अपनी उच्च राशि में विराजमान होंगे सूर्य, कर्म राशि में चंद्रमा
जिले के विभिन्न घाटों पर लगेगा श्रद्धालुओं का मेला
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। इस बार 17 अप्रैल को पड़ रही राम नवमी पर गृह-नक्षत्रों का बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि जो संयोग त्रेता युग में प्रभु श्रीराम के जन्म के समय बना था, वैसा ही संयोग इस बार भी बन रहा है। इस दिन चंद्रमा कर्क राशि में मौजूद रहेंगे। सूर्य अपनी उच्च राशि मेंष में विराजमान होंगे, साथ दशम भाव में रहेंगे। इसके अलावा 17 अप्रैल को गजकेसरी योग भी बनेगा। त्रेता युग में जब भगवान राम का जन्म हुआ था तब सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होने के साथ दशम भाव में थे। ऐसा होने की वजह से श्रीराम भक्तों में अपेक्षाकृत अधिक उत्साह देखा जा रहा है।
चैत्र रामनवमी पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरयू के नौरहनी, कलवारी टांडा घाट, कुआनो के लालगंज, अमहट सहित मनोरमा नदी के विभिन्न घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान-दान करने जुटेंगे। नौरहनी, परशुरामपुर के श्रंगीनारी और मखौड़ा धाम में भब्य मेले लगेंगे। रात से ही वहां दुकानें सजने लगी थीं।हूर्त रहेगा। माना जाता है कि राम नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में कुछ चीजें खरीदने से भक्तों पर प्रभु राम की कृपा बरसती है।
रामनवमी पर सरयू, मनोरमा व कुआनों नदी के कई घाटों पर श्रद्धालु स्नान-दान करते हैं। कई जगह मेले भी लगते हैं। हर्रैया कस्बे के मनोरमा घाट पर और बैरवा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करेंगे। सिसई उभईं, नागवीर, जगदीशपुर, ज्ञानपुर, पूरे लेखई, पूरे बैजू, शेरवाडीह, सेंदुरिया घाट, लजघटा, रानी गांव, आमा, जीजी रामपुर समेत अन्य गांवों के लोग वहां आस्था की डुबकी लगाएंगे।
हर्रैया प्रतिनिधि के मुताबिक, कोहले गांव में सम्मय माता के मंदिर, परमहंस बाबा के मंदिर के अलावा अमारी बाजार बैरवा घाट, सेंदुरिया, बासगांव, रानीगांव, अजगरा, अशोकपुर, हुड़रा कुंवर, बरहपुर कुंवर, पखेरी, लजघटा समेत अन्य गांवों के लोग मेले में भाग लेते हैं। गौर प्रतिनिधि के मुताबिक कोटही सम्मय माता के स्थान, हलुआ सम्मय माता मंदिर, हलुआ सम्मय माता के स्थान, केसरई, बलुआ, मुसहा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भीड़ जुटती है।
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तिथियों के जोड़तोड़ के कारण नवमी आज
चैत्र शुक्ल की नवमी तिथि 16 अप्रैल को दोपहर 01:23 से शुरू होकर 17 अप्रैल 2024 को दोपहर 03:14 तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के महत्व के कारण महानवमी 17 अप्रैल बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन देवी की नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। साथ ही इसी दिन नवरात्र व्रत का पारण भी किया जाता है।