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Basti News: सुविधा शुल्क देंगे तो ही बनेगा जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र

Mon, 01 May 2023 01:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र सभी को जरूरत पड़ती है। वर्तमान व्यवस्था में प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद राजस्वकर्मियों की रिपोर्ट लगती है, लेकिन यह रिपोर्ट लगवाने में आवेदकों के पसीने छूट जाते हैं। चढ़ावा नहीं दिया तो सात दिन के अंदर बनने वाले प्रमाणपत्र के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाते रहिए। तहसील से जुड़े लोगों का कहना है कि लेखपालों की ढिलाई से प्रमाणपत्र बनने में विलंब होता है। कई बार कोई न कोई कमी दिखाकर आवेदन लौटा दिया जाता है।
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मांग पूरी नहीं होने पर रिपोर्ट लगाने में करते हैं हीलाहवाली
ऐसे तमाम लोग हैं, जिनको जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कई लोगों का आवेदन बिना कोई सूचना या कारण बताए ही निरस्त कर दिया जाता है। वे समझ ही नहीं पाते हैं कि कौन सा प्रपत्र कम था जिसकी वजह से ऐसा हुआ। असल में यहां खेल दूसरा चलता है। मांग पूरी नहीं होने पर राजस्व कर्मी रिपोर्ट लगाने में हीलाहवाली करते हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की समय सीमा खत्म होने वाली होती है तो आवेदन को निरस्त करके खुद का बचाव कर लेते हैं।
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ईडब्ल्यूएस और आय प्रमाण पत्र में फंसाते हैं पेंच
- आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और आय प्रमाणपत्र में लेखपाल सर्वाधिक पेच फंसाते हैं। ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनाने में लेखपाल खूब हीलाहवाली करते हैं, जिससे परेशान होकर आवेदक चढ़ावा लेकर लेखपाल की मनुहार-गुहार करता है। तब जाकर प्रमाणपत्र निर्गत हो पाता है। यही हाल आय प्रमाणपत्र का है। जैसे यदि कोई आवेदक 50 हजार रुपये के आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करता है और लेखपाल को खुश नहीं कर पाता है तो यह प्रमाणपत्र 80 हजार से एक लाख रुपये तक का बना दिया जाता है।
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यह फंसाते हैं पेच
- किराए के कमरे में रहने वाले लोगों के प्रमाणपत्र जैसे आधार इत्यादि को संशोधन के लिए कहते हैं।
- नाम और पते में आंशिक बदलाव या गड़बड़ी को आधार बनाकर निरस्त कर देते हैं।
- आवेदन के लिए प्रधान और सभासभ के प्रमाणपत्र में कोई न कोई कमी बताई जाती है।
- अनुचित मांग पूरी नहीं होने पर आवेदन को निरस्त कर दिया जाता है। इससे दिक्कत आती है। लोगों को दोबारा आवेदन करना पड़ता है।
- कई बार लेखपाल अपने आप के बाहर होने या अन्य किसी काम में व्यस्त होने का हवाला देकर भी मामला टाल देते हैं।

केस-एक
फीस के अतिरिक्त खर्च हुए पांच सौ रुपये
आय प्रमाण हासिल करने में करीब महीनेभर का समय लग गया। ऐसा लेखपाल की रिपोर्ट लगने में विलंब के चलते हुआ। मोबाइल पर किसी ने फोनकर खुद को मुंशी बताया, इसके बाद उनसे मिलने पर पांच सौ रुपये अतिरिक्त खर्च हो गए। -सदानंद, बानपुर

केस-दो
चार माह से लेखपाल नहीं लगा रहे रिपोर्ट
- चार माह से आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर रहा हूं। इसके बावजूद, लेखपाल रिपोर्ट नहीं लगा रहे हैं। तहसील जाने पर वह मिलते नहीं हैं और फोन करता हूं तो उठाते नहीं हैं। जिसकी वजह से आय प्रमाण पत्र बन नहीं पा रहा है। -वशिष्ठ मिश्रा, बखरिया

वर्जन-
- लेखपालों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि आय, जाति व निवास प्रमाण पत्रों के बनाने में लापरवाही न करें। आवेदन निरस्त करने से पहले ठोस वजह का होना आवश्यक है। यदि अकारण आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं या आवेदक को परेशान किया जा रहा है तो आवेदक सीधे शिकायत करें, संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। -शैलेश दुबे, एसडीएम सदर
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