नौ साल पहले एलान, 40 करोड़ बजट भी पास, ओवर ब्रिज अधर में, रोज लगता है जाम
बस्ती। साहब! यह रेलवे क्राॅसिंग यात्रा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। संभलकर पार करिए। चूक हुई तो लेने के देने पड़ जाएंगे। आधे शहर के आवागमन का यहां भार है। कामर्शियल क्षेत्र होने की वजह से भारी वाहनों की भी आवाजाही बनी रहती है। पूर्वोत्तर की मुख्य रेल लाइन होने की वजह से रेलवे फाटक भी अक्सर बंद मिलता है। इस दौरान क्राॅसिंग के दोनों तरफ यातायात ठहर जाता है। वाहनों की बेतरतीब भीड़ की उलझन हर चेहरे पर दिखती है। फाटक खुला तो और मुसीबत। क्राॅसिंग पार करने की ऐसी जद्दोजहद कि जान तक जोखिम में पड़ जाए।
यह दृश्य हैं रेलवे स्टेशन के पूर्वी केबिन का। जिसे शुगर मिल रेलवे क्राॅसिंग के नाम भी जानते हैं। क्राॅसिंग के दोनों तरफ सड़कों के किनारे गड्ढे है। उसमें वाहन फंस रहे हैं, बीचोबीच रेलवे लाइन के किनारे बिछाई गई गिट्टियां इस क्राॅसिंग को पार करने में और रोड़ा बन रही है। फाटक बंद होने की वजह से कभी-कभी घंटों जाम में जूझना पड़ रहा है। इस क्राॅसिंग से होकर अनुमानित छोटे-बड़े दस हजार वाहनों का गुजरना रोज होता है। इसमें शहर के आधे हिस्से के नागरिकों का आवागमन भी शामिल हैं।
जाम से मुक्ति दिलाने की कवायद नौ साल पहले शुरू हुई थी। इस क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाए जाने का प्रस्ताव पास हुआ। वर्ष 2015 में जनपद के दौरे पर आए तत्कालीन रेल मंत्री मनोज सिन्हा ने यहां ओवरब्रिज बनाए जाने की घोषणा की थी। लेकिन परियोजना की स्वीकृति को कौन कहे, अभी तक जमीन के चिह्नांकन का भी कार्य पूरा नहीं हो सका है। नौ साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद यहां के नागरिक अब फिर निराश हो गए हैं। वह रोजाना इस क्राॅसिंग पर जाम की दुश्वारियों से जूझने पर विवश हैं। बेतरतीब हिचकोले खाते हुए वाहनों की रेंगती भीड़ में हर किसी को भगवान ही याद आ रहे हैं।
चालीस करोड़ का बजट हुआ था पास
तत्कालीन रेलमंत्री की घोषणा के बाद रेलवे बजट में शुगर मिल रेलवे क्राॅसिंग-198 बी पर ओवरब्रिज निर्माण के लिए 40 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली। रेलवे बोर्ड ने तत्काल प्रस्तावित स्थल पर केवल रेलवे की जमीन का ब्योरा तलब किया। स्थानीय रेलवे की निर्माण शाखा ने रेलवे की भूमि का विवरण तैयार कर भेज दिया। लेकिन इसके बाद की प्रक्रिया ठप हो गई। जिससे यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
डिजाइनिंग हुई न बना डीपीआर
रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के लिए परियोजना की डिजाइनिंग अभी तक नहीं की जा सकी। जबकि इसी के आधार पर भूमि चिह्नांकन के साथ डीपीआर तैयार किया जा सकता है। लेकिन रेलवे बोर्ड की सुस्ती की चलते यह सभी प्रक्रिया ठप हो गई है। निर्माण शाखा को ओवरब्रिज के डिजाइनिंग प्रारूप का इंतजार है।
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जानिए प्रस्तावित स्थल की भौगोलिक स्थित
भौगोलिक दृष्टिकोण से शुगर मिल रेलवे क्राॅसिंग पुरानी बस्ती क्षेत्र का पूर्वी किनारा है। यहां से बरदहिया बाजार होते हुए हाईवे, नारंग रोड होते हुए बस्ती-कांटे मार्ग पर जिगिना चौराहा और रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर होते हुए शहर में सीधे प्रवेश किया जा सकता है। शहरी आवागमन के साथ अनाज, सीमेंट के बड़े-बड़े गोदाम होने की वजह से भारी वाहनों की भी आवाजाही ज्यादा रहती है।
अक्सर होती हैं दुर्घटनाएं
इस क्राॅसिंग पर रेलवे फाटक बंद होने के दौरान जाम लगता है। फाटक खुलने के बाद भारी वाहनों और छोटे वाहनों के बीच क्राॅसिंग पार करने की होड़ रहती है। सड़क में गड्ढे और हर तरफ भीड़ में वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं। पांच वर्ष पूर्व इसी तरह की परिस्थिति में फाटक खुलने के दौरान बाइक से क्राॅसिंग पार कर रहे शहर के दवा व्यवसायी नरेंद्र भाटिया के पुत्र की मौत हो गई थी। वह एक बड़े वाहन की चपेट में आ गए थे।
नागरिकों ने गिनाई दुश्वारियां
पुरानी बस्ती में जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने का एक मात्र विकल्प ओवरब्रिज का निर्माण ही है। रेल मंत्री की घोषणा के बाद उम्मीद बनी थी कि रेलवे पुल बन जाएगा। लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा है। -देवी प्रसाद गुप्ता, व्यापारी, पुरानी बस्ती।
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जिस सक्रियता से रेलवे पुल निर्माण के लिए आवाज उठाई गई थी उसी तरह उसकी पैरवी भी रेलवे बोर्ड में होनी चाहिए। यह जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। शुगर मिल के पास रेलवे ब्रिज न होने बड़ी दुर्घटना हो चुकी है। इसके बाद भी जिम्मेदार सचेत नहीं हो रहे हैं।
-सतीश चंद्र सिंघल, पुरानी बस्ती।
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रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के संबंध में अभी कोई स्पष्ट निर्देश नहीं आया है। शुरुआती दौर में प्रस्तावित स्थल पर रेलवे की जमीन ब्योरा तलब किया गया था। जिसका विवरण भेज दिया गया है। इसके बाद डिजाइनिंग प्रारूप नहीं भेजी गई। जिससे प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। -हीरामन, इंजीनियर, आईओडब्ल्यू, बस्ती।
शनिवार सुबह 11 बजे क्रासिंग गिरा तो नियम तोड़ कर बैरियर पार करते लोग।