-मुआवजे का सवा दो सौ करोड़ खाते में डंप, वितरण नहीं
- फरवरी में ही बंट जाना था, तीन महीने में बांटे मात्र 25 करोड़
- काश्तकारों का नहीं हो पा रहा अंश निर्धारण, तहसील का कांट रहे चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती रिंग रोड परियोजना शुरू होने में अभी भी देर है। डीएम की सख्ती के बाद किसी तरह जनवरी में अधिग्रहित क्षेत्र की अवार्ड प्रक्रिया पूरी हुई। उम्मीद थी कि फरवरी में मुआवजे का वितरण सुनिश्चित कर निर्माण शुरू हो जाएगा। मगर इसी बीच तत्कालीन विशेष भूमि आधिपत्य अधिकारी की प्रोन्नति के बाद गैर जनपद स्थानांतरण हो गया।
इसके बाद मुआवजा वितरण की कवायद एक बार फिर बेपटरी हो गई। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से अभी तक ढाई सौ करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है। इसमें से बमुश्किल 25 करोड़ रुपये ही काश्तकारों में वितरित हो सकी है। शेष सवा दो सौ करोड़ रुपये खाते में डंप हैं।
बस्ती रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई अंतिम चरण में आकर अटक गई है। जमीनों के चिह्नांकन के साल भर बाद अवार्ड की प्रक्रिया पूरी की गई। अधिग्रहित क्षेत्र की जमीनों का मय ब्याज मूल्यांकन किया गया। इसके बाद बारी आई मुआवजा बांटने की। इसके लिए काश्तकारों के प्रपत्र तैयार होने में काफी विलंब हो रहा है। मार्च में प्रशासन की सक्रियता पर कुछ काश्तकारों के मुआवजा संबंधी प्रपत्र तैयार हुए। इसके सापेक्ष लगभग 25 करोड़ का भुगतान किया गया।
इसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। दरअसल मुआवजा प्रपत्र में हल्का लेखपाल द्वारा काश्तकार के अंश निर्धारण की रिपोर्ट सम्मिलित होना जरूरी है। अधिकांश काश्तकार अंश निर्धारण के लिए दौड़भाग तेज कर दिए हैं लेकिन, क्रॉप कटिंग सर्वे, चुनावी जिम्मेदारी एवं अन्य कार्यों के चलते लेखपाल नहीं मिल रहे हैं। इससे मुआवजा वितरण की गति धीमी हो गई है। कुछ गांवों में अंश निर्धारण न होने के चलते ग्रामीण और लेखपाल आमने- सामने हो गए हैं।
डीएम स्तर तक ग्रामीणों की शिकायत पहुंचने लगी है। बहरहाल मुआवजा वितरण न होने से यह महत्वाकांक्षी परियोजना कुछ दिनों के लिए फिर देर हो गई।
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प्रथम फेज की सड़क के लिए 111 हेक्टेयर जमीन चिह्नित
रिंग रोड के प्रथम फेज की 22.5 किमी लंबाई में सड़क बनाने के लिए कुल 111 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण हेतु चिह्नित की गई है। विशेष भूमि आधिपत्य कार्यालय से इन जमीनों का मूल्यांकन भी कर लिया गया है। 54 गांवों के 8 हजार काश्तकारों से यह भूमि रजिस्ट्री कराई जानी है। इसके लिए लगभग तीन सौ करोड़ रुपये मुआवजे की जरूरत पड़ेगी। निर्माण एजेंसी की ओर से ढाई सौ करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए गए है। मगर अभी तक काश्तकारों में महज 25 करोड़ रुपये मुआवजे का वितरण हो पाया है।
एक साल से अधिक समय से चल रही अधिग्रहण की प्रक्रिया
बस्ती रिंग रोड को लेकर जनवरी 2023 से अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। जमीनों के चिह्नांकन (थ्री- डी) की कार्रवाई पूरी होने के बाद विशेष भूमि आधिपत्य विभाग ने मूल्यांकन (अवार्ड) की प्रक्रिया शुरू की। परियोजना बड़ी होने के नाते इस कार्य में काफी समय लगा। दिसंबर के आखिर में जाकर अवार्ड की प्रक्रिया पूरी हुई। केवल जमीन उपलब्ध कराने के लिए तीन सौ करोड़ की डिमांड तैयार हुई है।
1138.72 करोड़ लागत से बननी है फोरलेन रिंगरोड
रिंग रोड शहर से दस किलोमीटर दूर गोटवा बाजार से शुरू होकर हड़िया चौराहे होते हुए फिर उसी स्थान पर ले जाकर समाप्त की जाएगी। प्रथम फेज में इस सड़क की लंबाई 22.15 किलोमीटर हैं। फोरलेन के मानक के अनुसार 22 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण होना है। इसके लिए 45 मीटर चौड़ाई में जमीनों का अधिग्रहण किया जाएगा। कुछ जगहों पर जहां पुल, कांप्लेक्स, पार्किंग, टोल प्लाजा आदि का निर्माण प्रस्तावित है वहां 60 मीटर चौड़ी जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इस तरह प्रथम फेज में 111 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होगी। जमीनों के मुआवजा समेत सड़क की कुल लागत 1138.32 करोड़ रुपये निर्धारित है।
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इन गांवों से गुजरेगी रिंग रोड
सदर तहसील के ग्राम पंचायत बकैनियाद्वीप, बक्सर, बल्लीपट्टी, बनकटा, बरवनियां, बायपोखर, बेलवाडाड़, भदेश्वरनाथ, भटहा, देवराव खास, देवरिया, डीघा, गोटवा, कड़रखास, कटया, खुटहन, कोपवा, कोपिया, मछिया, निविया, नौगढ़, ओठगनपुर कला, पचौरा, परसाजाफर, परसा डफाली, परसादपुर, पिपरा मेघउ, पोखरभिटवा, पुरैना, राजा चक, राजाजोत, रिठौली, सबदेइया कला, समसपुर व सेखुई आदि ग्राम पंचायत शामिल हैं।
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मुआवजा के लिए जरूरी यह प्रपत्र
काश्तकारों को मुआवजा के लिए विशेष भूमि आधिपत्य कार्यालय में जमीन से संबंधित स्टांप पेपर, खतौनी, लेखपाल द्वारा प्रत्येक गाटे में संबंधित काश्तकार के अंश निर्धारण की रिपोर्ट, आधार, पैन, बैंक पासबुक की छाया प्रति अनिवार्य रूप से जमा करना है। इसके बाद ही मुआवजे की निर्धारण कर भुगतान किया जाएगा। मगर इसमें अंश निर्धारण की रिपोर्ट तैयार करा पाना सबसे कठिन हो गया है। इसके लिए गांवों में कैंप की भी व्यवस्था नहीं है।, जिससे काश्तकार अपना प्रपत्र नहीं जमा कर पा रहे हैं।
काश्तकारों से जरूरी प्रपत्र जमा कराए जा रहे हैं। अंश निर्धारण तहसील स्तर से होना है। जिन काश्तकारों का प्रपत्र जमा हो रहा है उनके भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यदि किसी मामले में कोई अवरोध आ रहा है तो उन्हें उसकी जानकारी दी जाए। निस्तारण कराया जाएगा।
-संजीव ओझा, प्रभारी, विशेष भूमि आधिपत्य अधिकारी/ सीआरओ।