विक्रमजोत के एक इंटर कॉलेज से गायब हुए तीन किशोर छात्रों का पता चल गया है। पुलिस ने शुक्रवार को तीनों को बनारस से बरामद करने का दावा किया। पुलिस की मानें तो तीनों बच्चे बोर्ड परीक्षा के तनाव के कारण भागे थे। हालांकि पहले किशोरों के अपहरण और उनके बिहार के गया में मिलने की बात सामने आई थी। अब सबको पुलिस के बस्ती पहुंचने का इंतजार है, ताकि बच्चों के गायब होने की सच्चाई पता चल सके।
मालूम हो कि गोण्डा जनपद के नवाबगंज थाना क्षेत्र के लोलपुर गांव के शंभूनाथ कन्नौजिया का बेटा प्रिंस बस्ती के विक्रमजोत स्थित दुर्गा देवी स्मारक शिक्षण संस्थान में 10वीं कक्षा का छात्र है। उसी कॉलेज में उसकी चचेरी बहन भूमि 12वीं व प्रीति 10वीं कक्षा की छात्रा हैं। तीनों 12 फरवरी की सुबह स्कूल बस से फेयरवेल पार्टी में शामिल होने स्कूल पहुंचे, लेकिन पार्टी खत्म होने के बाद तीनों लापता हो गए। काफी तलाश के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस तीनों की तलाश में लग गई।
गया से प्रीति ने किया था फोन... शुक्रवार को घर आ जाएंगेप्रिंस के पिता शंभूनाथ ने बताया कि 14 फरवरी को दोपहर करीब 12.05 बजे उनकी बहन के नंबर पर एक व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल रिसीव करने पर से उधर प्रीति की आवाज सुनाई दी। प्रीति ने बुआ को बताया कि फेयरवेल पार्टी के दौरान ही स्कूल बस चालक ने घर चलने के लिए कहा था। लेकिन 12 वीं के बच्चों का विदाई समारोह चल रहा था। इसलिए वे तब नहीं निकल सके। बस उन्हें छोड़कर चली गई। पार्टी खत्म होने के बाद वह, प्रिंस व भूमि के साथ घर आने के लिए एक बोलेरो पर बैठ गए। बोलेरो में पहले से कुछ लोग थे। कुछ दूर चलने के बाद बोलेरो चालक ने गाड़ी को वापस मोड़ लिया और सभी को बेहोश कर दिया। होश आया तो उन्होंने खुद को एक कमरे में पाया। पता चला कि वह बिहार के गया में हैं। प्रीति ने घरवालों से परेशान न होने की बात कहकर शुक्रवार सुबह आने की बात कही। इसके बाद फोन कट गया। बच्चों से बात होने के बाद शंभूनाथ व अन्य परिजनों ने राहत की सांस ली।
इस बीच बृहस्पतिवार को पुलिस ने दावा किया कि बच्चों का पता चल गया है। बस्ती पुलिस की एक टीम उन्हें लेने जा रही है। हालांकि तब पुलिस ने बच्चे कहां हैं और किस हालत में हैं इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। शुक्रवार देर शाम को पुलिस ने बच्चों के बनारस से बरामद करने का दावा किया। बच्चे बनारस कैसे पहुंचे? बोलेरो से उनके अपहरण की कहानी क्या है ? गया से आए फोन के बारे में पुलिस कुछ भी बताने से परहेज कर रही है।
बोले मनो चिकित्सक
किशोर व किशोरियों में 13 से 19 वर्ष तक हार्मोनल बदलाव होता है। जिसकी वजह से वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं। विपरीत सेक्स के प्रति भी इसमें खास लगाव होता है। उन्हें सही गलत के निर्णय का आभास नहीं होता है। ऐसे में कई बार वह गलत फैसले ले लेते हैं। इस उम्र में वह अनुशासन व ऐसे तमाम चीजों से दूर भागते हैं, जो उन्हें खुद की स्वतंत्रता में बाधा लगती है। ऐसे में माता पिता, शिक्षक से वह दूरी बनाते हैं। उनकी उचित सलाह उन्हें गलत लगती है। इस उम्र में सही गलत निर्णय में उनका मनोमस्तिष्क सक्षम नहीं होता है। ऐसी स्थिति में बच्चे अपनी मनोभावना के अनुरूप घर से निकल जाते हें।
डॉ. एके दुबे
मनोचिकित्सक जिला अस्पताल
यह करें उपाय
मनोचिकित्सक डॉ. एके दुबे ने बताया कि बच्चों को उनके क्रियाकलाप से मनोभाव को पहचाना जा सकता है। जैसे ही अभिभावक को इसका अनुमान लगे तत्काल उन्हें मनो चिकित्सक के पास जरूर ले जाएं। बच्चों के मन में यह जरूर डालें कि उनका भविष्य अनुशासन व लक्ष्य आधारित है। बच्चों को माता पिता अपने साथ अधिक समय तक रखे, जिससे वह अपने इमोशन माता पिता व परिवार में ही ढूढें।