संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लगातार बढ़ रहे तापमान का असर गेहूं के अलावा फूलों, सब्जियों और आम की फसल पर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। माना जा रहा है कि फूलों की खुशबू और चमक कम होगी और सब्जियों का आकार घट जाएगा। आम के बौर टिकोरे बनने से पहले ही झड़ने लगे हैं। जल्दी गर्मी पड़ने से फल और सब्जियां जल्दी पकने लगेंगी।
फरवरी में ही बढ़ रहा तापमान परागण प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में जिन सब्जियों की फल में अप्रैल के आखिर तक उत्पादन होते रहने की उम्मीद थी उनमें मार्च में ही नए फूल लगने बंद हो सकते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। इसे लेकर फूल, सब्जी के उत्पादकों और आम के बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें बनने लगी हैं।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या से संबद्ध कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा विज्ञानी डॉ. प्रेमशंकर बताते हैं कि फरवरी में आम, नींबू, संतरे, मौसमी आदि में परागण की प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया के लिए रात में 10 और दिन में 20-22 डिग्री सेल्सियस तापमान होना उपयुक्त होता है। अधिकतम 25-26 डिग्री सेल्सियस तक भी तापमान रहे तो इस प्रक्रिया पर खास असर नहीं पड़ता है। मगर इधर एक हफ्ते से दिन और रात दोनों तापमान ज्यादा हैं। रात में 12-13 और दिन में 31-32 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंच चुका है। ऐसा होने से पराग के कण सूख रहे हैं और फूल मुरझाकर गिर रहे हैं।
फूलों के गिरने की वजह से उत्पादन गिरना तय है। तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी होती रही, तो फलों का आकार तो घटेगा ही, उनके रंग और स्वाद पर भी असर पड़ेगा। आम का मीठापन कम होगा और नीबू,संतरे के रस में कमी आएगी।
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पौधों के जमाव में आ रही बाधा
- कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. राघवेंद्र सिंह के मुताबिक इस समय कद्दू वर्गीय सब्जी की फसल की बुआई चल रही है। इसके जमाव के लिए 28-30 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए। मगर यह 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। तापमान जैसे ही 35 डिग्री के पार होगा तो पौधों का मिट्टी में जमाव मुश्किल हो जाएगा। इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होगी और उत्पादन घटेगा।
टमाटर में कम होगा गूदा, छोटा होगा खीरा
- सब्जी वैज्ञानिक बताते हैं कि गर्मी के असर से टमाटर का गूदा कम होगा और उसका वजन घट जाएगा। साथ ही कद्दू, लौकी, खीरा, ककड़ी, तरोई, खरबूजा और तरबूज सहित लता वाली सब्जियों का आकार घट जाएगा। प्याज की कंद भी छोटी होगी।
किसान ऐसे करें बचाव
- खेत के किनारे शेड लगाएं।
- किनारों पर मक्के की फसल बोएं।
- सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, आयरन, और बोरान का छिड़काव करें।
- तापमान को सहने वाली प्रजातियों को बोएं।