बस्ती। ओपेक चिकित्सालय कैली में 19 जून की देर रात तब तमाशा खड़ा हो गया जब करीब 12 बजे लालगंज क्षेत्र के रामनगर निवासी एक युवक ने नवजात बदलने को लेकर हो हंगामा शुरू कर दिया। मामले की जानकारी होते ही अस्पताल के सीएमएस डॉ. एएन प्रसाद व चिकित्सक पहुंच गए। इन लोगों ने बच्चा बदलने की बात से इन्कार करते हुए उसे फाइल आदि दिखाई, मगर युवक अपनी बात पर अड़ा रहा। सुबह इस मामले में सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज मनोज कुमार व सीएमएस पहुंचे, मगर बात नहीं बनी। परिवार के लोग डीएनए टेस्ट की मांग पर अड़े हैं।
ओपेक चिकित्सालय कैली में 19 जून की सुबह लालगंज क्षेत्र के रामनगर गांव की गर्भवती उर्मिला को उसके परिजनों ने भर्ती कराया। देर रात करीब 11 बजे उसे ऑपरेशन से बच्चा पैदा हुआ। पिता देवेंद्र के अनुसार, बच्चा पैदा होने के बाद ऑपरेशन कक्ष से निकली एक नर्स ने पुत्र पैदा होने की बात कही। इसके बाद वह चली गई। करीब घंटे भर बाद जब बच्चे को बाहर लाया गया तो वह लड़की निकली। देवेंद्र ने कहा कि उन्होंने तत्काल सीएमएस से आपत्ति की। परिवार के लोग इसे लेकर नाराजगी जताने लगे। आरोप है कि उनकी सुनने को वहां कोई तैयार नहीं हुआ। मामला बढ़ता देख मौके पर सीएमएस कैली डॉ. एएन प्रसाद व ड्यूूटी पर मौजूद चिकित्सक वहां पहुंच गए, लेकिन नवजात के पिता सहित परिवार के लोग नवजात बदल दिए जाने का आरोप लगाते रहे। पूरी रात मामले को लेकर परिवार वहां जुटा रहा। सुबह इसकी जानकारी जब प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार व सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र को हुई तो वह लोग नवजात के पिता व परिजनों को लेकर उस समय ड्यूटी कर रहे पूरे स्टाफ को तलब किया। इस दौरान डिलीवरी की फाइल भी वहां मंगा ली गई। फाइल पर बच्ची पैदा होने की बात लिखी पाई गई, जिस पर पिता देवेंद्र ने आपत्ति जताते हुए कागजों में हेराफेरी का आरोप लगाया।
नवजात के पिता देवेंद्र ने आरोप लगाया कि उसके बच्चे को बदल दिया गया। क्योंकि नर्स ने उसे तत्काल पुत्र प्राप्त होने की जानकारी दी थी, मगर काफी देर बाद बच्ची लाकर गोद में डाल दिया गया। कहा कि यदि सब कुछ सही है तो अस्पताल प्रशासन नवजात, प्रसूता व मेरा डीएनए टेस्ट कराए। समाचार लिखे जाने तक मामले में पिता व परिवार के लोग अपनी पर अड़े रहे।
इधर सीएमएस कैली डॉ. एएन प्रसाद ने कहा कि जिस समय ऑपरेशन हुुआ था, वहां ओटी में सिर्फ उर्मिला ही थीं। जिस नर्स ने यह अफवाह फैलाई है, उसकी तलाश की जा रही है। सभी स्टाफ को नवजात के पिता के सामने लाकर खड़ा कर दिया गया, मगर वह अभी उसे पहचान नहीं पाए। अस्पताल प्रशासन ने अपने स्तर से नवजात, प्रसूता व उनके पिता के खून की जांच कराई है। तीनों का ब्लड ग्रुप एक ही है। इससे साबित होता है कि बच्चा देवेंद्र व उर्मिला का ही है। फिलहाल प्रसूता का अभी अस्पताल में ही इलाज कराया जा रहा है। रही डीएनए कराने की बात तो यह कानून के दायरे में आता है। मेरे अधिकार क्षेत्र में डीएनए कराना नहीं है।