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Basti News: 71 किलो चांदी से तैयार हुआ बाबा बेहिल नाथ का कालहरण कवच

Wed, 06 Mar 2024 12:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश बहादुर ने तैयार कराया है महाकाल के रूप में यह कवच
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मंदिर परिसर में मिल चुके हैं ईसा पूर्व पांचवीं सदी के मिट्टी के बर्तन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती/महादेवा। बस्ती से महुली मार्ग पर 16 किमी दूरी पर बाबा बेहिल नाथ का मंदिर है। इस बार महाशिवरात्रि पर मंदिर के गर्भगृह का स्वरूप बदला हुआ दिखेगा। गर्भगृह में शिवलिंग को कालहरण कवच से सुसज्जित किया गया है। महाकाल के रूप में यह कवच छह माह में तैयार हुआ है। इसे तैयार करने वाले रमेश कुमार ने बताया कि कवच बनाने में 71 किलो 400 ग्राम चांदी का उपयोग किया गया है, जिसे पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश बहादुर सिंह ने तैयार कराया है।
बेहिल नाथ मंदिर जिले के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। यह मंदिर प्राचीन काल का बताया जाता है। यहां ईसा पूर्व पांचवीं सदी के मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) के टुकड़े मिल चुके हैं। पुजारी गिरिजेश गोस्वामी बताते हैं कि उनहे बाबा विशेश्वर गोस्वामी ने बताया था कि यहां बहुत पतले आकार में शिवलिंग मिट्टी से निकला था।
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बस्ती गजेटियर के अनुसार, बाबा बेहिल नाथ स्वयं में अनूठा शिवलिंग है। यह मिट्टी के अष्टकोड़ीय अर्घे से प्राप्त हुआ था। उस समय के तत्कालीन जमींदार वजीर सिंह शिवलिंग को खुदवा कर अपने गांव ले जाना चाहते थे। 10 फीट तक खुदाई करने के बाद भी उन्हें शिवलिंग की जड़ का पता नहीं चल पाया। इस बीच खोदाई के दौरान मिट्टी से अधिसंख्य बिच्छू, सांप तथा अन्य जहरीले जीव निकलने लगे। इससे भयभीत होकर जमींदार ने खोदाई बंद करवा दी।
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि सबसे पहले मंदिर का जीर्णोद्धार अमोढ़ा निवासी बाबा रामदेव ने कराया था। इनकी भोलेनाथ में इतनी आस्था थी कि ब्रह्म मुहूर्त से सायं तक एक पांव पर खड़े होकर आराधना किया करते थे। इस दौरान यहां कुछ ऐसे चमत्कार हुए कि दूर-दूर से लोग मुरादें मांगने आने लगे। बाबा बनारसी दास तथा भूरे यादव की अगुवाई में मंदिर का निर्माण हुआ।
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प्रत्येक सोमवार को लगता है मेला
बेहिल नाथ मंदिर पर श्रद्धालुओं की ओर से प्रतिदिन जलाभिषेक किया जाता है। प्रत्येक सोमवार को यहां मेले जैसा दृश्य हो जाता है। सैकड़ों लोग कथा, रामायण, रुद्राभिषेक आदि कराने पहुंचते हैं। मान्यता है कि भोलेनाथ यहां आने वाले भक्तों की मुरादें पूरी करते हैं। महाशिवरात्रि व श्रावण मास में मंदिर परिसर में विशाल मेला लगता है।
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