साल भर पहले रामायण सिटी बसाने की बनी थी योजना, सफलता अब तक नहीं लगी हाथ
भूमि तलाशने की नहीं हुई पहल, बीडीए का अपना शहर बसाने का सपना अधूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) का रामायण सिटी के नाम से अपना शहर बसाने का सपना अधूरा रह गया है। इसके लिए जरूरी 25 एकड़ जमीन की तलाश एक साल मेंं भी नहीं की जा सकी है। अब तो रामायण सिटी बसाने का प्रस्ताव ही बीडीए भूल चुका है। क्योंकि जमीन तलाशने के लिए कोई सुगबुगाहट ही नहीं है।
शासन की प्रदेश के सभी प्राधिकरण क्षेत्र में रामायण सिटी बसाने की योजना है। इसके लिए कम से कम 25 एकड़ भूमि अनिवार्य किया गया है। बस्ती में प्राधिकरण के 151 वर्ग किमी के दायरे में रामायण सिटी के नाम से हाईटेक शहरी संरचना तैयार होनी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए बीडीए को अब तक भूमि ही नहीं उपलब्ध हो सकी है।
बीडीए की परिधि में आने वाले नगर पालिका समेत 217 गांवों में इतने बड़े भू-भाग की न तो सरकारी जमीन मिल पा रही है और न ही काश्तकारों की। कुछ किसानों से जमीन खरीदने की पहल हुई तो जरूरत के मुताबिक क्षेत्रफल नहीं पूरा हो सका। इस सिटी को बसाने के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रावधान नहीं है। यह योजना बीडीए स्तर से तलाश कर उपलब्ध कराए गए जमीन पर निर्भर है।
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ऐसा होता रामायण सिटी
रामायण सिटी बिल्कुल नए पैटर्न पर तैयार किया जाना है। आधुनिक डिजाइन की बहुमंजिली इमारतों के साथ इसका लंबा-चौड़ा परिसर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस रखा जाएगा। इसमें बाजार, आवासीय सुविधा के साथ प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र का पूरा दर्शन मिलेगा। रामायण सिटी में प्रभु राम, माता सीता और उनके भाई भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, माता कौशल्या, पिता चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ, हनुमान और रामकथा के अन्य पात्रों के स्मृतियों को संजोते हुए काॅलोनियां, शाॅपिंग माल, सड़कें, पार्क, नौका बिहार, झूला, मल्टी कांप्लेक्स, पेट्रोल पंप आदि विकसित किए जाने हैं। जिस क्षेत्र में यह सिटी विकसित होगी वह विकास की दृष्टि से पुराने शहर से कहीं आगे होगा। मगर, बस्ती में शासन की यह मंशा साकार होती नजर नहीं आ रही है।
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इन जगहों पर हुई जमीन की तलाश
शहर से करीब आठ किमी दूर रामपुर में बनाए गए महर्षि वशिष्ठ मेडिकल काॅलेज के इर्दगिर्द बीडीए की ओर से जमीन की तलाश की जा रही थी। एक काश्तकार से बातचीत भी हुई, लेकिन संबंधित के पास केवल दस एकड़ भूमि ही उपलब्ध थी। अगल-बगल के काश्तकारों ने भूमि देने से मना कर दिया। इसके अलावा टीबी अस्पताल से दो किमी दूर सोनबरसा गांव में भी रामायण सिटी के लिए जमीन खोजी गई। यहां बीडीए ने किसानों को साझेदार बनाने का भी प्रलोभन दिया। बावजूद इसके बात नहीं बन पाई। फुटहिया के पास कुछ काश्तकार जमीन देने के लिए राजी हुए तो यह मानक के विपरीत निकला। कुआनो नदी का दियारा होने के नाते यहां जमीन की सतह काफी नीचे है। शासन के निर्देश के मुताबिक समतल जमीन पर ही यह सिटी बसाई जानी है।
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कोट
रामायण सिटी के लिए जमीन मुहैया कराने के इच्छुक किसान सीधे बीडीए से संपर्क कर सकते हैं। बीडीए जमीन की अच्छी कीमत देने को तैयार है। शर्त है कि जमीन 25 एकड़ के आसपास होनी चाहिए और समतल भूभाग हो। यदि कई किसान मिलकर जमीन का प्रबंधन कर रहे हैं तब भी बीडीए को कोई एतराज नहीं है।
संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए