बस्ती। जिले में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इसका असर अब धान की फसल पर दिखने लगा है। पानी के अभाव में फसलें सूख रही हैं तो कहीं पौध में कल्ले कम बन रहे हैं। यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
बारिश न होने से तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं हो रहा है। उमस भरी गर्मी से सब बेहाल हैं। जमीन में नमी कम होने का असर अब फसलों पर दिखने लगा है। बृहस्पतिवार को हमने जिले के कुछ हिस्से में धान की फसलों की पड़ताल की, जिसमें सल्टौआ, भानपुर, गौर, बनकटी, रुधौली, नगर बाजार, हर्रैया, विक्रमजोत, कप्तानगंज में फसलें सूखती मिलीं। किसानों ने बताया कि खेत में पानी भरो और अगली सुबह सूख जाता है। ऐसे में फसल कैसे तैयार होगी कुछ समझ नहीं आ रहा है।
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बारिश के पानी से ही धान की फसल तैयार होती है। लेकिन, अभी तक खेती लायक पानी नहीं गिरा है। रोपी गई पौध में कल्ले कम आ रहे हैं। यदि ऐसे ही रहा तो इस बार धान की खेती काफी घाटे की रहने वाली है।
-कालिका प्रसाद, किसान, गंगापुर
बारिश न होने से धान की फसल पीली पड़ रही है। खेत में कई जगह धान की पौध सूख गई है। सिंचाई कर धान की खेती नहीं हो जा सकती है। प्रशासन को चाहिए कि अब जिले को सूखाग्रस्त घोषित करे और किसानों को मुआवजा दिलाए।
-जगदीश, किसान, मखदूमपुर
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धान की फसल को बारिश के पानी की आवश्यकता होती है। अभी तक जिले में छुटपुट हल्की बारिश ही हुई है। ऐसे में फसल पीली पड़ रही है और कहीं कहीं सूख रही है। इससे बचाव के लिए किसानों को सलाह दी जाती है कि खेत में नमी बनाए रखें। बलुई मिट्टी में रोपी गई धान की फसल में अधिक समस्याएं आ रही हैं। फसल में पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों को जरूर डालें, कल्ले खुद बढ़ जाएंगे।
-रत्नशंकर ओझा, कृषि रक्षा अधिकारी