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बाबा पर पांच बिस्वा की जगह पांच बीघा जमीन रजिस्ट्री कराने का इल्जाम
- यौन शोषण के आरोपी सच्चिदानंद पर जमीन हड़पने का भी आरोप
- संपत्ति की खींचतान के बाद फूटा था बाबा के करतूतों का भांडा
- धमकी वाला पोस्टर सामने आने के बाद फिर सुर्खियों में बना बाबा सच्चिदानंद
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आश्रम के गेट पर पोस्टर चस्पा कराने के मामले में फिर सुर्खियों में आए सच्चिदानंद उर्फ दयानंद पर आरोपों की फेहरिश्त काफी लंबी है। सत्संग के बहाने बुलाई गई शिष्याओं का यौन शोषण, छेड़खानी, अपहरण, साजिश आदि के आरोपी बाबा पर लालगंज थानाक्षेत्र के सेल्हरा में जमीन हड़पने का भी इल्जाम है। इसीलिए सेल्हरा गांव के लोग बाबा से ज्यादा खार खाए हुए हैं। लोगों का यहां तक कहना है कि बाबा की इन्हीं चालबाजियों की वजह से उसके गुनाहों का भंडाफोड़ हुआ।
सेल्हरा गांव की 62 वर्षीय कमलावती देवी पत्नी राम नरायन चौधरी बताती हैं कि बाबा सचिदानंद से उनके बेटे श्याम चंद्र ने 15 वर्ष की उम्र में ही ज्ञान लिया था। उसके बाद बाबा ने उसका नाम तपस्यानंद रख दिया गया। तब से सभी लोग उसे इसी नाम से पुकारते हैं। उस समय मेरे ससुर लुटावन ने पांच बिस्वा जमीन आश्रम बनाने के लिए आश्रम ट्रस्ट के नाम रजिस्ट्री किया था लेकिन बाबा सच्चिदानंद ने धोखे से पांच बीघा जमीन अपने नाम करा लिया।
रजिस्ट्री होने के बाद खेत में एक किनारे छोटा सा मकान बनाकर बाबा रहने लगे। दो वर्ष तक बाबा के लोग खेती भी किये। इसके बाद भवन बनवाना शुरू कर दिए । तीन वर्ष में यहां मठ बन कर तैयार हो गया। यहां बाबा के शिष्य रहने लगे। गांव के लोगों का कहना है कि यहां पर गेरुवा वस्त्र धारणा कर महिलाएं व पुरूष आ कर रहते थे। लेकिन महिलाओं की संख्या अधिक रहती थी। वहीं लोगों ने बताया कि मठ के सामने लगे बोर्ड पर पांच माह पूर्व कुटीर आश्रम/ अनाथ आश्रम लिखा था लेकिन इसे मिटाकर अब सत्य लोक आश्रम लिख दिया गया है। कमलावती के बेटे कल्पनाथ चौधरी बताते हैं कि 2019 से दीवानी न्यायालय में वह इसका मुकदमा भी लड़ रहे हैं।
बाबा खुद बता चुका है आश्रम पर कब्जे का विवाद
- बाबा सच्चिदानंद ने खुद मुख्यमंत्री के अलावा पुलिस अधिकारियों से लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक को पत्र भेजकर गुहार लगा चुका है कि सेल्हरा और बस्ती के आश्रम पर कब्जे को लेकर खींचतान चल रही है। एक दिसंबर 2018 को मूड़घाट आश्रम के पास स्थित आश्रम से श्यामाचंद उर्फ तपस्यानंद और तीन साध्वियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। 17 दिसंबर को जब बाबा सच्चिदानंद को लगा कि अब उसके खिलाफ बगावत का बिगुल बजने वाला है तो उसने अपने शिष्यों विश्वासानंद, अमोदानंद, देवेशानंद, शतानंद, उदयानंद और ज्ञान वैराज्ञानंद से प्रार्थनापत्र भेजवाया। यह प्रार्थनापत्र डीआईजी, एसपी से लेकर मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक भेजा गया। जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि लालगंज के सेल्हरा स्थित सतलोक आश्रम और शहर के संत कुटीर आश्रम पर अधिकार जमाने के लिए उसके खिलाफ केस दर्ज कराना चाहते हैं।
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