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Basti News: पराली जलाने से जहरीली हो रही हवा, एक्यूआई 158 पर पहुंचा

Thu, 16 Nov 2023 11:49 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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मुण्डेरवा ओवर ब्रिज के पास  पराली जलाता किसान।
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दिनभर छाई रही धुंध, पराली जलाने से रोकने के इंतजाम नाकाफी
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प्रदूषण वाले माहौल में सुबह टहलने से करें परहेज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। दीपावली पर फोड़े गए पटाखों के धुआं का असर अभी खत्म नहीं हो पाया है। ऊपर से खेतों में जलाई जा रही पराली से प्रदूषण चरम पर पहुंच गया है। बृहस्पतिवार को एक्यूआई 158 पर पहुंच गया। इस वजह से दिनभर धुंध छाई रही।
जिले में पराली जलाने से रोकने के दावे कागजी साबित हो रहे हैं। कृषि विभाग व प्रशासन के पराली प्रबंधन के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। हर क्षेत्र में धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है। पराली को खेत में सड़ाकर खाद में परिवर्तित करने के लिए विभाग का दावा है कि सभी 14 राजकीय बीज गोदामों से 24 हजार यूनिट वेस्ट डीकंपोजर निशुल्क किसानों को वितरित किया गया है। इसके बावजूद पराली जलाने की हो रहीं घटनाएं विभागीय दावों की पोल खोल रही हैंं। उधर, मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमर नाथ मिश्र का कहना है कि पर्यावरण प्रदूषण की वजह से धुंध छा रही है।
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बृहस्पतिवार सुबह लोगों को लगा कि मौसम का मिजाज बिगड़ रहा है, लेकिन धूल और धुएं से उठे प्रदूषण की वजह से फिजां बदली नजर आई। विशेषज्ञों का कहना प्रदूषण की अधिकता से ऐसा हो रहा है। प्रदूषण वायुमंडल के निचले स्तर पर है। इससे सुबह टहलने जाने में स्वास्थ्य को लाभ पहुंचने के बजाय नुकसान हो सकता है।
मौसम में बदलाव के कारण शहर की हवा लगातार खराब हो रही है। एक अक्तूबर के बाद से एक्यूआई में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। बृहस्पतिवार को एक्यूआई 158 पर पहुंच गया। इसे खराब स्तर का माना जाता है। हवा के इस स्तर से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के मौसम वैज्ञानिक डाॅ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि वातावरण में नमी के कारण एयर पाल्यूटेंट बड़े आकार के हो जा रहे हैं। यह ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इससे वायुमंडल में एक परत बन जा रही है। इसका घनत्व बढ़ने से अदृश्यता की स्थिति पैदा हो रही है। दिसंबर तक ऐसे हालात बने रह सकते हैं।
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वेस्ट डीकंपोजर से पराली सड़ाने में लग जाएगा 20 दिन
कृषि विभाग किसानों को पूसा वेस्ट डीकंपोजर वितरित कर रहा है। इससे पराली को खाद में परिवर्तित करने के लिए करीब 20 दिन लग जाते हैं। नवोन्मेषी पुरस्कार प्राप्त एक किसान ने बताया कि डीकंपोजर को तैयार करने में 10 दिन लग जाते हैं। इसके बाद पराली को खेत में जुताई कर उस पर डीकंपोजर के घोल का छिड़काव करो, पराली सड़ने में 10-15 दिन लगते हैं। इतना समय यदि पराली को खाद में परिवर्तित करने में लगेगा तो कब खेत तैयार होगा और कब रबी फसलों की बुवाई की जाएगी। ऐसे में पूरा सीजन निकल जाएगा और फसल की बुवाई नहीं हो पाएगी।
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महज तीस मामलों की हुई पुष्टि
यूं तो जिलभर में धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है, लेकिन कृषि विभाग चालू सीजन में महज 30 मामले की ही पुष्टि कर पाया है। विभाग के अनुसार, अब तक जिले में 36 घटनाएं पराली जलाने की सामने आई है। जांच में 30 की ही पुष्टि हो पाई है। इन मामलों में किसानों पर करीब 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। अब तक 7500 रुपये की वसूली किसानों से की गई है।
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वर्ष मामले
2020 50
2021 36
2022 06
2023 36
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वर्जन-
पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को न्याय पंचायत वार गोष्ठी, कृषि विभाग केंद्र पर जनपद स्तरीय गोष्ठी और प्रचार वाहनों से जागरूक किया गया है। इसके अलावा पराली से खाद बनाने के लिए वेस्ट डीकंपोजर वितरित किया जा रहा है। इसके बावजूद यदि कहीं पराली जलाने की घटना हो रही है तो कार्रवाई की जा रही है।
अशोक गौतम, उप निदेशक (कृषि)
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