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वसुधैव कुटुंबकम की भावना का विकास करती है कला : डॉ. रमा

Tue, 06 Jun 2023 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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चित्रकला कार्यशाला में बच्चों को टिप्स देती डॉक्टर रमा
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बस्ती। शिक्षा में कला की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कला शिक्षा का उद्देश्य एक कलाकार को जन्म देना ही नहीं, बल्कि कला बोध और उत्कृष्ट कलात्मक व्यवहार को विकसित करना है। इसे कलात्मक गतिविधियों में भाग लेकर आसानी से सीख सकते हैं। कला में ऐसी शक्ति होती है जो संकीर्ण विचारधाराओं से ऊपर उठकर हमारी मानसिक विचारधाराओं को विस्तृत और व्यापक रूप प्रदान करती है। कला व्यक्ति के मन को उदात्त बनाने के साथ ही उसे ‘स्व’ से निकालकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना से जोड़ती है।
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यह कहना है डॉ. रमा शर्मा का। वह सोमवार को ललित कला अकादमी,उत्तर प्रदेश (संस्कृति विभाग) की ओर से सरस्वती बालिका विद्या मंदिर, रामबाग,में आयोजित ग्रीष्मकालीन चित्र कला प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं। कहा कि कला में मानव मन की दबी हुई संवेदनाओं को उभारने, चिंतन और कलात्मक अभिरुचियों को नई दिशा देने की अद्भुत क्षमता होती है। कला की शिक्षा छात्र-छात्राओं के सृजनात्मक विकास के लिए महत्वपूर्ण और उपयुक्त माध्यम है। अतिथि के रूप में मयंक श्रीवास्तव ने कार्यशाला में कार्य कर रहे विद्यार्थियों के कलात्मक कार्यों का अवलोकन किया। कहा के प्रत्येक विद्यार्थी सृजनात्मक योग्यताओं से परिपूर्ण होता है और कला इन्हीं सृजनात्मक योग्यताओं को पूर्ण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । क्राफ्ट प्रशिक्षक के रूप में रजनी चौधरी ने बच्चों को कलात्मक गतिविधियां करवाईं। इस मौके पर सूरज चौधरी, सरिता शुक्ला, सुमित भट्ट, प्रियांशी, कृति, गौरी हर्षिता, श्रेयसी, पलक आदि मौजूद रहे ।
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