बस्ती। भुजंगासन के चारों चरणों के अभ्यास से लंबर स्पॉडिलाइटिस से निजात मिल जाती है। साथ ही गर्दन कंधे एवं कोहनियों का दर्द जड़ से समाप्त होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को योग से जुड़कर इसके लाभ को प्राप्त करना चाहिए।
ये बातें पतंजलि योग समिति के संरक्षक डॉ. प्रवेश कुमार ने कहीं। वह भारत स्वाभिमान एवं पतंजलि योग समिति की ओर से गांधी नगर में चल रहे सात दिवसीय योग विज्ञान शिविर को संबोधित कर रहे थे। योग प्रशिक्षक सुभाष चंद्र आर्य ने योग साधकों को भुजंगासन, शलभासन, नौकासन, उष्ट्रासन, मर्कटासन, आदि का अभ्यास कराया। बताया की रीढ़ की हड्डी पूरे शरीर की शक्ति को बनाए रखने का कार्य करती है। अधिक देर तक खड़े होकर कार्य करने या एक ही आसन में देर तक बैठने से इस पर जोर पड़ता है जिससे स्पाइन संबंधी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इसलिए काम के दौरान आसन बदलना चाहिए। इस मौके पर सिया मिश्रा, स्तुति मिश्रा, सावन कुमार, भारत तिवारी, दीनानाथ शुक्ल,रामक्षयवर जवाहर यादव, आभा मिश्रा, विद्या मिश्रा, आर सी मिश्रा, राधिका चौधरी, हरमिंदर कौर, पुष्पा सिंह, उर्मिला चौधरी, लालपरी यादव, बबली शर्मा, सुनीता राजपूत, रश्मि देवी, रिजवी, राजकुमार गुप्ता, सी पी दुबे, रामप्रकाश, भानू बाबू, एडवोकेट विनय कुमार पाण्डेय, नमिता पाण्डेय आदि मौजूद रहे।