जमीन कारोबारी सहमे, खोज रहे कायदे-कानून से बचने के तरीके
अब तक नहीं पहुंचा ले-आउट कराने का आवेदन, बीडीए कर रहा इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महायोजना-2031 लागू होने के बाद शहर के विस्तारित क्षेत्र में बीडीए ने दखल देना शुरू कर दिया है। शहर से तीन-चार किमी के इर्द-गिर्द जमीनों की प्लाटिंग बगैर ले-आउट के अवैध मानी जाएगी। बीडीए ऐसे भूखंडों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। क्योंकि महायोजना 2031 लागू होने के बाद पहले जमीन कारोबारियों को व्यवस्थित ढंग से आबादी बसाने के लिए ले-आउटिंग का ऑफर मिला था। मगर, अब तक एक भी आवेदन नहीं पहुंचा। अब बीडीए उन भूखंडों को चिह्नित करेगा जो बिना ले-आउट के प्लाटिंग कर बेचे जा रहे हैं।
करीब दो दशक से शहरी क्षेत्र में भू-माफिया ने धमाल मचा रखा है। किसानों से एकमुश्त जमीन का सौंदा कर उसे टुकड़ों में बेचना का कारोबार तेजी से बढ़ा है। महज से 12 से 15 फीट का रास्ता देकर भूखंड तैयार किए जाते हैं। दो-तीन साल से बीडीए प्रभावी हुआ तो रास्ते का मानक 20 फीट कर दिया गया। जमीन का कारोबार शहर से चार-पांच किमी बाहर निकल चुका है। इधर, महायोजना- 2031 लागू हुआ तो बीडीए का दायरा भी तीन गुना बढ़ गया। 51 से बढ़कर 151 वर्ग किमी परिक्षेत्र हो गया है।
अब बीडीए ने शहर के आसपास नई आबादी को व्यवस्थित ढंग से बसाने की कवायद शुरू की है। इसके तहत जमीनों की प्लाटिंग बीडीए से ले-आउट पास कराने के बाद ही हो सकती है। इसमें प्लाट के भीतर प्रत्येक ब्लॉक में करीब 30 फीट चौड़ा रास्ता, बगल में नाली और विद्युत खंभे के लिए जगह भी छोड़नी होगी। इसके अलावा जमीन का कुछ अंश पार्क के मद में छोड़ा जाएगा। लैंड यूज के हिसाब से ही ले-आउटिंग की जाएगी।
यदि बीडीए के मानचित्र में जमीन की प्रकृति ग्रीन जोन, एग्रीकल्चर लैंड दर्ज है तो उस पर प्लाटिंग नहीं की जा सकती है। इसके लिए भूमि की प्रकृति शासन स्तर से बदलवानी होगी। लैंड यूज की जमीनों में भी दो श्रेणी है कामर्शियल और आवासीय क्षेत्र। आवासीय क्षेत्र की जमीन में ही प्लाटिंग की जा सकती है। इसी का ले-आउट बीडीए पास करेगा।
अब भू-माफिया इस नियम के पेच में फंस गए हैं। इनके कारोबार में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है। भू-माफिया नए कायदे-कानून के शिकंजे से बच निकलने का काट खोज रहे हैं। यही वजह है कि अब तकबीडीए कार्यालय ले-आउट के लिए एक भी आवेदन नहीं पहुंचा है।
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ऐसे होगा ले- आउट का खाका
छोटे-बड़े भूखंड की अलग-अलग डिजाइन में प्लाटिंग होगी। क्षेत्रफल के हिसाब से ब्लॉक बनाए जाएंगे। सभी ब्लॉकों का आपस में जुड़ाव होगा। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक में पहुंचने के लिए चौड़ा रास्ता निकाला जाएगा। संपर्क मार्ग से संबंधित भूखंड तक पहुंचने के लिए 12 मीटर चौड़ी सड़क दी जाएगी। जमीन का कुछ अंश पार्क के लिए छोड़ा जाएगा। बीडीए एक्ट के अनुसार बिना ले-आउट पास कराए संबंधित भूखंड में निकाला गया रास्ता मान्य नहीं होगा। क्योंकि यह रास्ता राजस्व अभिलेख में काश्तकार के भूमिधरी नंबर के रूप में दर्ज होता है। इसे अधिकारिक मान्यता तभी मिल पाएगी जब ले-आउट पास होगा।
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क्रेताओं को मिलेगी नक्शा पास कराने में सहूलियत
बीडीए एक्ट के अनुसार ले-आउट पास कराने के बाद भू-खंड खरीदने वाले ग्राहकों को भवन निर्माण में काफी हद तक सहूलियत मिलेगी। उन्हें नक्शा पास कराने के लिए जमीन से संबंधित ब्योरा आदि प्रमाणित कराकर नहीं देना होगा। इसके अलावा विकास और सब डिवीजन शुल्क भी नहीं देना पड़ेगा। दूसरा यह कि रास्ता, नाली, पार्क की समस्या भी नहीं रहेगी।
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लैंड यूज का आ रहा अडंगा
ले-आउट पास कराने में लैंड यूज का अडंगा ज्यादा आ रहा है। तमाम कृषि योग्य जमीनें हैं जिसे काश्तकार या जमीन कारोबारी प्लाटिंग करना चाह रहे हैं। मगर जमीन की प्रकृति अनुकूल न होने की जानकारी मिलते ही लोग पीछे हट जा रहे हैं। इस वजह से जमीनों की खरीद-फरोख्त चोरी-छिपे हो रही है। अब लोग मौके पर डिजाइनिंग नहीं कर रहे हैं। कोरे कागज पर इसकी डिजाइनिंग हो रही है। ग्राहकों को कागज दिखाकर जमीन में रास्ता एवं प्लाट की नवैयत समझाई जा रही है। यह सब बीडीए की कार्रवाई से बचने के लिए हो रहा है।
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बिना मानचित्र के आधा दर्जन भवन सील
बीडीए ने बिना मानचित्र के बनाए जा रहे भवनों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। अगस्त मेंं आधा दर्जन से अधिक निर्माणाधीन भवन सील कर नोटिस चस्पा कर दी गई है। इसमें कुछ भवन बिना मानचित्र के बनाए जा रहे थे तो कुछ मानचित्र के विपरीत निर्माण होते पाए गए हैं।
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कोट
बीडीए एक्ट के अनुसार ही अब जमीनों की प्लाटिंग होगी। शहरी क्षेत्र में बिना ले-आउट पास कराए भू-खंड बेचने का कारोबार अवैध माना जाएगा। जमीन कारोबारी यदि ले-आउट पास कराने के बाद भू-खंड बेच रहे हैं तो बीडीए उनकी मदद करेगा।
-प्रतिपाल सिंह चौहान, सचिव, बीडीए/एडीएम