- देर शाम तक वन विभाग की टीम ने की तलाश, नहीं मिला कोई सुराग
- कप्तानगंज क्षेत्र के ऐंठी मेढ़ौआ गांव के सिवान में दिखा झुंड, वीडियो वायरल
संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज/नगर बाजार (बस्ती)। बहराइच के बाद अब बस्ती के नगर बाजार व कप्तानगंज क्षेत्र में भेड़ियों का झुंड दिखने से लोग दहशत में हैं। शनिवार की रात कप्तानगंज क्षेत्र के ऐंठी मेढ़ौआ गांव में गन्ने के खेत में ग्रामीणों ने भेड़िये जैसे जानवरों का झुंड देखा। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग और पुलिस टीम पहुंची। काफी देर तक तलाश की गई, लेकिन जानवर खेत में नहीं मिले। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है कि क्षेत्र में दिखे जानवर भेड़िये ही हैं।
ऐंठी मेढ़ौआ गांव के सिवान में कबीर आश्रम है। शनिवार रात करीब 12 बजे आश्रम के अध्यक्ष विवेक नरायन त्रिपाठी उर्फ तुलसी कार से आश्रम से घर जा रहे थे इसी दौरान उन्होंने गन्ने के खेत में भेड़ियों का झुंड देखा। उन्होेंने इसका वीडियो भी बनाया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसके बाद गांव के लोगों को बताया और वन विभाग के अधिकारियों और पुलिस को भी सूचना दी। कप्तानगंज थाने की पुलिस और कप्तानगंज के डिप्टी रेंजर ज्ञान प्रकाश गौतम, रवींद्र सिंह व सुनील मिश्रा मौके पर पहुंचे तो घंटों भेड़ियों की तलाश की गई लेकिन कुछ पता नहीं चला।
रविवार को फिर कप्तानगंज के डिप्टी रेंजर ज्ञान प्रकाश गौतम, वन दरोगा राम दयाल यादव, रविंद्र सिंह, संजय निषाद सहित वन विभाग के कर्मचारियों की टीम मेढ़ौआ गांव पहुंची। आसपास की झाड़ियों, मनोरमा नदी के किनारे जंगलों और गन्ने के खेतों में शाम चार बजे तक कांबिंग की गई लेकिन जानवरों का सुराग नहीं मिला। खेत की सिंचाई कर रहे मेढ़ौआ गांव के श्यामू ने बताया कि रात में उसने भी भेड़ियों का झुंड देखा था। मनोरमा नदी के निकटवर्ती पोखरा, महुरैया, मरवटिया पांडेय, मीता सोती, बरहटा, मुड़ियारी, मेढ़ौआ सहित कई गांवों के लोग दहशत में है।
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वीडियो में दिखे जानवरों की अभी पुष्टि नहींं हो पाई है। कोई पदचिह्न भी नहीं मिला है जिससे यह तय हो सके कि क्षेत्र में भेड़िये दिखे हैं या कोई और जानवर। इसके बावजूद सतर्क रहने की जरूरत है। ग्रामीण शाम को खेतों में न जाएं। बच्चों की सुरक्षा के प्रति भी सजग रहें।
- जेपी सिंह, डीएफओ
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कुसमौर में भी दिखे जानवर, वन दरोगा बोले- भेड़िये के पदचिह्न नहीं
नगर थाना क्षेत्र के ग्राम कुसमौर में शनिवार रात कुछ ग्रामीणों ने खेत की तरफ भेड़िया दिखने का शोर मचाया। इसके बाद भीड़ जुट गई। लाठी-डंडे लेकर टाॅर्च की मदद से लोग खेतों भेड़िया ढूंढने लगे लेकिन कुछ पता नहीं चला। गांव के लोग रातभर दहशत में रहे।
सुबह फिर गांव के मंगरू, लक्ष्मन व काशी आदि ने धान के खेत में जंगली जानवर देखकर शोर मचाया। इसी बीच किसी ने इसकी सूचना डॉयल-112 पर दे दी। थोड़ी देर बाद पहुंचे पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में फिर खेतों व खलिहान में जानवर की तलाश की गई। ग्राम प्रधान कृष्ण भूषण स्मृति ने बताया कि पुलिस की सूचना पर वन दरोगा सुनील कुमार भी पहुंचे। खेत में मिले पदचिह्नों को देखकर उन्होंने बताया कि यह भेड़िये के पैरों के निशान नहीं हैं, बल्कि किसी अन्य जंगली जानवर के हैं। तब ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
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पहले भी इलाके में मिल चुके है खूनी भेड़िये
कप्तानगंज क्षेत्र के कई गांवों में पहले भी खूनी भेड़िये बकरियों को शिकार बना चुके हैं। क्षेत्र के बनहर, थूहा, खोभा, बनहा, ओझागंज सहित कई गांवों में दो साल पहले खूनी भेड़िये का आतंक था। क्षेत्र के विजय पाल सिंह, राम मूरत, सुरेंद्र शर्मा आदि ने बताया कि वन विभाग की टीम ने पिंजरा लगाया था लेकिन भेड़िया पकड़ा नहीं जा सका था।
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सियार और भेड़िया में कई अंतर
वन्य जीवों के जानकार बताते हैं कि सियार और भेड़िया एक ही प्रजाति के जीव हैं, लेकिन दोनों में कई अंतर है। भेड़िये 41 से 63 इंच तक लंबे होते हैं जबकि सियार की लंबाई 34 से 37 इंच तक होती है। भेड़िये का औसत वजन 32 से 50 किलोग्राम तक होता है जबकि सियार का औसत वजन 15 से 30 किलोग्राम के बीच होता है। भेड़िया मांसाहारी होता है, जो आमतौर पर बड़े जीवों का शिकार करता है। वहीं सियार सर्वाहारी होता है। वह छोटे जानवरों का शिकार करता है और अन्य जीवों का किया हुआ शिकार भी चुरा कर खा लेता है।