पुरानी बस्ती क्षेत्र में माल वाहक गाड़ियाें की भरमार, हर सड़क पर लग रहा जाम
पचपेड़िया और मालवीय मार्ग पर बसों की आवाजाही, परेशान हो रहे बच्चे और मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पुरानी बस्ती क्षेत्र में जाम की समस्या खत्म होने का नाम ही नहीं लेती। कोई ऐसा दिन नहीं, जिस दिन यहां जाम से लोगों को दो-चार न होना पड़ता हो। इससे मुक्ति तभी संभव है, जब शहर के भीतर बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगे। बुधवार को पांडेय बाजार के रहने वाले मनीष साहू घर से निकले तो चौराहे से आगे बढ़ने पर डुमरियागंज मार्ग पर जाम में फंस गए। पूछने पर उन्होंने बताया कि यह दृश्य एक दिन का नहीं,बल्कि रोज का है। इस मुसीबत को झेलते-झेलते आदत पड़ गई है।
मेंहदावल रोड पर जाम की स्थिति और विकट नजर आई। बाघनगर से पत्नी के साथ आए लवकुश एक बड़े प्रतिष्ठान के सामने बाइक पर बैठे-बैठे सड़क पर आड़े तिरछे खड़े ट्रक के हटने का इंतजार कर रहे थे। उनके अगल-बगल, पीछे और सामने अन्य लोग भी गाड़ियों पर बैठे थे। रास्ता जाम था। प्रतिष्ठान की ओर से दो तीन कर्मचारी हाथ हिलाकर भीड़ को तसल्ली दे रहे थे कि रुकिए, ट्रक खाली हो रहा है, अभी रास्ता खाली हो जाएगा।
लवकुश ने कहा कि जब भी पांडेय बाजार के रास्ते आओ, यही मुसीबत सामने आती है। यहां से सरपट निकलना छोटे-बड़े किसी भी वाहन के लिए संभव नहीं है। समूचे पांडेय बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था ध्वस्त है। पांडेय बाजार चौराहे से लेकर बांसी, मेंहदावल व डुमरियागंज मार्ग पर एक किमी के परिधि में थोक कारोबार की बाजार सजने से बड़े वाहनों की भरमार रहती है। इनके आगे स्थानीय नागरिकों का निजी वाहनों से निकलना मुश्किल हो जाता है।
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सड़क पर ही खड़े हो रहे पिकअप, ट्रक और मैटाडोर
पांडेय बाजार चौराहे से डुमरियागंज, बांसी व मेंहदावल मार्ग पर एक किमी की परिधि में अनाज, खाद, भवन निर्माण सामग्री आदि का थोक कारोबार होता है। व्यवसायियों के बड़े-बड़े गोदाम भी यहां हैं। ऊपर से रेलवे और एफसीआई का माल गोदाम और निजी कोल्ड स्टोरेज भी हैं। ऐसे में यहां कामर्शियल वाहनों की भरमार सुबह से शाम तक रहती है। हर सड़क पर पिकअप, मैटाडोर, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्राॅली खड़े मिलते हैं। लोडिंग या अनलोडिंग के समय इन्हें दुकानों के सामने बीच सड़क पर खड़ा किया जाता है। इसके कुछ ही देर बाद जाम की समस्या ला-इलाज बन जाती है।
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रेलवे क्रॉसिंग बढ़ा रही और समस्या
पांडेय बाजार चौराहे के पास ही रेलवे क्राॅसिंग है। यहां हर आधे घंटे पर पांच से दस मिनट के लिए समपार फाटक बंद किया जाता है। इसके बाद तो करूआ बाबा चौक से पांडेय बाजार तक आना-जाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। एक तरफ भारी वाहनों की भरमार और दूसरी ओर शहरवासियों की भीड़ समपार फाटक के दोनों तरफ ठसाठस भर जाती है। यह फाटक खुलने के बाद भी जाम हटने में कुछ वक्त लगता है।
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मंगलबाजार में भी घुस जा रहे बड़े वाहन
मंगल बाजार की सड़क काफी संकरी है। सघन आबादी के बीच बाजार होने के नाते सुबह दस बजे के बाद यहां बाइक और ऑटो चलने की गुंजाइश रहती है। मगर, भीड़भाड़ के समय भी करूआ बाबा एवं दक्षिण दरवाजा के रास्ते पिकअप और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे वाहन मंगल बाजार में घुस जा रहे हैं। कुछ ही दूर जाने के बाद स्थिति बिगड़ जाती है। जिन दुकानों के सामने वाहन खड़े कर ठेले लगाकर अतिक्रमण किए गए हैं वहां इन बड़े वाहनों का पार पाना कठिन हो जाता है। क्योंकि तब तक विपरीत दिशा से भी वाहनों की कतार लग जाती है। यहां घंटों जाम की दृश्य बना रहता है।
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गांधीनगर क्षेत्र.. यहां ट्रक से ज्यादा बसों की भरमार
शहर के आधे हिस्से गांधीनगर क्षेत्र की बसावट पुरानी बस्ती की अपेक्षा सघन नहीं है। यहां की सड़कें भी सात से दस मीटर चौड़ी है। मगर जाम की समस्या पुरानी बस्ती जैसी ही है। बस, ट्रक जैसे बड़े वाहन यहां भी धूम मचाए हैं। कहने को सुबह नौ बजे के बाद सिटी में भारी वाहनों के प्रवेश प्रतिबंधित है। मगर इसका पालन कहीं भी होते नहीं देखा जा रहा है। सभी प्रमुख सड़कों पर बस, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्राॅली अक्सर आ जा रहे हैं। जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
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पचपेड़िया मार्ग पर घंटों लग रहा जाम
रोडवेज के पास से पचपेड़िया मार्ग प्रारंभ होकर हाईवे के पटेल चाैक पर समाप्त होता है। इस मार्ग पर एक पेट्रोल पंप, एक दर्जन से अधिक निजी अस्पताल, आधा दर्जन मैरेज हॉल और आधा दर्जन बड़े स्तर के निजी विद्यालय होने के नाते आवागमन ज्यादा रहता है। हाईवे से इस मार्ग के जुड़े होने के कारण शहर में मिट्टी, बालू एवं सामग्रियों की आपूर्ति के लिए पिकप, ट्रैक्टर ट्राली इसी मार्ग के जरिये प्रवेश कर रहे हैं। दोपहर बाद यहां संचालित स्कूलों की छुट्टी के समय लगभग दो दर्जन स्कूल बस और उससे अधिक छोटे वाहन एक साथ बच्चों को भरकर निकलते हैं। इस दौरान पचपेड़िया मोड़ से लेकर संतपुर मोड़ तक ठसाठस वाहनों की भीड़ लग जाती है। कभी- कभी जाम खुलवाने के लिए पुलिस को आना पड़ता है।
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मालवीय मार्ग और कोतवाली मार्ग पर सरकारी बसों की आवाजाही
समय बदलने के साथ आबादी भी बढ़ती गई। इसलिए पुराना रोडवेज अब शहर के बिल्कुल मध्य और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में आ गया है। इस नाते स्थानीय डिपो के अलावा बाहरी डिपो की बसें भी शहर के मालवीय मार्ग और कोतवाली मार्ग से होकर रोडवेज तक पहुंच रही है। स्कूलों की छुट्टी के समय यातायात का दबाव पूरे शहर में बढ़ जाता है। ऐसे में अस्पताल चौराहा, रोडवेज तिराहा, रौता चौराहा, कटरा और बड़ेवन के पास सरकारी बसें और स्कूल बसें आमने- सामने जाम में फंसी रहती है। इनके पीछे छोटे वाहनों की लंबी कतार दोनों तरफ रहती है। चौराहे- चौराहे पर पुलिस किसी तरह इन वाहनों को आगे बढ़ाती है। प्रतिदिन दिन में दो से तीन बजे तक यह समस्या देखने को मिल रही है। या फिर लगन के सीजन में रात में बरात जाने के समय बसों के आने से जाम लग रहा है।
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कोट
शहर में जाम की समस्या से निजात के लिए संयुक्त प्रयास की जरूरत है। यातायात कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। पुलिस, रोडवेज डिपो, नगर पालिका के समन्वय से स्थायी निदान निकल सकता है। जल्द ही इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे। भारी एवं कामर्शियल वाहनों के प्रवेश पर अंकुश लगाए जाएंगे।
-ओपी सिंह, एएसपी