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Basti News: छत्तीसगढ़ से मुंबई तक बाबा के नौ आश्रम,सभी जगह ट्रस्टियों में झोल

Sat, 03 Feb 2024 01:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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- कई ट्रस्ट में बाबा व अन्य ट्रस्टियों के दर्ज हैं अलग-अलग नाम
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- झांसा देकर आश्रम के लिए कहकर अपने नाम बैनामा कराता है जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। गवाहों को धमकी देने वाला पोस्टर चिपकवाने को लेकर सुर्खियों में छाए कथित बाबा सच्चिदानंद उर्फ दयानंद का चौंकाने वाला कारनामा सामने आया है। उसने बस्ती के अलावा मुंबई, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, मुरादाबाद, अमरोहा आदि शहरों में भी आश्रम बना रखा है। उन आश्रमों को संचालित करने के लिए ट्रस्ट भी बनाया है, जिसमें काफी हेरफेर किया गया है। पुलिस की छानबीन में पाया गया है कि बाबा ने अपना नाम भी बदल-बदलकर उसमें दर्ज कराया है। कई ऐसे ट्रस्टियों के नाम भी जोड़े हैं, जिसका नाम दूसरा है। इसमें उसके खिलाफ कोतवाली बस्ती, मुरादाबाद में केस भी दर्ज है। जिसकी पुलिस छानबीन कर रही है।
बाबा को करीब से जानने वाले लालगंज थाने के सेल्हरा निवासी कल्पनाथ बताते हैं कि बाबा लोगों को बहकाकर अपने पक्ष में कर लेता है। इसके बाद परिवार के लोगों पर भी डोरे डालता है। सबका विश्वास जीतने के बाद आश्रम के लिए जमीन खरीदने की बात करता है। लोग धार्मिक कार्य समझकर आसानी से तैयार हो जाते हैं,इसके बाद झांसा देकर जमीन बैनामा करा लेता है। ऐसा उसने सत्यलोक आश्रम सेल्हरा के मामले में भी किया है। जहां पांच बिस्वा बैनामा कराने को कहकर पांच बीघा बैनामा करा लिया था। इसके बारे में कई बार प्रार्थनापत्र दिया जा चुका है।
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बाबा के आश्रम से जुड़ी एक साध्वी ने बताया कि बाबा का बस्ती के डमरुआ, सेल्हरा में सत्यलोक आश्रम के अलावा सिहोर मुरादाबाद, मुंबई के मोहक सिटी सोसाइटी बिरार, दिल्ली के घोटा मोड़ नरेला में संतलोक आश्रम, बिहार के गया जिले के मीठापुर, अमरोहा के थाना गजरौला के खड़गपुर, छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले के हसाद और पेंडा जिले के मरवाही में भी आश्रम है। साध्वी के अनुसार सभी आश्रमों में इसी तरह का गोलमाल है।
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जिसने उठाई आवाज,उसे पर केस करा देता है बाबा
- कथित बाबा के चंगुल से आजाद हुए अनुयायियों का कहना है कि उसको संपत्ति बढ़ाने का ऐसा नशा सवार है कि वह गुनाह पर गुनाह करने में जरा भी गुरेज नहीं है। वह अपने साथ लोगों को स्वार्थ के लिए जोड़ता है। किसी के बारे में जैसे ही उसे लगता है कि अब वह उसके राज जान गया है और आवाज उठा सकता है,उसे किसी न किसी बहाने वह बेदखल कर देता है। बस्ती के संतकुटीर आश्रम में रहने वाली साध्वियों और सेल्हरा के श्यामचंद उर्फ तपस्यानंद के साथ यही हुआ था।
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