बस्ती। व्यापारी के बेटे के अपहरण के मामले में आरोपी पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी केस में बुधवार को पुलिस को बिना मांगे मन की मुराद मिल गई। उसे कुर्की के आदेश के अनुपालन के लिए 20 दिन का मौका मिल गया। एमपी-एमएलए न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने की वजह से सुनवाई नहीं हुई। अगली तारीख 10 जनवरी तय की गई है।
इससे पहले दो दिसंबर को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम/विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) प्रमोद कुमार गिरि ने पुलिस को नई टीम गठित कर कुर्की की कार्रवाई पूरी कर 20 दिसंबर को सुनवाई की तारीख पर रिपोर्ट करने का आदेश दिया था। न्यायालय के आदेश पर पहले भी पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी के लिए एसपी स्तर से पुलिस टीम का गठन किया गया था, लेकिन टीम कुछ नहीं कर पाई।
इसके बाद न्यायालय ने कड़ी फटकार लगाते हुए कोतवाल को तलब कर लिया था। दो दिसंबर को दूसरी टीम का गठन करके कुर्की कर 20 दिसंबर तक अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी ने कोतवाली के अतिरिक्त निरीक्षक कृपाशंकर मौर्य, क्राइम ब्रांच के निरीक्षक संजय कुमार, एसओ महिला थाना निधि यादव, एसओजी प्रभारी, स्वाॅट प्रभारी और चौकी इंचार्ज सिविल लाइंस की नई टीम बनाई थी। टीम के पर्यवेक्षण का जिम्मा सीओ सिटी विनय चौहान को सौंपा गया है।
कोतवाल चंदन कुमार ने बताया कि अमरमणि की कई संपत्तियों का पता लगाया जा चुका है। कुछ काम बाकी है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
यह है मामला
छह दिसंबर 2001 को व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण हो गया था। इस मामले में कोतवाली थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया गया था। पुलिस ने इस मामले में अमरमणि समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया था। आरोप है कि लखनऊ के जिस मकान से अपहृत बालक मिला था, वह तत्कालीन मंत्री अमरमणि का था। अमरमणि के खिलाफ 24 अक्तूबर 2011 से गैर जमानती वारंट जारी है। तीन नवंबर 2023 को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने बस्ती कोतवाली पुलिस को सीआरपीसी-82 की कार्रवाई करने का आदेश दिया था। 16 नवंबर की सुनवाई में पुलिस ने सीआरपीसी-82 की कार्रवाई से कोर्ट को अवगत कराया, लेकिन न्यायाधीश ने खारिज करते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली के विरुद्ध कार्य में शिथिलता व लापरवाही का प्रकीर्णवाद दर्ज कर दो दिसंबर को तलब किया था।