुरुस्त होती है।
रीयल टाइम खतौनी तैयार हो गई है। थोड़ी बहुत त्रुटियां सामने आ रही हैं। शासन से नई गाइड लाइन का इंतजार है। समस्या संज्ञान में आने पर जांच कराई जा रही है। संशोधन का कुछ तरीका अपनाया जाएगा।
गुलाब चंद्र, एसडीएम सदर।
खतौनी का रूपांतरण जल्दी किया गया है। स्वाभाविक रूप से त्रुटियां हो सकती हैं। इसमें जांच कराकर काश्तकारों का अंश निर्धारण तत्काल दुरुस्त कराने की व्यवस्था बननी चाहिए। धारा 38 कानूनी प्रक्रिया है। काश्तकारों को इसमें उलझाना ठीक नहीं है। इसके लिए अलग से शिविर की व्यवस्था की जाए।
धर्मेंद्र नारायण त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता।