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Basti News: बीडीए से अवर अभियंता की संबद्धता समाप्त कर चुप हो गए अफसर

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बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) कार्यालय में व्यापारी से रिश्वत लेते हुए संबद्ध अवर अभियंता के वायरल वीडियो का मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। घटना के पांच दिन बीतने के बाद अभी तक किसी कार्रवाई को कौन कहे मामले की जांच तक नहीं शुरू हो सकी है, जबकि वीडियो वायरल होने के बाद उसी दिन देर शाम डीएम ने तत्काल प्रभाव से जेई की संबद्धता खत्म कर जांच के निर्देश दिए थे।
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बीडीए में चढ़ावा चढ़ाने की परंपरा पुरानी है। इसका भंडाफोड़ कुछ व्यापारियों ने 4 अगस्त को किया। बीडीए कार्यालय में ही व्यापारी से 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए संबद्ध जेई केजी चौधरी का वीडियो क्लिप तैयार कर लिया गया। कुछ ही देर बाद यह वायरल हो गया। इसके बाद बीडीए चर्चा में आ गया। जिम्मेदार अफसर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई के बजाय लीपापोती में जुट गए हैं। डीएम का निर्देश भी बेअसर साबित हुआ। संबंधित जेई की संबद्धता खत्म कर अफसरों ने मामले से पल्ला झाड़ लिया। रिश्वत लेने के आरोपी जेई अपने मूल विभाग पीडब्ल्यूडी में तैनात है।
बीडीए के जिम्मेदार अफसर इस प्रकरण में मुंह खोलने को तैयार नहीं है। ऊंची रसूख के चलते संबंधित जेई का प्रकरण जस की तस स्थिति में दबा हुआ है। इसको लेकर विभाग कटघरे में है। आम जुबां से तरह- तरह के सवाल उठ रहे हैं। जिम्मेदार अफसर मामले से खुद को अलग किए हुए हैं।
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जानिए, अधिकारियों ने कैसे किया टालमटोल
प्रकरण के संबंध में जिम्मेदार अफसर टालमटोल रवैया अपनाना शुरू कर दिए है। मंगलवार को बीडीए के अधिशासी अभियंता संदीप कुमार से जब बात की गई तो उन्होंने सिर्फ इतना बताया कि रिश्वत लेने के आरोपी जेई का उनके विभाग से कोई वास्ता नहीं रह गया है। उनके खिलाफ जांच किसे मिली यह हमें नहीं मालूम है। बीडीए के सचिव/एडीएम कमलेश चंद्र ने फोन पर बताया कि आरोपी जेई की जांच बीडीए के ही सहायक अभियंता अरुण शर्मा को सौंपी गई है। टीम ने सहायक अभियंता अरुण शर्मा से भी फोन पर संपर्क किया। उन्होंने बताया कि वह विभागीय कार्य से बाहर है। फिलहाल उन्हें आरोपी जेई की कोई जांच नहीं मिली है। हो सकता है उनके नाम मार्क हुआ हो, यह कार्यस्थल पर पहुंचने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। वहीं संबंधित जेई ने फोन ही नहीं रिसीव किया।
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संविदा कर्मी भी ऑवेदकों से लेते है हिसाब
अमर उजाला के पास ऑडियो क्लिप पहुंचा है, जिसमें बीडीए के एक संविदा लिपिक फोन पर नक्शा आवेदक के परिजन से बात कर रहे हैं। वह पूछते हैं कि आपकी कौन सी फाइल है, उधर से आवेदक के रूप में एक महिला का नाम बताया जाता है। परिजन की ओर से फीस जमा होने की बात बताई जा रही है। इस पर लिपिक एमाउंट पूछते हैं और पेमेंट किस जरिये किया गया जानना चाह रहे हैं। बाद में आवेदक के परिजन को आफिस भी बुलाते हैं, जबकि नक्शे में जमा होने वाले शुल्क के निर्धारण और उसकी जांच के लिए बीडीए के अधिकारी अधिकृत हैं।
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