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चंद्रावती प्रकरण : पहले कर दिए आदेश, अब नकल देने से इन्कार कर रहे जिम्मेदार

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- दूसरी जगहों के नागरिकों की ली गई थी स्टांप पर गवाही, तब हुआ नायब तहसीलदार सदर का आदेश
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- एक सप्ताह से नकल प्राप्त करने के लिए तहसील में दौड़ रही पीड़िता, बाबू ने कर दिया इन्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सदर तहसील के सुपेलवा गांव की रहने वाली चंद्रावती देवी के वरासत संबंधी मामले में नायब तहसीलदार सदर का आदेश चुनौतियों से घिर गया है। पति की संपत्ति पर पीड़िता के बजाय उसके जेठ का नाम दर्ज किए जाने का आदेश जिम्मेदारों को अब न उगलते बन रहा है, और न निगलते। यही वजह है कि पीड़िता को एक सप्ताह से पत्रावली की सत्यापित नकल नहीं मुहैया कराई जा रही है। आदेश होने के 21 दिन बीतने को हैं, पत्रावली अभी नायब तहसीलदार के कार्यालय में ही पड़ी है, जबकि इसे रिकार्ड रूम में जमा किया जाना चाहिए।
चंद्रावती के अनुसार उनकी शादी वर्ष 1980 में राजेंद्र कुमार से हुई थी। वह 20 साल से सुपेलवा में पति के साथ मकान बनाकर रह रही थीं। वर्ष 2018 में पति की आवास पर ही मृत्यु हो गई। इसके बाद उसने पति की संपत्ति अपने नाम दर्ज कराने के लिए सदर तहसील में वाद दाखिल किया। वहीं उनके जेठ ने भी राजेंद्र की संपत्ति पर दावा किया। इस मामले की सुनवाई करते हुए नायब तहसीलदार सदर ने 16 जनवरी को चंद्रावती की जगह उनके जेठ के नाम पति की संपत्ति दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया।
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इस मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद पत्रावली यहां से आगे नहीं बढ़ाई जा रही है, जबकि एसडीएम सदर ने लिखित रूप से पत्रावली तलब की है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी यह पत्रावली एसडीएम सदर को प्रेषित नहीं हो सकी। इसके अलावा रिकार्ड रूम में भी दाखिल नहीं कराई गई। चंद्रावती के अनुसार पत्रावली में तमाम त्रुटियों के रहते मनमाने ढंग से आदेश किया गया है। इसमें संशोधन की राह निकालने की फिराक में पत्रावली आगे नहीं बढ़ाई जा रही है। वहीं नायब तहसीलदार सदर ने कहा कि अभी कायमी दाखिल कर मामले की फिर से सुनवाई कराई जा सकती है।

सप्ताह भर से नहीं दी जा रही नकल
चंद्रावती ने कहा कि उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से पत्रावली का अवलोकन किया। इसमें मेरे ग्राम पंचायत से इतर अन्य जगहों के लोगों की गवाही स्टांप पर कराई गई है। कुछ गवाहों की पैदाइश भी मेरी शादी के बाद की देखने को मिली है। उनका हमारे निवास स्थान से कोई वास्ता भी नहीं है, जबकि मेरी तरफ से संबंधित ग्राम पंचायत के निवासियों का बयान दर्ज कराया गया है। बावजूद इसके सही तथ्यों को नजरंदाज करके आदेश पारित हुआ है। अब नकल न देकर खामियां छिपाने की तरकीब ढूंढी जा रही है। नकल बाबू आए दिन अधिकारियों से समझने के बाद नकल जारी करने की बात कर रहे हैं।

तहसील में पूरी तरह से मनमानी चल रही है। किसी भी मुकदमे में आदेश पारित होने के बाद सत्यापित नकल प्राप्त करना अधिवक्ता और वादकारी का अधिकार है। मगर इस मामले में नकल ने देने की वजह जिम्मेदारों की कोई साजिश हो सकती है।
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-बाल कृष्ण चौधरी, अधिवक्ता।
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चंद्रावती देवी का प्रकरण संज्ञान में आया है। इस मामले में सुनवाई चल रही है। जहां तक सत्यापित नकल प्राप्त करने की बात है तो इसके लिए संबंधित नकल बाबू को निर्देश दिए जा चुके हैं।
-विनय प्रभाकर, तहसीलदार सदर।
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