22 साल पुराने अपहरण के मामले में कोर्ट में नहीं हुआ हाजिर, अदालत ने दिया आदेश
बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम/विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) प्रमोद कुमार गिरि ने सीआरपीसी-83 के तहत अमरमणि त्रिपाठी की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह आदेश करीब 22 साल पुराने अपहरण के मामले में प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के शनिवार को भी कोर्ट में हाजिर नहीं होने के बाद दिया है।
मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बस्ती के एसपी को आदेश दिया कि पूर्व में गठित विशेष टीम को भंग करके नए सिरे से टीम बनाएं। नई टीम अभियुक्त अमरमणि की चल-अचल संपत्ति का पता लगाकर उसे कुर्क करे। 20 दिसंबर को सुनवाई के दौरान अदालत को यह अवगत कराएं कि इस मामले में उन्होंने क्या-क्या कार्रवाई की है। अदालत ने चेतावनी दी कि इस मामले में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
व्यवसायी पुत्र राहुल मद्धेशिया के अपहरण मामले में अभियुक्त अमरमणि त्रिपाठी के खिलाफ 24 अक्तूबर, 2011 से गैर जमानती वारंट जारी है। तीन नवंबर 2023 को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने बस्ती कोतवाली पुलिस को सीआरपीसी-82 की कार्रवाई करने का आदेश दिया था। 16 नवंबर की सुनवाई में पुलिस ने सीआरपीसी-82 की कार्रवाई से कोर्ट को अवगत कराया, लेकिन न्यायाधीश ने खारिज करते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली के विरुद्ध कार्य में शिथिलता व लापरवाही का प्रकीर्णवाद दर्ज कर दो दिसंबर को तलब किया था। संवाद
कोतवाल ने मांगी माफी, कंप्यूटर पर मढ़ी गलती
बस्ती। कार्य में शिथिलता व लापरवाही का प्रकीर्णवाद दर्ज होने के बाद कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक शनिवार को न्यायालय में हाजिर हुए। उन्होंने न्यायाधीश को बताया कि पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के विरुद्ध सीआरपीसी-82 की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके घर नोटिस चस्पा किया। लेकिन, समाचार पत्रों में सीआरपीसी-82 की उद्घोषणा छपवाते हुए कोर्ट के नाम में गलती से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का नाम पड़ गया। अदालत में उपस्थित हुए कोतवाल विनय पाठक ने लिखित प्रार्थनापत्र देकर बताया कि कंप्यूटर पर टाइपिंग मैटर कट-पेस्ट करते हुए त्रुटि हो गई थी। इसमें सुधार कराते हुए 16 नवंबर को दोबारा सीआरपीसी-82 की उद्घोषणा स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई गई। उन्होंने कोर्ट से गलती के लिए क्षमा मांगी। इस पर कोर्ट 20 दिसंबर को सुनवाई की तिथि तय कर दी। संवाद