जिले भर में 60 से 70 क्विंटल चाइनीज लहसुन की हो रही रोजाना खपत
गोरखपुर से जिले की मंडियों में छोटे ढाला गाड़ियों से आपूर्ति करा रहे धंधेबाज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। तस्करी के चाइनीज लहसुन से मोटी कमाई करने वाले धंधेबाज काफी चालाक है। खाने-पीने की चीज के बहाने कस्टम और मंडी शुल्क को बड़े पैमाने पर चपत लगाई जा रही है। नेपाल के रास्ते लाया जा रहा चाइनीज लहसुन की बल्क में डंपिंग गोरखपुर और महराजगंज में हो रही है। यहां से धंधेबाज इसे फुटकर में भिजवा रहे हैं। इससे कई फायदे हैं। बेरोकटोक इस लहसुन की बड़ी एवं छोटी मंडियों में आपूर्ति की जा रही है और टैक्स आदि से भी फुर्सत मिल रही है।
धंधेबाज गोरखपुर और महराजगंज से बोरियों में चाइनीज लहसुन भरवाकर छोटी ढाला गाड़ियों में भेज रहे हैं। लोकल व्यापारियों से फोन पर ऑर्डर लिया जा रहा है। इसके बाद डिमांड के हिसाब से आपूर्ति की जा रही है। ढाला ऑटो पर 8 से 10 बोरी और पिकअप पर 40 से 50 बोरी चाइनीज लहसुन लादकर मंडियों में भेज दिया जा रहा है, ताकि चेकिंग बूथ पर जिम्मेदारों की नजर न पड़े। यदि रोकटोक भी हो तो कम मात्रा दिखाकर आगे निकलने की गुंजाइश भी रहे।
इस खेल में मंडी शुल्क और कस्टम शुल्क की रोजाना बड़े पैमाने पर चोरी हो रही है। जिले में धंधेबाजों का डंपिंग स्टेशन न होने की वजह से यह काला कारोबार पकड़ में भी नहीं आ रहा है। उतनी ही मात्रा में चाइनीज लहसुन की आपूर्ति की जा रही जो एक से दो दिन में खपत हो जाए। इस विधा को अपनाकर जिले की विभिन्न मंडियों में चाइनीज लहसुन की आसानी से खपत हो जा रही है।
चाइनीज लहसुन की खपत मुख्यालय स्थित बड़ी मंडी से लेकर ग्रामीण अंचल की मंडियों तक हो रहा है। इसके लिए अलग- अलग रूट का इस्तेमाल किया जा रहा है। नेपाल से तस्करी कर लाए जा रहे चाइनीज लहसुन को संतकबीरनगर जिले के मेंहदावल, बाघनगर, सेमरियॉवा आदि बाजार में कैंपियरगंज के रास्ते भेजा जा रहा है। जबकि जिले के रुधौली, भानपुर क्षेत्र में बखिरा- रुधौली मार्ग से भेजा रहा है। इसके अलावा हाईवे पर स्थित बड़ी मंडी में गोरखपुर से सीधे भेजा जा रहा है। इन मंडियों से यह लहसुन छोटे व्यापारी बोरियों में ले जा रहे हैं।
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मंडी समिति प्रशासन भी बना है बेखबर
मंडी समिति प्रशासन भी चाइनीज लहसुन की आपूर्ति एवं बिक्री से बेखबर बना है। सभी मंडियों में इसकी खुलेआम आपूर्ति होने के साथ बिक्री भी हो रही है। बावजूद इसके कोई रोकटोक नहीं हो पा रहा है। अलबत्ता जिम्मेदारों ने धंधेबाजों को मौन सहमति दे रखी है। यहीं वजह है नेपाल के रास्ते तस्करी कर लाए जा रहे चाइनीज लहसुन की बिक्री की धूम मची है।
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तस्करी कर लाया गया चाइनीज लहसुन सस्ता
नेपाल के रास्ते तस्करी कर लाया जा रहा चाइनीज लहसुन बाजार में लोकल लहसुन से सस्ता पड़ रहा है। इस पर किसी तरह टैक्स नहीं लग रहा है। लहसुन व्यापारी विनोद कुमार ने बताया कि थोक भाव में देसी लहसुन की कीमत 250 से 260 रुपये किलो है, जबकि चीन से आया लहसुन 220 से 230 रुपये किलो बिक रहा है। सस्ता होने और क्वालिटी बेहतर दिखने के चलते फुटकर व्यापारी भी इस लहसुन को ज्यादा खरीद रहे हैं। इससे पूरा कारोबार प्रभावित हो रहा है।
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लोकल लहसुन की घट गई डिमांड
चाइनीज लहसुन के आगे लोकल लहसुन की डिमांड घट गई है। पूरी सफेदी के साथ बड़े आकार में दिखने वाला यह लहसुन लोग पहले पसंद कर रहे हैं। जबकि वनस्पति विज्ञानियों के अनुसार इसकी पैदावार में प्रचुर मात्रा में रसायन का प्रयोग होने से यह सेहत के लिए खतरनाक है। मगर अनजाने में लोग इसे खरीदकर घर ले जा रहे हैं। इसीलिए लोकल लहसुन की डिमांड घट गई है। औरैया जिले के अछलदा मंडी से इसकी आपूर्ति महज 30 से 40 क्विंटल की रोजाना है। दिखने में छोटा और बदरंग होने के नाते यह ग्राहकों को कम पसंद आ रहा है।
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कोट
बाजार में चाइनीज लहसुन की खपत बढ़ी है इसकी कोई जानकारी अभी नहीं है। वैसे लहसुन की क्वालिटी देखने के बाद ही उस पर प्रश्नचिह्न लगाया जा सकता है। जहां तस्करी करके लाए जाने का मामला है तो इसकी जांंच कराई जाएगी।
महेंद्र नाथ गुप्ता, सचिव, मंडी परिषद
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चाइनीज लहसुन दूसरे देश की किसी वस्तु की व्यावसायिक दृष्टि से अपने देश में यदि आयात हो रहा है तो उस पर एक्सपोर्ट चार्ज, कस्टम चार्ज, जीएसटी, सेंट्रल जीएसटी आदि टैक्स लगते हैं। इसलिए उसकी कीमत महंगी हो जाती है। यदि विदेशी सामग्री की कीमत सस्ती है तो समझ लीजिए कि वह तस्करी करके ही लाया गया है।
मनमोहन श्रीवास्तव, अधिवक्ता, वाणिज्य कर।