रिजर्व बैंक में नोटों की गिनती होने पर पकड़ में आया गोलमाल
पीएनबी चेस्ट की शाखा प्रबंधक ने कोतवाली में दर्ज कराया केस
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बैंकों में नकदी पहुंचाने वाली निजी कंपनी के कैश वैन के चालक ने पंजाब नेशनल बैंक की चेस्ट से 14.79 लाख रुपये का गबन कर लिया। रिजर्व बैंक को भेजे गए नोटों के बंडल की गिनती में इतनी बड़ी रकम कम पाए जाने पर खलबली मच गई। चेस्ट शाखा और अन्य सीसीटीवी कैमरों की जांच में चालक का कारनामा पकड़ में आ गया। अपने को फंसते देख आरोपी चालकक ने 12.64 लाख रुपये वापस कर दिए। बाकी रकम जमा न होने पर चेस्ट शाखा की प्रबंधक प्रयागराज जिले के झूंसी आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रियंका यादव ने कोतवाली में बुधवार को केस दर्ज कराया।
पुलिस के अनुसार, सोनहा थाना क्षेत्र नटाई खुर्द सरदहा निवासी प्रदीप शर्मा बैंकों की करेंसी इधर से उधर ले जाने का ठेका लेने वाली एक निजी कंपनी की कैश वैन का चालक है। वह करीब चार साल से कैश चेस्ट से रुपये लाने और ले जाने का काम करता था। आरोप है कि उसने चेस्ट में नोटों का बंडल इधर-उधर करने के दौरान कुछ रुपये अपने पास रख लिया करता था। चेस्ट में जमा हुई पुरानी करेंसी जब बदलने के लिए रिजर्व बैंक को भेजी गई तो गिनती में 14 लाख 79 हजार रुपये कम पाए गए।
इसके बाद बैंक कर्मियों में खलबली मच गई। बैंक स्तर पर गहनता से जांच शुरू की गई तो चेस्ट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखा गया। बैंक अधिकारियों ने बताया कि कई फुटेज में प्रदीप शर्मा को बंडल से नोट निकालते देखा गया। सबूत सहित मामला खुलने के बाद आरोपी ने 12.64 लाख रुपये बैंक को वापस कर दिए। कोतवाल विजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि अमानत में खयानत का केस दर्ज कर छानबीन की जा रही है।
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कटे-फटे नोटों के बंडल से निकालता था रुपये
बैंक अधिकारी ने बताया कि लंबे समय से चेस्ट में नोटों को लाने और ले जाने का काम करने की वजह से चालकों पर भरोसा हो जाता है। इसलिए उन्हें चेस्ट के अंदर तक आने-जाने की छूट मिल जाती है। कई बार वे ही बंडल उठाकर गाड़ी में ले जाते हैं और डिलीवरी करआते हैं। शाखाओं से आने वाली नोटों की चेस्ट में छंटाई होती है। उसमें अच्छे नोटों के बंडल बनाकर बैंक शाखाओं और एटीएम आदि को भेज दिए जाते हैं। कटे-फटे नोटों की संख्या ज्यादा होने पर उसे आरबीआई में भेजकर नई नोट मंगाई जाती है। बताया जा रहा है कि उसी बंडलों में से चालक रुपये निकालता था। इसलिए अब तक पता नहीं चला।