रुचि के अनुसार लक्ष्य तय करें छात्राएं : बीडीओ
सल्टौआ / बस्ती। मदन मोहन मालवीय शिक्षण संस्थान इंटर कॉलेज देईपार सल्टौआ परिसर में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन के अंतर्गत अपराजिता के तहत महिला स्वावलंबन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि बीडीओ सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि छात्राएं अपनी रुचि के अनुसार लक्ष्य तय करें। इसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करें।
मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बीडीओ ने छात्रों को बताया कि शिक्षा ही ऐसा माध्यम है जिससे भविष्य के सपने बुने जा सकते हैं। सफलता प्राप्त करने के लिए किसी दबाव में आकर निर्णय न लें। कहा कि कक्षा छह से 12 तक की शिक्षा छात्राओं के भविष्य का निर्धारण करती है। 12वीं में छात्राओं को भविष्य निर्धारण के लिए निर्णय लेने पड़ते हैं। विशिष्ट अतिथि एडीओ (आईएसबी) कनिक राम चौधरी ने कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका पौराणिक काल से ही रही है। अक्सर अभिभावक बेटों की तुलना में बेटियों को कमतर आंकते हैं। अभिभावक बेटियों को कैरियर चुनने की आजादी दें तो वे भी समाज में बड़ा नाम बनकर उभरेंगी। बेटियों को सतत होने के लिए उन्हें शिक्षित होना पड़ेगा। शिक्षा ही ऐसा शस्त्र है जिससे महिलाएं समाज में नारी गरिमा को सम्मान दिलाने में सफल होंगी। युवा कल्याण अधिकारी अभिषेक चौबे ने कहा कि छात्राएं खेलों में रुचियां लेकर समाज में बड़ा मुकाम हासिल कर सकती है। पिछले कुछ सालों में बेटियों ने देश के लिए तमाम मेडल जीते हैं। प्रबंधक राम किशोर त्रिपाठी ने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा अपराजिता के तहत आयोजित कार्यक्रम बेटियों को सही मार्गदर्शन देने का माध्यम बन रहे हैं। इससे उन्हें कुछ बड़ा करने की प्रेरणा मिल रही है। कार्यक्रम में 310 छात्राओं ने हिस्सा लिया। मौके पर प्रधानाचार्य अखिलेश कुमार द्विवेदी, विनोद कुमार, संजय कुमार, राम कृष्ण पांडेय, राकेश यादव, विजय प्रकाश पांडेय, दिवाकर विक्रम सिंह आदि मौजूद रहे।
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छात्राओं के प्रश्नों का बीडीओ ने दिया जवाब
कक्षा 12 की छात्रा नीलू शुक्ला ने पूछा कि आखिर बेटियों को समाज में कमतर क्यों आंका जाता है। जवाब में बीडीओ ने कहा कि यदि कोई बेटियों को कोई कमतर आंक रहा है तो उसके सामने खुद को सफल बनाकर जाएं। उसके विचार बदल जाएंगे।
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कक्षा 12 की छात्रा सरगम सोनी ने पूछा कि सफलता का क्या पैमाना है।
इसके जवाब में बीडीओ ने बताया कि इसका कोई मानक नहीं है। जो आर्थिक रूप से आजाद है समाज उसी को सफल कहता है।
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कक्षा 12 की छात्रा अंकिता ने पूछा कि बेटों की अपेक्षा बेटियों को बाहर भेजने में अभिभावक क्यों हिचकते हैं।
जवाब में बीडीओ ने बताया कि ऐसा नहीं है अपने बच्चों को खुद से दूर भेजने में हर मां बाप हिचकते हैं वो चाहे बेटी हो या बेटा।
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कक्षा 12 की छात्रा आराधना शुक्ल ने पूछा कि कॅरियर के लिए निर्णय कैसे लिया जाए।
जवाब में बीडीओ ने बताया कि सबसे पहले अपनी रुचियों को एक कागज पर लिखें। फिर उसका आकलन करें कि आपको अपनी रुचि से कितना लगाव है। इसके बाद निर्णय लें।