छठ महापर्व : उगते सूर्य का अर्घ्य देने उमड़ीं महिलाएं
बस्ती। सुख-समृद्धि, वैभव व कामयाबी के कारक सूर्यदेव अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर अपनी दुलारी बहन छठ मइया के व्रतियों को आशीष देने उदय हुए तो व्रतियों ने भारी उत्साह के साथ स्वागत किया और उन्हें विधिवत मंत्रोच्चार सहित अर्घ्य प्रदान किया गया। घुटने तक पानी में खड़ी होकर पहले से प्रतीक्षा कर रहीं व्रती महिलाएं भगवान भास्कर की पहली किरण पानी पर पड़ते ही अर्घ्य-पूजन में तल्लीन हो गईं।
व्रतियों ने कपूर, घी की फूलबत्ती से उगते सूर्यदेव की आरती उतारी तो अद्भुत छटा नजर आई। इस बीच महिलाओं ने ‘निंदिया से मातल सुरुज देव, अंखिया न खोलें हों...उगूं न सुरुज देव भइले अरग क बेर...जैसे छठ गीत गाती रहीं। सूर्योदय होते ही हर ओर भक्तिमय वातावरण का सृजन हो गया। फूल मालाओं व ऋतु फलों से घाट सुसज्जित नजर आए। छठ वेदिकाएं दीप दान से प्रज्ज्वलित हो रही थीं।
शहर के कुआनों नदी के अमहट घाट और पुरानी बस्ती के निर्मली कुंड पर भोर में ही मंगल गीत गातीं व्रती महिलाओं का समूह आना शुरू हो गया। परंपरागत ढंग से सूर्य की उपासना के बाद छठ का व्रत तोड़ा। इस दौरान नदी के तटों और घाटों काफी भीड़ रही। सूर्योदय से पहले ही घाटों पर आस्थावान लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही। घाटों पर भगवान सूर्य की उपासना में जुटा महिलाओं के समूह का अद्भुत दृश्य था। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध रहा। महिलाओं ने गन्ने के मंडप में गीत गाते हुए छठ मइया की विधिवत पूजा की। इसके बाद महिलाएं पानी में खड़ी होकर भक्तिभाव से सूर्य की लालिमा फूटने का इंतजार करने लगीं। जैसे ही सूर्य की किरणें फूटीं व्रती महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद व्रती वापस वेदिका के सामने पहुंचीं।
वेदी के सम्मुख कंद, मूल और फल के साथ ही पूजन के लिए तैयार पकवान रखकर महिलाओं ने आरती उतारी। प्रणाम कर मनोवांछित फल मांगा। फिर पति के हाथों प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच घाट पर पहुंचे सभी लोग अपने परिजनों के साथ अलग-अलग इस परंपरा को निभाने में लगे रहे। हर मंडप में दिव्य आभा से अलौकिक दृश्य देखते ही बन रहा था।
व्रती महिलाओं ने उदीयमान सूर्य को दिया अर्घ्य
बस्ती। ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार को उदीयमान सूर्य को महिलाओं ने अर्घ्य दिया। घाटों पर सफाई और प्रकाश की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई थी। वहीं जिले के कुआनों व मनवर संगम तट पर आस्थावान लोगों का सैलाब उमड़ा रहा।
लालगंज प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के कुआनों व मनवर संगम तट के अलावा बारीघाट, तेनुवां, बरतनिया, भक्तुपुर, कोप, जनजन कला, डूडी, अमाइपार, चौबाह, नेवारी, सुरापार, कुरमौर्ल दौलतपुर, सोहिला, देवसिंहा, लोइया आदि जगहों पर महिलाओं ने सूर्य का अर्घ्य दिया।
बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के मथौली, भरवलिया, बनकटी, खरका, रौता, बानपुर देईसाड़ आदि जगहों पर सूर्य को अर्घ्य दिया गया। रुधौली प्रतिनिधि के अनुसार नगर पंचायत के बुद्धि बाजार एवं सरघाट देवी मंदिर स्थित पोखरा, हनुमानगंज, गनवरिया कला आदि जगहों पर महिलाओं ने उदीयमान सूर्य का अर्घ्य दिया। छावनी प्रतिनिधि के अनुसार रामरेखा नदी घाट, छावनी, खेसुआ, अमोढ़ा, रामरेखा, जददुपुर, बभनगांवा गांव आदि जगहों पर सूर्य को अर्घ्य दिया गया। कलवारी प्रतिनिधि के अनुसार लुंबिनी दुद्धी मार्ग पर स्थित कौलेश्वर नाथ मंदिर परिसर में स्थित पोखरे पर महिलाओं ने अर्घ्य दिया।
घाट पर भंडारे का किया आयोजन
हर्रैया। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए मनोरमा घाट पर सोमवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। घाट पर व्रती महिलाओं को भाजपा नेता नंदलाल गुप्ता की अगुवाई में प्रसाद वितरण किया गया है। वहीं, क्षेत्र के परसागना स्थित पोखरे पर समाजसेवी राम कृष्ण पांडेय की अगुवाई में भंडारे का आयोजन किया गया।
व्रतियों ने अर्घ्य देकर मांगा आशीर्वाद
भानपुर। क्षेत्र के उकडा, पोखरा, निकुरहा, बैदौला, करमहिया, रामनगर में नीलामदार पोखरा, घोषड के शिव मंदिर पोखरे पर बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने उदीयमान भगवान भास्कर की पूजा अर्चना कर परिवार के कुशल मंगल की कामना की। महिलाओं ने पानी में खडे़ होकर भगवान को अर्घ्य दिया।
पोखरे में कूदकर बचाई बालिका की जान
रुधौली नगर पंचायत के बुद्धि बाजार स्थित पोखरे पर छठ पूजा चल रही थी। भारी संख्या में व्रती महिलाओं के अलावा उनके परिवार के लोग जुटे हुए थे। इसी बीच एक करीब 14-15 वर्ष की किशोरी अचानक बेहोश होकर पानी में गिरकर डूबने लगी। यह देख मौजूद लोग सन्न रह गए। घटना देख वहां मौजूद एसएचओ रुधौली राम कृष्ण मिश्र ने बिना देर किए पोखरे में छलांग लगा दी। डूब रही किशोरी को कंधे पर लादकर पानी से बाहर निकाले। एसएचओ की तत्परता की लोग सराहना करते नहीं थक रहे।