कलवारी थाना क्षेत्र के गोसैसीपुर में राम मिलन की हत्या के विरोध में प्रदर्शन करते ग्रामीण।
-हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर भी अड़े राममिलन के परिजन
- पांच आरोपियों की पुलिस कर चुकी गिरफ्तारी,शेष की तलाश में दबिश
संवाद न्यूज एजेंसी
कुदरहा, बस्ती। कलवारी के गोसैसीपुर में शनिवार को हुए खूनी संघर्ष के बाद गांव में अब भी तनावपूर्ण माहौल है। हत्या के खिलाफ बड़ी संख्या में ग्रामीण मृतक राम मिलन चौधरी का शव लेकर कलवारी चौराहे पर जाम करने की तैयारी में थे। लेकिन पुलिस पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर सीधे गोसैसीपुर गांव में पहुंच गयी। वहां परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। वे आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके घर पर बुलडोजर चलवाने की मांग पर अड़ गए। पुलिस लगातार प्रयास करती रही कि शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाए लेकिन परिवार वाले मानने को तैयार नही थे।
अपर पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने बताया कि पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। शेष के लिए तीन टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। उधर, खूनी संघर्ष में अपने दाएं पैर का पंजा गंवाने वाले राम मिलन के पुत्र विशाल की हालत नाजुक बनी हुई है। गोरखपुर मेडिकल कालेज के डाक्टरों ने लखनऊ मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। जहां पर वह जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है।
11 नामजद सहित 22 के खिलाफ केस दर्ज,पांच गिरफ्तार
पुलिस ने राममिलन के परिवार की तहरीर पर हरिशंकर, सूर्य प्रकाश उर्फ जगलर, रामदास, अंगद, चन्दन, मनोज, राज, उदयशंकर उर्फ सोनू, राम नरेश, सचिन्द्र, बदरे आलम निवासी गोसैसीपुर और 10-12 अज्ञात के विरुद्ध हत्या, बलवा, हत्या का प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। उनमें से मुख्य आरोपी हरिशंकर उर्फ रावण के अलावा मनोज, सूर्य प्रकाश उर्फ जगनरेश, वीरेन्दर कुमार और बदरे आलम निवासी गोसैसीपुर की गिरफ्तारी की जा चुकी है। उनके कब्जे से एक गंड़ासा, एक टांगी, एक पाइप व दो डंडा बरामद किया गया है।
मरोड़ कर तोड़ दिए थे दोनों हाथ,काट दिया था पंजा
हमलावरों ने मृतक राम मिलन और उनके बेटे विशाल को निर्ममता से मारा था। मगर राम मिलन के दाएं पैर का पंजा काटने के साथ ही दोनों हाथ ऐंठ कर तोड़ दिए हैं। इतना ही नहीं कोई नुकीली चीज सीने पर दो पसली के नीचे भोंक दिया गया था, जिससे शरीर का सारा खून बह गया और उनकी मौत हो गई।
सरयू में गांव समाने के बाद बसे थे पूर्वज
राम मिलन चौधरी का मूल गांव बंधे के दक्षिण गंगापुर माझा था जो करीब 70 साल पहले सरयू की धारा में कटकर समाप्त हो गया। इसके बाद राम मिलन के पिता बालेदीन चौधरी गोसैसीपुर में आकर बस गए। उस समय गांव के चौधरी वर्ग और अनुसूचित जाति के लोगों में बेहतर सामंजस्य था। इसलिए कुछ रुपये देकर बालेदीन चौधरी ने अनुसूचित जाति के लोगों से जमीन लेकर घर बनाया था। इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। लेकिन गांव के कुछ नई पीढ़ी के युवकों ने उस जमीन को सन् 1083 में पट्टा बताकर खाली करने का दबाव बनाने लगे। तहसील दिवस में भी यह मामला पहुंचा तो पैमाइश में वह जमीन डीह आबादी निकली। मगर आरोपी पक्ष पट्टे की बात कहकर हक जताता रहा। हालांकि पुलिस या राजस्व विभाग के सामने पट्टे से संबंधित कोई कागजात वे लोग नहीं रख पाए मगर दबंगई के बल पर विवाद करते रहे।
देर होती तो हो जाती और भी मुश्किल
- घायलों का इलाज करने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुदरहा के चिकित्सक डाक्टर अश्वनी कुमार ने कहा कि अस्पताल पहुंचने में यदि 10 मिनट की भी देर हो जाती तो बाकी घायलों की जिन्दगी बचाना भी संभव नहीं हो पाता। अवकाश पर होने के बावजूद भी घायलों की गंभीर हालत देखकर वह साथियों के साथ घायलों के इलाज में जुट गए तब विशाल और उसकी बुआ माला को बचाया जा सका।
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बेटे की शादी का सपना संजोए दुनिया से चले गए पिता
राम मिलन के बेटे विशाल की शादी आठ मार्च को दुबौलिया थाना क्षेत्र के केवाड़ी गांव में तय थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थी। घर में प्लास्टर और दरवाजे का काम चल रहा था। जो कि इनके विपक्षियों को पसंद नहीं आ रहा था। इसी खुन्नस में शनिवार दोपहर में सोते समय धारदार हथियार से इनकी हत्या कर दी और बेटे के सिर पर शादी का सेहरा बांधने का सपना लिए राम मिलन इस दुनिया को विदा कर गए।