लुंबिनी की ओर जाने वाले यात्री घनचक्कर में पड़कर गोरखपुर का रास्ता नाप रहे हैं। कुछ दूर चलने के बाद उन्हें यह पता चलता है कि उनकी यात्रा गलत दिशा में होने लगी है। फिर वापस पूछते-पूछते लुंबिनी की सड़क तक लोगों का आना हो रहा है। अनजान यात्रियों के साथ अक्सर ऐसा हो रहा है। उन्हें सड़क के गुमनाम होने के कारण दस से बीस किलोमीटर की दूरी अनावश्यक तय करनी पड़ रही है।
वाराणसी के रहने वाले प्रेम नारायन सिह ने बताया कि घर से निकले थे टूर पर। लुंबिनी होते हुए नेपाल घूमने का मन था। बस्ती में पहुंचे तो लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन मिल गया। इस पर चलने के दौरान पता ही नहीं चला कि लुंबिनी-दुद्धी सड़क कहां छूट गई। हम लोग 35 किलोमीटर आगे खलीलाबाद पहुंचे, तब पता चला कि रास्ता गलत है।
पर्यटक विद्युत प्रकाश सैनी ने बताया कि सारनाथ से बस्ती तक चला आया कहीं दिक्कत नहीं हुई। जो भी कठिनाई सामने आई यहीं चार से पांच किलोमीटर की दूरी में। पहले अंडरपास से होकर फोरलेन पर यात्रा होने लगी। हम लोगों को लगा कि आगे कहीं लुंबिनी-दुद्धी मार्ग का संकेतक या साइनबोर्ड लगा होगा। यहीं देखते-देखते दस किलोमीटर तक चले गए। गोरखपुर हाईवे पर टोल भी देना पड़ा। बाद में गूगल से पता चला कि मार्ग भटक गए हैं।
बस्ती जिले में लुंबिनी-दुद्धी सड़क परियोजना की लंबाई 55 किलोमीटर है। इसके निर्माण पर 350 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। फुटहिया से बड़ेवन चार किलोमीटर तक यह सड़क नहीं बनाई गई है। केवल फुटहिया पर अंडरपास के साथ फोरलेन पर ओवरब्रिज बनाकर छोड़ दिया गया है। यहां से साढ़े तीन किलोमीटर दूर मूड़घाट चौराहा है। जहां से फोरलेन का एक किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर शुरू होता है।
इसके दोनों तरफ शहरी आवागमन के लिए चार-चार मीटर चौड़ी सर्विस लेन बनाई गई है। पहले से बने इसी सर्विस लेन पर ही लुंबिनी-दुद्धी मार्ग को उतार दिया गया है। मूड़घाट चौराहे पर इसका साइन बोर्ड या संकेतक भी नहीं है। इससे अनजान लोग नहीं समझ पाते हैं और उनकी यात्रा गोरखपुर की ओर होने लगती है।
इसी वजह से बड़ेवन पर लगता है जाम
सर्विस लेन पर लुंबिनी-दुद्धी मार्ग का आवागमन निर्भर होने के कारण बड़ेवन चौराहे में दिनभर जाम की समस्या रहती है। पर्यटकों के वाहन एवं अन्य भारी वाहन इस सकरे रास्ते पर रेंगते हुए नजर आते हैं। बड़ेवन चौराहा पार करने के बाद ही टू-लेन सड़क मिल पाती है। इतनी दूरी में टू-लेन सड़क न हाेने की वजह से शहरी आवागमन भी प्रभावित रहता है।
मूड़घाट चौराहे से बड़ेवन तक पृथक टू-लेन सड़क बनाने, दोनों तरफ सर्विस लेन को चौड़ा करने, बाईपास बनाने या फ्लाईओवर बनाने के लिए आसपास की जमीनों का अधिग्रहण नहीं किया गया था। इसलिए यह टू-लेन सड़क यहां नहीं बन पाई।
नहीं रही कार्यदयी संस्था एनएचएआई की यूनिट
तीन साल पहले तक लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन एवं लुंबिनी-दुद्धी सड़क परियोजना की खेवनहार कार्यदायी एजेंसी केंद्रीय राज्य सड़क परिवहन विभाग (एनएचएआई) की यूनिट यहां क्रियाशील रखी गई थी। वर्तमान में एनएचएआई की यह यूनिट यहां से हटा दी गई है। अब इन परियोजनाओं की निगरानी अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारी गोरखपुर से करते हैं।
एनएचएआई एक्सईएन इं. भावेष अग्रवाल ने कहा कि लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर चार किलोमीटर की गैपिंग भरने या फ्लाईओवर अथवा बाईपास निर्माण से संबंधित कोई भी प्रोजेक्ट फिलहाल विभाग के पास नहीं है। उनके कार्यकाल का यह मामला भी नहीं है। जो व्यवस्था पहले से बनाई गई है, उसी से काम चलाना होगा।