- पूर्व मंत्री अमरमणि से अलग चल रही पांच आरोपियों के केस की फाइल
- पुलिस की चार्जशीट में दाखिल सभी धाराओं के तहत चलेगा मुकदमा
- हाईकोर्ट का हवाला देकर ली गई मोहलत का नहीं उठा पाए फायदा, अब होगी गवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर के व्यवसायी धर्मराज मद्धेशिया के पुत्र राहुल मद्धेशिया के अपहरण के 22 वर्ष पुराने मामले में बृहस्पतिवार को न्यायालय ने आरोप तय कर दिया। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी से जुड़े इस कांड में शामिल पांच आरोपियों राम विलास, अजय मिश्रा, आनंद सिंह, जग प्रसाद तथा हनुमान शुक्ला पर पुलिस की चार्जशीट में दाखिल सभी धाराओं में केस चलेगा।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/ विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि की अदालत में केस की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की तरफ से हाईकोर्ट का कोई निर्देश प्रस्तुत न कर पाने पर आरोप तय किया गया। इससे पहले आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि पुलिस ने जो चार्जशीट न्यायालय में दाखिल किया है, उसमें उन पर अपहरण का आरोप साबित नहीं होता है। उनके कब्जे से न तो अपहृत की बरामदगी हुई और न ही उनके किसी संसाधन का इस्तेमाल हुआ है। आरोपियों की इस दलील को नकारते हुए एमपी-एमएसए विशेष न्यायालय ने डिस्चार्ज आवेदन खारिज करते हुए आरोप तय करने के लिए तीन नवंबर की तारीख तय की थी।
तीन नवंबर को केस की सुनवाई के दौरान इस संबंध में आरोपियों की तरफ से उच्च न्यायालय में रिट दाखिल करने की सूचना देते हुए याचिका के निस्तारण होने तक मोहलत की अर्जी दी गई। न्यायालय ने पांच दिन की मोहलत देते हुए अगली सुनवाई के लिए आठ नवंबर तारीख तय की थी। आठ नवंबर को फिर से प्राइवेट कौंसिल की तरफ से प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया कि इस प्रकरण में डिस्चार्ज प्रार्थनापत्र खारिज करने के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील लंबित है। वहां से कोई आदेश पारित होने तक सुनवाई के लिए मोहलत दी जाए। इसे मंजूर करते हुए न्यायालय ने 16 नवंबर तक की मोहलत मंजूर कर ली थी।
इन धाराओं में दाखिल हुई चार्जशीट
न्यायालय ने आईपीसी की धारा 364, 364ए, 216 ए, 212 और 120 बी के तहत आरोप तय किया है। चार भागों में दिए गए आदेश में नाबालिग का अपहरण, दूसरे के घर में बंधक बनाने, फिरौती के लिए अपहरण और जानबूझकर अपहरणकर्ताओं को पनाह देने के आरोप तय किए गए हैं।
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यह है मामला
छह दिसंबर 2001 को शहर के व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल के अपहरण मामले में सात आरोपियों पर केस दर्ज किया गया था। इसमें हनुमान शुक्ला उर्फ काका, अजय मिश्रा, आनंद सिंह, राम विलास, जग प्रताप वर्मा, नैनीष शर्मा, शिवम आरोपी बनाए गए। तफ्तीश के दौरान अमरमणि त्रिपाठी का नाम भी केस में जोड़ा गया। पुलिस ने संदीप, हनुमान, अजय, आनंद, राम विलास, जग प्रताप को गिरफ्तार कर लिया। इन आरोपियों को कोर्ट में पेश कर आरोप तय कर दिए। सभी का ट्रायल शुरू हो गया, लेकिन नैनीश, शिवम और अमरमणि एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुए। न ही तीनों की गिरफ्तारी हो सकी। बाद में मुख्य आरोपी संदीप की मौत हो गई। इसके बाद न्यायालय में हाजिर हो चुके राम विलास, अजय मिश्रा, आनंद सिंह, जग प्रसाद व हनुमान शुक्ला ने इस केस में अपनी फाइल अलग करवा ली। इस तरह से दो फाइल तैयार हुई। एक फाइल में राम विलास, अजय मिश्रा, आनंद सिंह और जग प्रसाद तथा हनुमान शुक्ला हैं और दूसरी फाइल में अमरमणि, नैनीष और शिवम का नाम है। इस वजह से पांच आरोपियों की फाइल में ट्रायल चल रहा है।
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कुर्की की चल रही कार्रवाई
राहुल अपहरण कांड में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के खिलाफ न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी है। इसके बाद कुर्की की नोटिस जारी किया गया। इस नोटिस को पिछले दिन गोरखपुर स्थित अमरमणि त्रिपाठी के घर पर कोतवाली पुलिस ने चस्पा किया था। समाचार पत्रों में भी कुर्की नोटिस की सूचना प्रकाशित करवाई जा चुकी है। दो अन्य आरोपी नैनीष और शिवम मिश्रा को फरार घोषित करने की कार्रवाई भी चल रही है।