बस्ती। शिक्षकों के सामने परिषदीय विद्यालयों की स्थिति सुधारने की कठिन चुनौती है। बच्चों को पढ़ाने के बजाय गुरुजी को अतिरिक्त कार्यों का बोझ ढोना पड़ रहा है। शिक्षण कार्य के साथ उनके ऊपर विभिन्न विभागीय कार्यक्रमों की जिम्मेदारी थोप दी जा रही है। अन्य विषयों से जुड़े विभागीय फरमान पर खरा उतरने का गुरुजी का प्रयत्न बच्चों की पढ़ाई को चौपट कर दे रहा है। नए सत्र में अभी विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल रफ्तार पकड़ता कि शिक्षकों को एक बार फिर हाउस होल्ड सर्वे की जिम्मेदारी सौंप दी गई। अब गुरुजी विद्यालय संचालित करें या विभागीय फार्मेट पर सर्वे का कार्य पूर्ण करें, यह असमंजस हर जगह हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद का नया फरमान जारी हुआ है कि सभी शिक्षक अपने कार्यक्षेत्र में डोर-टू-डोर हाउस होल्ड सर्वे करेंगे। इसके लिए पांच दिन का समय दिया गया है। 20 मई तक सभी शिक्षकों को इस सर्वे रिपोर्ट को प्रेरणा एप पर अपलोड करना होगा। जबकि नए सत्र में इसी तिथि तक विद्यालय भी संचालित किए जाएंगे। इसके बाद ग्रीष्मावकाश हो जाएगा। ऐसे में मूल कार्य से ध्यान भटकना शिक्षकों के लिए स्वाभाविक है। इसके अलावा हर माह मिड-डे-मील योजना, ऑपरेशन कायाकल्प, निपुण भारत लक्ष्य, जूता-मोजा व स्कूल यूनीफॉर्म आदि योजनाओं का संचालन और आडिट कराने की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर है। यदि किसी भी योजना में कोई चूक हुई तो वेतन बाधित होने से निलंबन तक की कार्रवाई भी झेलनी पड़ती है। विद्यालयों की साफ-सफाई, पेयजल, विद्युतीकरण, रसोई गैस आदि का इंतजाम भी शिक्षकों को ही करना पड़ता है। यही वजह है कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय अन्य योजनाओं के संचालन में पूरे साल व्यस्त रहते हैं।
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पांच हजार शिक्षकों के बाद भी पढ़ाई स्तर सुदृढ़ नहीं
बेसिक शिक्षा विभाग के पास जनपद में पठन-पाठन का माहौल सृजित करने के लिए पांच हजार शिक्षकों की लंबी टीम हैं। बावजूद इसके परिषदीय स्कूलों की दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। जनपद में कुल 2207 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। जिसमें 1432 प्राथमिक, 338 उच्च प्राथमिक और 301 कंपोजिट विद्यालय हैं। इसमें से कुछ विद्यालयों पर ही गुणवत्ता पूर्ण पढ़ाई हो पा रही है। बाकी जगहों पर अन्य विभागीय कार्यक्रमों की फेर में शिक्षक उलझे हुए हैं।
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इन्हें हैं नाराजगी
शिक्षकों के भरोसे बच्चों की पढ़ाई के साथ विविध कार्यक्रम संचालित किए जाने पर नाराजगी सभी की है। लेकिन विभाग के खिलाफ मुंह खोलने को अधिकांश शिक्षक तैयार नहीं है। उनका मानना है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए उनकी नियुक्ति भले हुई है लेकिन विभाग जिस कार्य में लगाएगा, उसे पूरा किया जाएगा। शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी इस मुद्दे पर विभाग को घेरते नजर आ रहे हैं।
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अधिकांश स्कूलों में छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षक नहीं है। बावजूद इसके तैनात शिक्षकों को अतिरिक्त कार्य सौंप दिया जाता है। ऐसे में शिक्षण कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है। यह आवाज संगठन द्वारा कई बार उठाई गई है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। -बालकृष्ण ओझा, जिला मंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ
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विभागीय नियमावली के तहत कार्य की जिम्मेदारी सभी को मिलती है। चाहे अधिकारी हों, लिपिक हों या शिक्षक। जिसको जो दायित्व मिल रहा है, उसका निर्वहन समयबद्ध ढंग से करना होगा। जहां तक विद्यालयों में संचालित कार्यक्रमों की बात है तो वह भी शिक्षा से ही जुड़ा है। -डॉ. इंद्रजीत प्रजापति, बीएसए