मंडलीय तिलहन गोष्ठी व मेला
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कृषि विविधिकरण अपना कर किसान उत्पादन व आय बढ़ा सकते हैं। इसके लिए किसानों को वैज्ञानिक विधि से खेती करनी होगी। किसान गांव मेले में मिली जानकारी को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाएं। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष मनाया जा रहा है। किसान अधिक से अधिक मोटे अनाज का उत्पादन करें, जिससे स्वस्थ भारत की कल्पना को साकार किया जा सके।
यह कहना है प्रभारी आयुक्त डीएम प्रियंका निरंजन का, वह शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया में मंडलीय तिलहन गोष्ठी मेले में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि हम रिफाइंड का आयात करते हैं, लेकिन सूरजमुखी उगाकर इसकी कमी को पूरा कर सकते हैं। डीएम ने किसानों को कीटनाशक का वितरण किया। कहा कि जिले की जमीन उपजाऊ है, सिंचाई के भरपूर संसाधन हैं, तिलहन की खेती के लिए उपयुक्त वातावरण हैं। संयुक्त निदेशक कृषि अविनाश चंद्र तिवारी ने कहा कि सरसों, लाही, अलसी की विभिन्न प्रजातियां उपलब्ध हैं। तिलहन में आत्मनिर्भर नहीं हैं। लगभग 60 प्रतिशत तिलहन आयात करना पड़ता है। इस वर्ष 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में तिलहन की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए किसानों को शीघ्र की मिनी किट उपलब्ध कराई जाएगी। डॉ. एसएन सिंह, प्राध्यापक एवं अध्यक्ष ने एकीकृत कृषि प्रणाली एवं प्राकृतिक खेती पर चर्चा की। कृषि विज्ञान केंद्र गोरखपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, डॉ. एसके तोमर ने बताया कि किसान मोटे अनाज जैसे सॉवा, कोदो, काकुन, मडुवा, रागी आदि का उत्पादन करके अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।
इस मौके पर डॉ. डीके श्रीवास्तव, प्रभारी अधिकारी कृषि विज्ञान केंद्र, तथा डॉ. आरवी सिंह, वैज्ञानिक प्रसार ने जायद/खरीफ फसलों में खरपतवार नियंत्रण एवं उर्वरक प्रबंधन के विषय में जानकारी दी।