माझिलगांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
छावनी। जीवन में कभी भी क्रोध नहीं करना चाहिए। जिस जीव के पास क्रोध होता है उसकी बुद्धि और आयु कम हो जाती है। यह कहना है कथाव्यास पं. मयंक कृष्ण महराज का। वह माझिलगांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार श्रद्धालुओं पर कथा सुना रहे थे।
कथा व्यास ने कहा कि राजा परीक्षित चक्रवर्ती राजा थे। उन्होंने क्रोध में समीक मुनि जैसे महान संत का अपमान किया, उस अपमान का परिणाम उन्हें मृत्युदंड का श्राॅप मिला। कहा कि जैसे लोहे को लोहा काटता है, उसी प्रकार से संत के श्राॅप से केवल संत ही मुक्ति दिला सकते हैं। समीक मुनि के पुत्र शृंगी ऋषि ने शुकदेव जैस परम संत का समागम किया और श्रीमद्भागवत कथा को श्रवण कर श्राॅप से राजा परिक्षित मुक्त हो गए।
भागवत कथा सिखाती है जीवन में कभी क्रोध नहीं करना चाहिए। न किसी संत का अपमान करना चाहिए। अपमान मनुष्य के जीवन का पतन का कारण बन जाता है। इस दौरान आचार्य अनिल मिश्रा, आचार्य रतनेश मिश्रा, आचार्य रजनीश दुबे, यजमान रविंद्र नाथ दूवे उनकी पत्नी केश कुमारी दूबे, रामयज्ञ दूबे, कपिल देव आदि मौजूद रहे।