एक दर्जन स्थानों पर वाटर कूलर के दिख रहे सिर्फ अवशेष, बंद बोतल बन रहा सहारा
प्याऊ के इंतजाम के लिए सामाजिक संस्थाएं भी नहीं ले रहीं रूचि, बढ़ी दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। गर्मी अपने शबाब की ओर बढ़ रही है। कुछ ही देर बाद गला सूखने लग रहा है। चिलचिलाती धूप में प्यास लग रही है। इसके बावजूद शहर में शीतल पेयजल के इंतजाम नहीं हुए हैं। अस्पताल से लेकर चौक-चौराहों पर लगाए गए वाटर कूलर खराब पड़े हैं। अधिकतर जगहों पर केवल अवशेष दिखाई पड़ रहे हैं। शहर में आने वाले मेहनतकश लोगों को प्यास बुझाने के लिए बंद बोतलों का सहारा लेना पड़ रहा है।
तीन साल पहले शहर के पांडेय बाजार, रेलवे स्टेशन, फव्वारा तिराहा, महिला अस्पताल, गांधीनगर, कचहरी चौराहा समेत 15 स्थानों पर नगर पालिका की ओर से आटोमैटिक वाटर कूलर मशीन लगवाई गई थी। इस पर करीब 50 लाख रुपये खर्च हुए थे। एक रुपये का सिक्का डालने पर इस मशीन से एक लीटर पानी निकालने की व्यवस्था थी। मगर, सेंसरयुक्त यह सभी मशीनें बमुश्किल साल भर भी नहीं चल पाई।
एक-एक कर सभी वाटर कूलर बंद होते गए। इसके बाद इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं रहा। अब तो अधिकतर जगहों पर इन मशीनों के सिर्फ अवशेष दिखाई पड़ रहे हैं। गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच गला तर करने के लिए लोग तरस जा रहे हैं। ऑटो चालक, रिक्शा, ठेला चालक एवं मजदूर वर्ग को प्याऊ खोजने पर भी नहीं मिल रहा है। यह लोग प्यास बुझाने के लिए चाय पान की दुकानों का सारा ले रहे हैं या तो बंद बोतल खरीद रहे हैं।
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महिला और जिला अस्पताल में भी पेयजल का संकट
महिला व जिला अस्पताल में भी पेयजल का संकट गहराया हुआ है। इन परिसरों में लगे वाटर कूलर काफी दिनों से खराब हैं। परिसर और उसके बाहर लगे इंडिया मार्क नल भी खराब पड़े हैं। मरीज और उनके तीमारदारों को अस्पताल की कैंटीन से पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। अमहट घाट पर लगा इंडिया मार्क नल भी खराब पड़ा है। बड़ेवन पुलिस चौकी, रेलवे स्टेशन, तुरकहिया आदि क्षेत्रों के सार्वजनिक स्थलों पर इंडिया मार्क नल खराब होने से लोगों को पेयजल के लिए काफी कठिनाई झेलनी पड़ रही है। मजदूर वर्ग को पानी के लिए दर- दर भटकना पड़ रहा है।
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कोट
शहर में शीतल पेयजल की समस्या दो से तीन के अंदर ठीक का दी जाएगी। इंडिया मार्क नल के मरम्मत के लिए जल निगम से कहा गया है। इसके अलावा बंद पड़े कूलरों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। यदि कोई सामाजिक संस्था शहर में प्याऊ की स्थापना करना चाहती है तो उसकी मदद की जाएगी।
-सत्येंद्र कुमार सिंह, प्रभारी ईओ/एसडीएम